संगीत की टप्पा शैली निम्नलिखित में से किस मुगल सम्राट के दरबार में परिष्कृत एवं विकसित हुईं ?
- (a)जहांगीर
- (b)अकबर
- (c)शाहजहां
- (d)मुहम्मद शाह
सही उत्तर — (d) मुहम्मद शाह। टप्पा हिन्दुस्तानी गायन की एक अर्ध-शास्त्रीय (semi-classical) शैली है, जिसकी उत्पत्ति पंजाब के ऊँट-चालकों के लोकगीतों से हुई और जिसे मुगल सम्राट मुहम्मद शाह 'रंगीला' (शासनकाल 1719-1748) के दरबार में परिष्कृत कर दरबारी संगीत का रूप दिया गया, जिनका दरबार हिन्दुस्तानी संगीत का एक महान केंद्र था। बाद में इसे अवध के नवाब के अधीन मियां ग़ुलाम नबी शोरी ('शोरी मियां') ने आगे बढ़ाया और लोकप्रिय बनाया। टप्पा अपनी तेज़, सूक्ष्म, 'गुत्थीदार' अलंकरण (तीव्र तानों/ज़मज़मा) के लिए जाना जाता है।
- (a)जहांगीर — जहांगीर का दरबार मुगल लघुचित्र (miniature) चित्रकला की पराकाष्ठा के लिए प्रसिद्ध है, न कि टप्पा संगीत के परिष्करण के लिए।
- (b)अकबर — अकबर का दरबार तानसेन और ध्रुपद परंपरा के लिए प्रसिद्ध है; टप्पा एक बाद का विकास है जो मुहम्मद शाह के युग से संबद्ध है, अकबर के युग से नहीं।
- (c)शाहजहां — शाहजहां मुख्यतः स्थापत्य कला के संरक्षक (ताजमहल) के रूप में याद किए जाते हैं; टप्पा शैली का उनके दरबार से कोई संबंध नहीं है।
टप्पा, हिन्दुस्तानी (उत्तर भारतीय) गायन की अर्ध-शास्त्रीय विधाओं में से एक है, ठुमरी और दादरा के साथ। यह अपनी तीव्र, गुंथी हुई मेलोडिक तानों के लिए विशिष्ट है। इसकी जड़ें उत्तर-पश्चिम के ऊँट-चालकों के लोकगीतों में हैं, और इसे 18वीं शताब्दी में 'शास्त्रीकृत' किया गया — इसने पहला रूप मुहम्मद शाह के दरबार में लिया और बाद में इसे ग़ुलाम नबी शोरी ने परिष्कृत किया।
सम्राट-मिलान वाले कला-एवं-संस्कृति प्रश्न प्रत्येक मुगल दरबार की प्रसिद्धि के मानसिक मानचित्र का लाभ उठाते हैं: अकबर - ध्रुपद/तानसेन, जहांगीर - चित्रकला, शाहजहां - स्थापत्य, मुहम्मद शाह 'रंगीला' - हिन्दुस्तानी गायन-संगीत का परिष्करण (सदारंग/अदारंग के माध्यम से ख़याल, और टप्पा)। संगीत-परिष्करण को मुहम्मद शाह के अधीन रखने से ही उत्तर मिलता है।
- टप्पा = तीव्र, अलंकृत मेलोडिक तानों वाली हिन्दुस्तानी गायन की एक अर्ध-शास्त्रीय विधा।
- उत्पत्ति: पंजाब के ऊँट-चालकों के लोकगीतों से, बाद में दरबारी संगीत में परिष्कृत।
- मुगल सम्राट मुहम्मद शाह 'रंगीला' (शासनकाल 1719-1748) के दरबार में परिष्कृत हुआ।
- बाद में अवध के नवाब के अधीन मियां ग़ुलाम नबी शोरी ने इसे विकसित व लोकप्रिय किया।

- किसी भी मुगल-संगीत प्रश्न में स्वतः अकबर चुन लेना (अकबर = ध्रुपद/तानसेन, टप्पा नहीं)।
- टप्पा (तीव्र, गुत्थीदार) को ठुमरी (रोमांटिक, गीतात्मक) और ख़याल (कल्पनाशील विस्तार) से भ्रमित कर लेना।
UPSC/UPPSC 'किस दरबार/संरक्षक' किसी संगीत या कला-विधा के लिए पूछते हैं, या 'विधा को उसके प्रतिपादक से मिलाएँ' — टप्पा को मुहम्मद शाह और ग़ुलाम नबी शोरी से जोड़ें।
सूची I (संगीतकार) को सूची II (योगदान) से मिलाइए और नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए: I. पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर II. वेंकटमखिन III. श्यामा शास्त्री IV. अमीर खुसरो — A. भारतीय संगीत के राग-वर्गीकरण की योजना प्रस्तुत की B. कर्नाटक संगीत के प्रवर्तक C. हिन्दुस्तानी संगीत की ख़याल विधा के प्रवर्तक D. 'वंदे मातरम्' गीत का संगीत रचा
- (a) I-D, II-A, III-C, IV-B
- (b) I-D, II-A, III-B, IV-C
- (c) I-A, II-D, III-C, IV-B
- (d) I-A, II-D, III-B, IV-C
उत्तर(b) I-D, II-A, III-B, IV-C
वही अवधारणा — भारतीय शास्त्रीय/गायन संगीत की विधाएँ और उन्हें आकार देने वाले व्यक्तित्व (ख़याल, राग-वर्गीकरण, कर्नाटक संगीत), वह हिन्दुस्तानी विधाओं का परिवार जिससे टप्पा संबंधित है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
टप्पा, भारतीय अर्ध-शास्त्रीय गायन की एक विधा, की उत्पत्ति माना जाता है:
- (a)बंगाल के मल्लाहों (नाविकों) के लोकगीतों से
- (b)पंजाब के ऊँट-चालकों के लोकगीतों से
- (c)दक्कन के चरवाहों के लोकगीतों से
- (d)केरल के मछुआरों के लोकगीतों से
उत्तर(b) पंजाब के ऊँट-चालकों के लोकगीतों से — बाद में दरबारी संगीत में परिष्कृत।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मुहम्मद शाह 'रंगीला' के दरबार में हिन्दुस्तानी संगीत की ख़याल विधा को किस युगल संगीतकारों ने विशेष रूप से लोकप्रिय बनाया?
- (a)तानसेन और बैजू बावरा
- (b)सदारंग और अदारंग
- (c)अमीर खुसरो और गोपाल नायक
- (d)स्वामी हरिदास और तानसेन
उत्तर(b) सदारंग (नियामत ख़ान) और अदारंग — मुहम्मद शाह के दरबारी संगीतकार।