मानव शरीर में निम्नलिखित में से कौन-सी ग्रंथि अन्तःस्रावी एवं बहिःस्रावी दोनों ही प्रकार की ग्रंथि है ?
- (a)ऐड्रिनल ग्रंथि
- (b)अश्रुग्रंथि
- (c)अग्नाशय
- (d)थाइरॉइड
सही उत्तर — (c) अग्नाशय। अग्नाशय पाठ्यपुस्तक की विशिष्ट हेटेरोक्राइन (मिश्रित) ग्रंथि है। इसका अधिकांश भाग बहिःस्रावी है: एसिनार कोशिकाएँ अग्न्याशयी रस बनाती हैं — अग्न्याशयी एमाइलेज़, लाइपेज़, न्यूक्लिएज़ तथा प्रोटीन-पाचक जाइमोजन ट्रिप्सिनोजन व काइमोट्रिप्सिनोजन, साथ ही वाहिनी-कोशिकाओं से बाइकार्बोनेट — जो अग्न्याशयी वाहिनी से होकर ग्रहणी (duodenum) में डाला जाता है, अर्थात् एक वाहिनी के माध्यम से उपकला सतह पर पहुँचाया जाता है। उसी ऊतक में बिखरे हुए लैंगरहैंस के द्वीपाणु हैं — जो अंग के भार का मात्र लगभग 1-2% हैं — जिनकी अल्फा कोशिकाएँ ग्लूकागॉन, बीटा कोशिकाएँ इन्सुलिन तथा डेल्टा कोशिकाएँ सोमेटोस्टेटिन को बिना किसी वाहिनी के सीधे रक्तप्रवाह में स्रावित करती हैं। एक ही अंग, स्राव के दोनों प्रकार — जो ठीक वही है जो प्रश्न में पूछा गया है।
- (a)ऐड्रिनल ग्रंथि — पूर्णतः अन्तःस्रावी तथा पूर्णतः वाहिनी-रहित। वल्कुट (cortex) एल्डोस्टेरॉन, कॉर्टिसोल तथा अल्प मात्रा में एण्ड्रोजन स्रावित करता है; मध्यांश (medulla) एड्रिनलिन तथा नॉरएड्रिनलिन स्रावित करता है — सभी सीधे रक्त में। इसकी कोई स्रावी वाहिनी नहीं है और न ही कोई बहिःस्रावी उत्पाद।
- (b)अश्रुग्रंथि — पूर्णतः बहिःस्रावी। यह आँसू उत्पन्न करती है और अश्रु-वाहिनियों के माध्यम से उन्हें नेत्र की सतह पर पहुँचाती है। यह रक्तप्रवाह में कोई हॉर्मोन स्रावित नहीं करती, इसलिए यह प्रश्न के अन्तःस्रावी भाग को पूरा नहीं करती।
- (d)थाइरॉइड — पूर्णतः अन्तःस्रावी। पुटिकीय (follicular) कोशिकाएँ थाइरॉक्सिन (T4) तथा ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3) स्रावित करती हैं तथा पैराफॉलिक्युलर सी-कोशिकाएँ कैल्सिटोनिन स्रावित करती हैं, ये सभी रक्त में जाते हैं। पुटिकाओं के भीतर स्थित कोलॉइड एक आंतरिक भण्डार है, वाहिनी-वाहित स्राव नहीं, इसलिए थाइरॉइड वाहिनी-रहित है।
ग्रंथियों का वर्गीकरण इस आधार पर होता है कि उनका उत्पाद कहाँ जाता है। बहिःस्रावी ग्रंथि अपना स्राव किसी वाहिनी के माध्यम से शरीर की सतह या किसी गुहा में डालती है (पसीना, लार, आँसू, पाचक रस)। अन्तःस्रावी ग्रंथि वाहिनी-रहित होती है और हॉर्मोन को रक्तप्रवाह में छोड़ती है। कुछ अंग दोनों कार्य करते हैं और उन्हें हेटेरोक्राइन या मिश्रित ग्रंथि कहा जाता है — मानव शरीर में अग्नाशय इसका मानक उदाहरण है, तथा यकृत एवं जनद (वृषण व अंडाशय) भी दोनों कार्यों को जोड़ते हैं।
उत्तर तक पहुँचने का सबसे तेज़ रास्ता प्रत्येक विकल्प से दो प्रश्न पूछना है: क्या इसकी कोई वाहिनी है, और क्या यह रक्त में हॉर्मोन छोड़ती है? ऐड्रिनल तथा थाइरॉइड वाहिनी-रहित हैं (केवल अन्तःस्रावी); अश्रुग्रंथि की वाहिनी है परंतु कोई हॉर्मोन नहीं (केवल बहिःस्रावी); केवल अग्नाशय दोनों प्रश्नों का उत्तर 'हाँ' में देता है। जाल यह है कि अग्नाशय को प्रायः सबसे पहले अन्तःस्रावी अध्याय में इन्सुलिन के स्रोत के रूप में पढ़ाया जाता है, इसलिए विद्यार्थी भूल जाते हैं कि अंग का 98% से अधिक भाग पाचक एसिनार ऊतक है।
- बहिःस्रावी अग्नाशय: एसिनार कोशिकाएँ → अग्न्याशयी रस (एमाइलेज़, लाइपेज़, न्यूक्लिएज़, ट्रिप्सिनोजन, काइमोट्रिप्सिनोजन) → अग्न्याशयी वाहिनी → ग्रहणी
- अन्तःस्रावी अग्नाशय: लैंगरहैंस के द्वीपाणु — अल्फा कोशिकाएँ → ग्लूकागॉन, बीटा कोशिकाएँ → इन्सुलिन, डेल्टा कोशिकाएँ → सोमेटोस्टेटिन — रक्त में स्रावित
- द्वीपाणु अग्नाशय का केवल लगभग 1-2% भाग बनाते हैं; शेष बहिःस्रावी एसिनार ऊतक है
- मानव शरीर के अन्य मिश्रित (हेटेरोक्राइन) अंग: यकृत, तथा जनद — वृषण व अंडाशय
- ऐड्रिनल व थाइरॉइड वाहिनी-रहित अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ हैं; अश्रुग्रंथि, लार ग्रंथि व स्वेद ग्रंथि वाहिनी-युक्त बहिःस्रावी ग्रंथियाँ हैं

- अग्नाशय को 'केवल अन्तःस्रावी' मान लेना क्योंकि इसे अन्तःस्रावी अध्याय में पढ़ाया जाता है
- यह मान लेना कि वाहिनी वाली ग्रंथि हॉर्मोन नहीं बना सकती
- इन्सुलिन (बीटा कोशिका) को ग्लूकागॉन (अल्फा कोशिका) से बदल देना
UPPSC और UPSC इसे या तो एक-पंक्ति प्रश्न ('कौन-सी ग्रंथि अन्तःस्रावी व बहिःस्रावी दोनों है') के रूप में पूछते हैं, या ग्रंथियों को हॉर्मोन/स्राव से मिलाने वाले सुमेल-सूची के रूप में — इसलिए श्रृंखला याद रखें: ग्रंथि → कोशिका प्रकार → स्राव → गंतव्य।
सूची I (अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ) को सूची II (स्रावित हॉर्मोन) से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए: सूची I I. जनद II. पीयूष ग्रंथि III. अग्नाशय IV. ऐड्रिनल सूची II A) इन्सुलिन B) प्रोजेस्ट्रॉन C) वृद्धि हॉर्मोन D) कॉर्टिसोन कूट:
- (a) I-C, II-B, III-D, IV-A
- (b) I-B, II-C, III-D, IV-A
- (c) I-B, II-C, III-A, IV-D
- (d) I-C, II-B, III-A, IV-D
उत्तर(c) I-B, II-C, III-A, IV-D
अन्तःस्रावी पक्ष से वही अवधारणा — अग्नाशय को अन्तःस्रावी ग्रंथियों में इसलिए गिना जाता है क्योंकि इसके द्वीपाणु इन्सुलिन को रक्त में स्रावित करते हैं।
मानव शरीर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सामान्य पित्त-वाहिनी अपनी विषय-वस्तु आमाशय में छोड़ती है। 2. अग्न्याशयी वाहिनी अपनी विषय-वस्तु ग्रहणी में छोड़ती है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर(b) केवल 2
उसी विचार का दूसरा आधा भाग — अग्न्याशयी वाहिनी का रस ग्रहणी में ले जाना ठीक वही बहिःस्रावी कार्य है जो अग्नाशय को मिश्रित ग्रंथि बनाता है।
अग्नाशय के लैंगरहैंस-द्वीपाणु की बीटा कोशिका द्वारा निम्नलिखित में से कौन-सा हॉर्मोन स्रावित होता है ?
- (a) एल्डोस्टेरॉन
- (b) एड्रिनलिन
- (c) इन्सुलिन
- (d) ग्लूकागॉन
उत्तर(c) इन्सुलिन
UPPSC ने तीन वर्ष बाद उसी ग्रंथि पर लौटकर अन्तःस्रावी भाग की परीक्षा ली — द्वीपाणु की बीटा कोशिकाओं द्वारा इन्सुलिन का स्राव।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अग्नाशय के लैंगरहैंस-द्वीपाणु अपना स्राव सीधे किसमें छोड़ते हैं ?
- (a)अग्न्याशयी वाहिनी
- (b)रक्तप्रवाह
- (c)ग्रहणी
- (d)सामान्य पित्त-वाहिनी
उत्तर(b) रक्तप्रवाह — द्वीपाणु अग्नाशय का वाहिनी-रहित, अन्तःस्रावी भाग हैं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
यदि किसी व्यक्ति की अग्न्याशयी वाहिनी पूर्णतः अवरुद्ध हो जाए जबकि लैंगरहैंस-द्वीपाणु स्वस्थ बने रहें, तो सबसे प्रत्यक्ष परिणाम होगा
- (a)मधुमेह
- (b)वसा एवं प्रोटीन के पाचन में बाधा
- (c)हाइपोथायरॉइडिज़्म
- (d)रक्त कैल्शियम में गिरावट
उत्तर(b) वसा एवं प्रोटीन के पाचन में बाधा — केवल बहिःस्रावी मार्ग (लाइपेज़, ट्रिप्सिनोजन, काइमोट्रिप्सिनोजन) अवरुद्ध होता है; इन्सुलिन व ग्लूकागॉन फिर भी रक्त तक पहुँचते हैं।