सर्वप्रथम 'सीमान्त व्यक्ति' (मार्जिनल मैन) की संकल्पना का प्रतिपादन किया गया
- (a)रॉबर्ट ई. पार्क
- (b)रॉबर्ट रेडफील्ड
- (c)लुई वर्थ
- (d)लुई डुमाण्ट
सही उत्तर — (a) रॉबर्ट ई. पार्क। अमेरिकी समाजशास्त्री रॉबर्ट एज़रा पार्क, जो शिकागो स्कूल के संस्थापकों में से थे, ने अपने 1928 के निबंध 'ह्यूमन माइग्रेशन एण्ड द मार्जिनल मैन' में 'सीमान्त व्यक्ति' (मार्जिनल मैन) की अवधारणा प्रस्तुत की। सीमान्त व्यक्ति वह है जो एक साथ दो भिन्न सांस्कृतिक जगतों में रहता है — सामान्यतः प्रवासन तथा सांस्कृतिक संपर्क से उत्पन्न — और जो पूर्णतः किसी में भी नहीं समाता। पार्क के शिष्य एवरेट वी. स्टोनक्विस्ट ने बाद में अपनी 1937 की पुस्तक 'द मार्जिनल मैन' में इस विचार को विस्तृत किया, परन्तु यह अवधारणा पार्क द्वारा प्रतिपादित की गई थी।
- (b)रॉबर्ट रेडफील्ड — गलत — रेडफील्ड 'लोक-नगरीय सातत्य' (फोक-अर्बन कॉन्टिनुअम) तथा अपने 'लघु समुदाय'/'लोक समाज' अध्ययनों (जैसे तेपोज्तलान, युकातान) के लिए जाने जाते हैं, न कि सीमान्त व्यक्ति की अवधारणा के लिए।
- (c)लुई वर्थ — गलत — वर्थ, जो शिकागो स्कूल के भी सदस्य थे, अपने 'अर्बनिज़्म एज़ अ वे ऑफ लाइफ' (1938) तथा घेटो के अपने अध्ययन के लिए प्रसिद्ध हैं, न कि सीमान्त-व्यक्ति की अवधारणा के लिए।
- (d)लुई डुमाण्ट — गलत — डुमाण्ट एक फ्रांसीसी मानवशास्त्री थे, जो भारतीय जाति व्यवस्था के अध्ययन 'होमो हायरार्किकस' के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं; उन्होंने सीमान्त व्यक्ति का प्रतिपादन नहीं किया।
प्रवासन तथा जातीय-संबंधों के समाजशास्त्र में, 'सीमान्त व्यक्ति' वह व्यक्ति है जो दो संस्कृतियों की सीमा पर खड़ा होता है, किसी में भी पूर्ण सदस्यता के बिना — यह स्थिति मनोवैज्ञानिक तनाव और साथ ही एक व्यापक, विश्वबंधुत्ववादी दृष्टिकोण दोनों को जन्म देती है। यह विचार शिकागो स्कूल के आरंभिक-20वीं-सदी के प्रवासन व नगरीय जीवन के अध्ययनों से उपजा।
चारों विकल्प वास्तविक सामाजिक सिद्धांतकार हैं, अतः यह प्रश्न किसी अवधारणा को उसके कर्ता से जोड़ने की परीक्षा लेता है। विश्वसनीय विधि यह है कि प्रत्येक नाम को उसके सांकेतिक विचार से जोड़ें: पार्क→सीमान्त व्यक्ति, रेडफील्ड→लोक-नगरीय सातत्य, वर्थ→जीवन-शैली के रूप में नगरवाद, डुमाण्ट→जाति/होमो हायरार्किकस।
- रॉबर्ट ई. पार्क ने अपने 1928 के निबंध 'ह्यूमन माइग्रेशन एण्ड द मार्जिनल मैन' में 'सीमान्त व्यक्ति' प्रस्तुत किया
- पार्क शिकागो स्कूल ऑफ सोशियोलॉजी के एक केन्द्रीय व्यक्तित्व थे
- पार्क के शिष्य एवरेट वी. स्टोनक्विस्ट ने इस विचार को 'द मार्जिनल मैन' (1937) में विकसित किया
- सीमान्त व्यक्ति दो संस्कृतियों की सीमा पर जीता है, किसी में भी पूर्णतः नहीं समाता

- (1937 की पुस्तक लिखने वाले) एवरेट स्टोनक्विस्ट को (अवधारणा गढ़ने वाले) पार्क के स्थान पर श्रेय देना
- शिकागो-स्कूल के सिद्धांतकारों — पार्क, वर्थ व रेडफील्ड — को भ्रमित करना, जबकि प्रत्येक की अपनी सांकेतिक अवधारणा है
UPPSC/UPSC पूछते हैं 'X की संकल्पना/प्रतिपादन किसने किया' — इस विचार को उसके मूल प्रतिपादक सिद्धांतकार से जोड़ें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
'लोक-नगरीय सातत्य' (फोक-अर्बन कॉन्टिनुअम) की अवधारणा किस सिद्धांतकार से संबंधित है ?
- (a)रॉबर्ट रेडफील्ड
- (b)रॉबर्ट ई. पार्क
- (c)लुई वर्थ
- (d)एमिल दुर्खीम
उत्तर(a) रॉबर्ट रेडफील्ड — उन्होंने अपने मैक्सिकन सामुदायिक अध्ययनों से लोक-नगरीय सातत्य विकसित किया।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारतीय जाति व्यवस्था के अध्ययन वाली पुस्तक 'होमो हायरार्किकस' किसने लिखी ?
- (a)एम.एन. श्रीनिवास
- (b)लुई डुमाण्ट
- (c)जी.एस. घुर्ये
- (d)आन्द्रे बेतील
उत्तर(b) लुई डुमाण्ट — भारत में जाति व पदानुक्रम का उनका संरचनात्मक अध्ययन।