वर्ष 1962 में प्रकाशित पुस्तक 'साइलेन्ट स्प्रिंग' जिससे विश्व के पर्यावरणीय आन्दोलन को गति मिली, के लेखक हैं
- (a)केरोलीन मर्चेंट
- (b)कार्ल मार्क्स
- (c)रेचल कारसन
- (d)राजगोपालन
सही उत्तर — (c) रेचल कारसन। 'साइलेंट स्प्रिंग' (1962) की लेखिका अमेरिकी समुद्री जीवविज्ञानी तथा संरक्षणवादी रेचल कारसन थीं। इसमें डी.डी.टी. जैसे संश्लेषित कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से होने वाली पारिस्थितिक क्षति — विशेषकर पक्षियों की संख्या में गिरावट — का दस्तावेजीकरण किया गया, और इसे व्यापक रूप से आधुनिक पर्यावरण आंदोलन की शुरुआत करने का श्रेय दिया जाता है, जिसने अमेरिका में कृषि में डी.डी.टी. पर प्रतिबंध तथा अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) की स्थापना में योगदान दिया।
- (a)केरोलीन मर्चेंट — केरोलीन मर्चेंट एक इको-फेमिनिस्ट विज्ञान इतिहासकार हैं, जो 'द डेथ ऑफ नेचर' (1980) के लिए जानी जाती हैं, न कि 'साइलेंट स्प्रिंग' के लिए।
- (b)कार्ल मार्क्स — कार्ल मार्क्स 19वीं सदी के राजनीतिक दार्शनिक व अर्थशास्त्री थे ('दास कैपिटल', 'द कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो'); उनका 'साइलेंट स्प्रिंग' या 1960 के दशक की कीटनाशक बहस से कोई संबंध नहीं था।
- (d)राजगोपालन — 'साइलेंट स्प्रिंग' नामक पर्यावरणीय क्लासिक कृति का इस नाम से कोई संबंध नहीं है; यह 1962 की पुस्तक से असंबद्ध एक भ्रामक विकल्प है।
'साइलेंट स्प्रिंग' में यह तर्क दिया गया कि स्थायी संश्लेषित कीटनाशक — विशेषकर डी.डी.टी. — खाद्य शृंखलाओं में संचित होकर गैर-लक्षित जीवों को विषाक्त कर देते हैं; इसका शीर्षक ऐसे वसंत ऋतु की कल्पना करता है जिसमें पक्षियों का कलरव न हो। रेचल कारसन की प्रमाण-आधारित चेतावनी ने कीटनाशक विनियमन को एक जनहित के मुद्दे में बदल दिया और इसे आधुनिक पर्यावरण आंदोलन का आरंभ-बिंदु माना जाता है, जिसने प्रथम अर्थ डे (1970) तथा अमेरिकी EPA की स्थापना में योगदान दिया।
जाल यह है कि दिए गए नाम शैक्षणिक रूप से प्रशंसनीय प्रतीत होते हैं: केरोलीन मर्चेंट (एक वास्तविक पर्यावरणीय लेखिका) तथा एक सामान्य भारतीय उपनाम। इस शीर्षक को दृढ़ता से रेचल कारसन तथा डी.डी.टी./कीटनाशकों से जोड़ें — यही युग्म परीक्षक का लक्ष्य है।
- 'साइलेंट स्प्रिंग' 1962 में प्रकाशित; लेखिका रेचल कारसन (अमेरिकी समुद्री जीवविज्ञानी)
- केन्द्रीय विषय: खाद्य शृंखला के माध्यम से संश्लेषित कीटनाशकों, विशेषकर डी.डी.टी., से होने वाली हानि
- आधुनिक पर्यावरण आंदोलन आरंभ करने का श्रेय; अमेरिका में डी.डी.टी. प्रतिबंध तथा EPA (1970) की स्थापना को प्रभावित किया
- केरोलीन मर्चेंट ने 'द डेथ ऑफ नेचर' (1980) लिखी — एक भिन्न कृति और लेखिका

- रेचल कारसन को केरोलीन मर्चेंट या अन्य पर्यावरणीय लेखकों के साथ भ्रमित करना
- किसी यादृच्छिक उपनाम (राजगोपालन) को केवल 'भारतीय-सा प्रतीत होने' के कारण पुस्तक से जोड़ देना
UPSC/UPPSC किसी ऐतिहासिक पुस्तक को उसके लेखक या मूल विचार से जोड़ते हैं — 'साइलेंट स्प्रिंग = रेचल कारसन = डी.डी.टी./कीटनाशक = पर्यावरणवाद का जन्म' को एक इकाई के रूप में याद रखें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
रेचल कारसन की 'साइलेंट स्प्रिंग' में उजागर की गई पारिस्थितिक क्षति मुख्यतः किस कीटनाशक के कारण हुई थी ?
- (a)डी.डी.टी.
- (b)केवल मैलाथियान
- (c)एंडोसल्फान
- (d)ग्लाइफोसेट
उत्तर(a) डी.डी.टी. — इसकी स्थायित्व-क्षमता तथा खाद्य शृंखला में संचय, जिससे पक्षियों को हानि पहुँची, पुस्तक की केन्द्रीय चिंता थी।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किसी स्थायी प्रदूषक की सांद्रता का खाद्य शृंखला के क्रमशः उच्चतर स्तरों पर बढ़ते जाना क्या कहलाता है ?
- (a)यूट्रोफिकेशन
- (b)जैव-आवर्धन (बायोमैग्निफिकेशन)
- (c)जैव-उपचारण (बायोरेमेडिएशन)
- (d)नाइट्रीकरण
उत्तर(b) जैव-आवर्धन (बायोमैग्निफिकेशन) — वह प्रक्रिया जिसे 'साइलेंट स्प्रिंग' ने डी.डी.टी. जैसे कीटनाशकों के संदर्भ में लोकप्रिय बनाया।