निम्नलिखित में से कौन-सी एक विशिष्टता 'इक्ता व्यवस्था' की नहीं है ?
- (a)इक्ता एक राजस्व एकत्रित करने की व्यवस्था थी
- (b)सियासतनामा इक्ता व्यवस्था की जानकारी का स्रोत था
- (c)इक्ता से एकत्रित राजस्व सीधा सुल्तान के खाते में जाती थी
- (d)मुक्ती को इक्ता से एकत्रित राजस्व से सैनिक रखने पड़ते थे
सही उत्तर — (c), 'इक़्ता से एकत्रित राजस्व सीधा सुल्तान के खाते में जाती थी'। यह ठीक वही है जिसे इक़्ता संस्था टालने के लिए बनाई गई थी। इस संस्था का पूरा उद्देश्य यह था कि नकदी की कमी वाला और साम्राज्य-व्यापी राजस्व-संग्रहण नौकरशाही से रहित सुल्तान किसी अधिकारी को कोषागार से वेतन देने के बजाय एक निश्चित क्षेत्र का राजस्व सौंप देता था। धारक — जिसे मुक़्ती या वली कहा जाता था — अपने इक़्ता का भू-राजस्व स्वयं एकत्रित करता था, अपना वेतन और अनिवार्य रूप से बनाए रखी जाने वाली घुड़सवार सेना की लागत स्वयं रख लेता था, और केवल शेष राशि केंद्र को भेजता था। उस शेष राशि का अपना अलग नाम था, फ़वाज़िल, और इस अतिरिक्त राशि के लिए एक अलग शब्द का अस्तित्व स्वयं इस बात का प्रमाण है कि सकल राजस्व कभी भी सीधे सुल्तान के कोष में नहीं जाता था। केवल खालिसा भूमि, जो सीधे राजमुकुट के अधीन आरक्षित थी, इस तरह केंद्रीय कोष के लिए एकत्रित की जाती थी। बाद के सुल्तानों ने लेखांकन को और कड़ा किया: दीवान-ए-विज़ारत के अधिकारी अनुमान लगाते थे कि किसी इक़्ता से कितनी उपज होनी चाहिए और धारक के आँकड़ों की लेखा-परीक्षा करते थे ताकि फ़वाज़िल वास्तव में भेजा जाए — पर तब भी वह धन पहले मुक़्ती के हाथों से होकर गुज़रता था। इसलिए (c) व्यवस्था के वास्तविक कार्य-संचालन के विपरीत बताता है और यही वह अपवाद है जो प्रश्न पूछता है।
- (a)इक्ता एक राजस्व एकत्रित करने की व्यवस्था थी — यह एक सही विशेषता है। इक़्ता किसी क्षेत्र के भू-राजस्व का आबंटन था, नकद वेतन के बदले, और उस राजस्व को एकत्रित करना आबंटी का केंद्रीय कर्तव्य था — इसलिए यह सल्तनत की भू-राजस्व वसूलने और वितरित करने की मुख्य व्यवस्था के रूप में कार्य करता था।
- (b)सियासतनामा इक्ता व्यवस्था की जानकारी का स्रोत था — यह सही है। ग्यारहवीं शताब्दी में सेल्जुक़ वज़ीर निज़ाम-उल-मुल्क तूसी द्वारा लिखित राज्य-शासन की नियमावली, सियासतनामा (सियर-उल-मुलूक), इक़्ता का सिद्धांत प्रस्तुत करती है — आबंटी के कर्तव्य, किसानों की सुरक्षा और राज्य का अंतिम स्वामित्व — और यह उस संस्था के पुनर्निर्माण के लिए इतिहासकारों द्वारा प्रयुक्त एक मानक स्रोत बना हुआ है जिसे तुर्क भारत में लाए थे।
- (d)मुक्ती को इक्ता से एकत्रित राजस्व से सैनिक रखने पड़ते थे — यह सही है और पूरी व्यवस्था का सैन्य तर्क है। मुक़्ती अपने इक़्ता के राजस्व से भुगतान किए जाने वाले घुड़सवारों के एक निश्चित दल को बनाए रखने और प्रस्तुत करने के लिए बाध्य था; इक़्ता प्रभावी रूप से बिना नकद वेतन-सूची के सेना बनाए रखने की एक युक्ति थी।
इक़्ता यूरोपीय-शैली का जागीर (fief) नहीं था और न ही निजी संपत्ति। यह राजस्व का एक हस्तांतरणीय, सिद्धांततः गैर-वंशानुगत आबंटन था: राज्य स्वामित्व बनाए रखता था, मुक़्ती को तब तक एकत्रित करने का अधिकार था जब तक सुल्तान चाहे, और उसे एक इक़्ता से दूसरे इक़्ता में स्थानांतरित किया जा सकता था — बलबन और अलाउद्दीन खिलजी ने आबंटियों को जड़ें जमाने से रोकने के लिए ठीक इसी शक्ति का प्रयोग किया। बदले में धारक अपने क्षेत्र में प्रशासनिक और सैन्य कर्तव्य निभाता था और फ़वाज़िल भेजता था। यह संस्था तुर्कों के साथ भारत आई — इल्तुतमिश को इसे व्यवस्थित रूप से संगठित करने का श्रेय दिया जाता है — और इसका बाद का इतिहास केंद्रीय नियंत्रण और स्थानीय जड़-जमाव के बीच एक निरंतर संघर्ष है: अलाउद्दीन खिलजी ने कई आबंटन वापस लिए और खालिसा का विस्तार किया, जबकि फ़िरोज़ शाह तुगलक़ इसके विपरीत दिशा में गया और इक़्तों को प्रभावी रूप से वंशानुगत बनने दिया।
एक 'नहीं' प्रश्न के लिए, हर विकल्प को 'अजीब लगने वाले' विकल्प की तलाश करने के बजाय परिभाषा के विरुद्ध जाँचें। विकल्प (a), (b) और (d) वे तीन बातें हैं जो हर पाठ्यपुस्तक इक़्ता के बारे में कहती है — यह क्या था, हम इसके बारे में कहाँ से जानते हैं, और धारक को धन के साथ क्या करना पड़ता था। विकल्प (c) सीधे (d) का खंडन करता है: यदि राजस्व सीधे सुल्तान के खाते में जाता, तो मुक़्ती के पास अपने सैनिकों को भुगतान करने के लिए कुछ नहीं बचता। दो विकल्पों के बीच इस आंतरिक विरोधाभास को पहचानना उत्तर तक पहुँचने का सबसे तेज़ रास्ता है, और फ़वाज़िल शब्द — मुक़्ती के अपने दावे पूरे होने के बाद भेजी गई अतिरिक्त राशि — वह एक शब्द है जो इसे तय कर देता है।
- इक़्ता: नकद वेतन के स्थान पर किसी क्षेत्र के भू-राजस्व का किसी अधिकारी को आबंटन; धारक मुक़्ती या वली कहलाता था।
- मुक़्ती संग्रह में से अपना वेतन और अपने सैन्य दल की लागत रख लेता था और केवल अतिरिक्त राशि, जिसे फ़वाज़िल कहा जाता था, केंद्र को भेजता था।
- खालिसा वे भूमि थीं जो सीधे राजमुकुट के अधीन रखी जाती थीं, जिनका राजस्व वास्तव में केंद्रीय कोष में जाता था।
- इक़्ता पश्चिम एशियाई संस्था थी जिसे तुर्क भारत लाए; दिल्ली सल्तनत में इसे संगठित करने का श्रेय इल्तुतमिश को दिया जाता है।
- सेल्जुक़ वज़ीर निज़ाम-उल-मुल्क तूसी की सियासतनामा (सियर-उल-मुलूक) इक़्ता के सिद्धांत का शास्त्रीय स्रोत है।
- अलाउद्दीन खिलजी ने केंद्रीय नियंत्रण कड़ा किया और खालिसा का विस्तार किया; फ़िरोज़ शाह तुगलक़ के अधीन इक़्ते वंशानुगत बनने लगे।

- इक़्ता को भूमि-स्वामित्व या यूरोपीय जागीर के समान मान लेना। यह राजस्व का आबंटन था, सुल्तान की इच्छा से हस्तांतरणीय, भूमि का अनुदान नहीं।
- फ़वाज़िल को भूल जाना। जो अभ्यर्थी केवल यह याद रखते हैं कि 'मुक़्ती सुल्तान को राजस्व भेजता था' वे विकल्प (c) को सही मान लेंगे; उसने जो भेजा वह अपने वेतन और सैन्य लागत के बाद बचा अतिरिक्त था।
- इक़्ता को खालिसा से भ्रमित करना। खालिसा का राजस्व वास्तव में सीधे केंद्रीय कोष में जाता था — यही ठीक कारण है कि इक़्ता एक भिन्न चीज़ थी।
UPPSC सल्तनत प्रशासन की परीक्षा 'नहीं' प्रश्नों और तकनीकी शब्दों पर 'सही सुमेलित' युग्मों के माध्यम से लेता है; UPSC इसी क्षेत्र को इक़्ता के उद्गम और फ़वाज़िल व आमिल जैसे शब्दों के अर्थ पर कथन-सेटों के माध्यम से पूछता है।
सल्तनत काल में फ़वाज़िल का अर्थ था
- (a) रईसों को दिया गया अतिरिक्त भुगतान
- (b) वेतन के बदले आबंटित राजस्व
- (c) इक़्तादारों द्वारा कोष को अदा की गई अतिरिक्त राशि
- (d) किसानों से वसूली गई अवैध उगाही
उत्तर(c) इक़्तादारों द्वारा कोष को अदा की गई अतिरिक्त राशि
इस प्रश्न को हल करने वाला ठीक वही तथ्य परखता है — इक़्ता धारक केवल अतिरिक्त राशि, फ़वाज़िल, भेजता था, न कि पूरा संग्रह, इसलिए राजस्व कभी 'सीधे' सुल्तान के पास नहीं जाता था।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दिल्ली सल्तनत के राजस्व प्रशासन में, राजस्व संग्रहण के प्रभारी को 'आमिल' कहा जाता था। 2. दिल्ली के सुल्तानों की इक़्ता व्यवस्था एक प्राचीन स्वदेशी संस्था थी। 3. 'मीर बख़्शी' का पद दिल्ली के खिलजी सुल्तानों के शासनकाल में अस्तित्व में आया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 1 और 2
- (c) केवल 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर(a) केवल 1
उसी वर्ष UPSC स्तर पर उसी संस्था पर पूछा गया — उसका उद्गम और उसके आसपास के राजस्व अधिकारी — और इसके साथ अभ्यास करने योग्य।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
दिल्ली सल्तनत के प्रशासन में, 'फ़वाज़िल' शब्द का अर्थ था
- (a)सीधे सुल्तान के नियंत्रण में रखी गई भूमि
- (b)इक़्ता धारक द्वारा केंद्रीय कोष को भेजी गई अतिरिक्त राजस्व राशि
- (c)ग़ैर-मुस्लिमों पर लगाया गया कर
- (d)सैनिकों को नकद में दिया जाने वाला वेतन
उत्तर(b) इक़्ता धारक द्वारा केंद्रीय कोष को भेजी गई अतिरिक्त राजस्व राशि, अपना वेतन और अपने दल की लागत पूरी करने के बाद; राजमुकुट की भूमि खालिसा थी और ग़ैर-मुस्लिमों पर कर जज़िया था।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
दिल्ली के किस सुल्तान को भारत में इक़्ता व्यवस्था को व्यवस्थित रूप से संगठित करने का श्रेय सामान्यतः दिया जाता है ?
- (a)क़ुतुबुद्दीन ऐबक
- (b)इल्तुतमिश
- (c)अलाउद्दीन खिलजी
- (d)फ़िरोज़ शाह तुगलक़
उत्तर(b) इल्तुतमिश — उसने अपने तुर्क कमांडरों को इक़्तों के आबंटन को संगठित किया; अलाउद्दीन खिलजी ने बाद में केंद्रीय नियंत्रण मज़बूत करने हेतु कई आबंटन वापस लिए, और फ़िरोज़ शाह तुगलक़ ने उन्हें प्रभावी रूप से वंशानुगत बनने दिया।