थर्मस फ्लास्क में लम्बे समय तक तरल गर्म या ठंडा रहता है क्योंकि ऊष्मा की कोई हानि अथवा प्राप्ति नहीं होती है
- (a)संचालन
- (b)संवहन एवं विकिरण
- (c)(a) और (b) दोनों
- (d)उपरोक्त में से कोई नहीं
सही उत्तर — (C) (a) और (b) दोनों — अर्थात् थर्मस ऊष्मा-स्थानांतरण के तीनों तरीकों को रोकता है: संचालन, संवहन और विकिरण। थर्मस (निर्वात या ड्यूवर फ्लास्क) एक दोहरी-दीवार वाला काँच का पात्र है जिसकी दोनों दीवारों के बीच की जगह से वायु निकाल दी जाती है। संचालन और संवहन दोनों को किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है — संचालन ऊर्जा को अणु से अणु में स्थानांतरित करता है, संवहन को भौतिक रूप से परिचालित होने वाले तरल की आवश्यकता होती है — इसलिए अंतराल में निर्वात होने से किसी भी दिशा में ऊष्मा ढोने के लिए लगभग कुछ भी नहीं बचता। विकिरण अलग है: यह विद्युतचुंबकीय (मुख्यतः अवरक्त) तरंगों के रूप में यात्रा करता है और इसे किसी भी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए निर्वात इसे रोक नहीं सकता। इसीलिए निर्वात-अंतराल के सामने वाली दोनों सतहों पर चाँदी की परत (सिल्वरिंग) की जाती है: एक चमकदार परत खराब उत्सर्जक और उत्कृष्ट परावर्तक होती है, इसलिए विकिरणित ऊष्मा गर्म तरल में वापस उछल जाती है, या ठंडे तरल से दूर परावर्तित हो जाती है। शेष बचा एकमात्र रास्ता गर्दन है, जिसे कॉर्क या प्लास्टिक के डाट से बंद किया जाता है और जो छोटे विरोधक (इंसुलेटिंग) आधारों पर टिकी होती है — दोनों ही कुचालक हैं। चूँकि विकल्प (a) संचालन को कवर करता है और विकल्प (b) संवहन व विकिरण को, इसलिए वह विकल्प जो तीनों का नाम लेता है वह (c) है।
- (a)संचालन — सत्य परंतु अपूर्ण। निर्वात संचालन को अवश्य रोकता है, परंतु संचालन तीनों तरीकों में से केवल एक है; जो फ्लास्क केवल संचालन को रोकता वह विकिरण से फिर भी ऊष्मा खोता। चूँकि विकल्प (c) उपलब्ध है, केवल संचालन का नाम लेना आंशिक उत्तर है।
- (b)संवहन एवं विकिरण — यह भी सत्य परंतु अपूर्ण है। निर्वात संवहन को रोकता है और चाँदी की परत विकिरण को रोकती है — परंतु संचालन भी उसी निर्वात द्वारा उतनी ही जान-बूझकर रोका जाता है, इसलिए इसे छोड़ देना फ्लास्क जो करता है उसे कमतर दर्शाता है।
- (d)उपरोक्त में से कोई नहीं — गलत, क्योंकि विकल्प (a) और (b) मिलकर उन तीनों तरीकों का ठीक-ठीक नाम लेते हैं जिन्हें फ्लास्क विफल करने हेतु डिज़ाइन किया गया है। सही विकल्प, (c), इसी सूची में है।
ऊष्मा तीन तरीकों से गति करती है। संचालन किसी पदार्थ के भीतर आणविक कंपन द्वारा, और धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉनों द्वारा, बिना पदार्थ की सामूहिक गति के ऊर्जा स्थानांतरित करता है — इसे माध्यम की आवश्यकता होती है और यह ठोसों में सर्वोत्तम कार्य करता है। संवहन किसी गर्म हुए तरल के सामूहिक संचलन द्वारा ऊष्मा स्थानांतरित करता है जो कम घना होकर ऊपर उठता है — इसे तरल या गैस की आवश्यकता होती है। विकिरण विद्युतचुंबकीय तरंगों, मुख्यतः अवरक्त, के रूप में ऊष्मा स्थानांतरित करता है, और यह एकमात्र तरीका है जो निर्वात को पार करता है, जिसके कारण ही सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी तक पहुँचती है। एक निर्वात फ्लास्क प्रत्येक तरीके पर एक अलग डिज़ाइन-विशेषता से प्रहार करता है: पहले दो के लिए निर्वात, तीसरे के लिए एक परावर्तक चाँदी-लेपित सतह।
सबसे सामान्य भ्रम यह मान लेना है कि निर्वात विकिरण को भी रोकता है। ऐसा नहीं हो सकता — विकिरण को किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं, और ठीक इसीलिए चाँदी की परत का अस्तित्व है। प्रत्येक विशेषता को उस तरीके से जोड़ें जिसे वह विफल करती है और प्रश्न स्वतः हल हो जाता है: संचालन व संवहन के विरुद्ध निर्वात, विकिरण के विरुद्ध सिल्वरिंग, और गर्दन से शेष बचे संचालन के विरुद्ध विरोधक डाट व आधार। इस बारे में ईमानदार भी रहें: कोई फ्लास्क पूर्ण नहीं होता, इसलिए थर्मस किसी तरल को घंटों गर्म रखता है, हमेशा के लिए नहीं। इस डिज़ाइन की कल्पना जेम्स ड्यूवर ने 1892 में द्रवित गैसों के भंडारण हेतु की थी, इससे पहले कि यह घरेलू वस्तु बनी।
- संचालन और संवहन को भौतिक माध्यम चाहिए; विकिरण को नहीं और यह निर्वात को पार कर सकता है
- थर्मस की दोहरी दीवारों के बीच का निर्वात माध्यम हटा देता है और इस प्रकार संचालन व संवहन दोनों को रोकता है
- भीतरी व बाहरी दीवार की चाँदी-लेपित सतहें विकिरित ऊष्मा को परावर्तित कर देती हैं, क्योंकि चमकदार सतह खराब उत्सर्जक व अच्छी परावर्तक होती है
- गर्दन पर एक विरोधक डाट और छोटे आधार शेष बचे संचालन-मार्ग को कम कर देते हैं
- निर्वात फ्लास्क की कल्पना जेम्स ड्यूवर ने 1892 में क्रायोजेनिक कार्य हेतु की; यह ऊष्मा-प्रवाह को धीमा करता है परंतु पूर्णतः रोक नहीं सकता
उत्तर (c): तीनों तरीकों की जाँच हो चुकी है — संचालन (विकल्प a) साथ ही संवहन व विकिरण (विकल्प b), अर्थात् (a) और (b) दोनों।
- यह विश्वास करना कि निर्वात विकिरण को भी रोकता है — ऐसा नहीं है; इसीलिए सिल्वरिंग की जाती है
- यह विश्वास करना कि सिल्वरिंग संचालन को रोकती है — ऐसा नहीं है; निर्वात रोकता है
- यह भूल जाना कि बिना तरल के संवहन असंभव है, इसलिए यह निर्वात में नहीं हो सकता
- यह मान लेना कि थर्मस ऊष्मा-प्रवाह को पूर्णतः रोक देता है, न कि केवल धीमा करता है
UPPSC और UPSC दोनों के विज्ञान वर्ग में यह एक स्थायी एक-पंक्ति प्रश्न है — 'थर्मस क्यों काम करता है', 'कार रेडिएटर / कमरे के हीटर / सूर्य के प्रकाश में कौन-सा ऊष्मा-स्थानांतरण तरीका काम करता है', या किसी उपकरण को उसके द्वारा उपयोग किए जाने वाले तरीके से मिलाना।
मोटर कार में शीतलन प्रणाली (रेडिएटर) किस सिद्धांत पर काम करती है?
- (a) केवल संचालन
- (b) संवहन
- (c) केवल विकिरण
- (d) संचालन और विकिरण दोनों
उत्तर(b) संवहन
उल्टी दिशा में वही कौशल — वहाँ आप उस तरीके की पहचान करते हैं जिसका कोई उपकरण उपयोग करता है, यहाँ उन तरीकों की जिन्हें कोई उपकरण रोकता है; दोनों इस ज्ञान पर टिके हैं कि संचालन व संवहन को माध्यम चाहिए, विकिरण को नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
थर्मस फ्लास्क की दोहरी दीवारों के बीच का निर्वात मुख्यतः किसके द्वारा ऊष्मा-हानि रोकता है:
- (a)केवल विकिरण
- (b)संचालन और संवहन
- (c)विकिरण और संचालन
- (d)तीनों तरीके समान रूप से
उत्तर(b) संचालन और संवहन — दोनों को भौतिक माध्यम चाहिए, जिसे निर्वात हटा देता है। विकिरण को दीवारों पर सिल्वरिंग द्वारा अलग से रोका जाता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी तक मुख्यतः किसके द्वारा पहुँचती है:
- (a)संचालन
- (b)संवहन
- (c)विकिरण
- (d)संचालन और संवहन दोनों
उत्तर(c) विकिरण — सूर्य और पृथ्वी के बीच का स्थान लगभग निर्वात ही है, और विकिरण ही ऊष्मा-स्थानांतरण का एकमात्र तरीका है जिसे किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।