निम्नलिखित में से कौन फिरोज़ तुगलक के नागरकोट अभियान के दौरान संग्रहित 300 संस्कृत पुस्तकों का अनुवाद किया ?
- (a)अज़ीजुद्दीन खान
- (b)मुल्ला अब्दुल बाकी
- (c)मिर्ज़ा मुहम्मद अली
- (d)तालिब अमूली
सही उत्तर — (a) अज़ीजुद्दीन खान। फ़िरोज़ शाह तुगलक के नागरकोट (कांगड़ा) अभियान के बाद, उसने ज्वालामुखी मंदिर के पुस्तकालय से संस्कृत पांडुलिपियों का एक विशाल संग्रह अपने अधिकार में ले लिया। उसने इनमें से कुछ रचनाओं (ज्योतिष, फलित ज्योतिष तथा भविष्यकथन जैसे विषयों पर) का फ़ारसी में अनुवाद करवाया; यह अनुवाद अज़ीजुद्दीन खान द्वारा किया गया और परिणामी फ़ारसी रचना का शीर्षक 'दलाइल-ए-फ़िरोज़शाही' रखा गया। फ़िरोज़ शाह को संस्कृत-से-फ़ारसी अनुवाद को संरक्षण देने वाला पहला दिल्ली सुल्तान माना जाता है।
- (b)मुल्ला अब्दुल बाकी — बाद के मुग़ल साहित्यिक परिवेश से जुड़े हैं, फ़िरोज़ शाह तुगलक के 14वीं शताब्दी के नागरकोट अनुवाद से नहीं।
- (c)मिर्ज़ा मुहम्मद अली — फ़िरोज़ शाह तुगलक के अधीन नागरकोट की पांडुलिपियों के अनुवाद का श्रेय पाने वाले विद्वान नहीं हैं।
- (d)तालिब अमूली — मुग़ल युग के एक फ़ारसी कवि (जहाँगीर के अधीन कवि-सम्राट), जो फ़िरोज़ तुगलक से दो शताब्दियों से अधिक के अंतराल से पृथक हैं — इस अनुवाद से असंबद्ध।
फ़िरोज़ शाह तुगलक (शासनकाल 1351-1388) भारतीय ग्रंथों के फ़ारसी में अनुवाद को संरक्षण देने के लिए उल्लेखनीय है। नागरकोट (कांगड़ा) के मंदिर-पुस्तकालय से, जो उसके वहाँ के अभियान के दौरान अधिकृत किया गया था, उसने संस्कृत पांडुलिपियों का एक ढेर प्राप्त किया, जिनका एक भाग अज़ीजुद्दीन खान द्वारा 'दलाइल-ए-फ़िरोज़शाही' के रूप में फ़ारसी में अनूदित किया गया।
उत्तर अनुवादक के नाम को फ़िरोज़ तुगलक के नागरकोट प्रकरण से जोड़ने पर निर्भर करता है। विकर्षक बाद के मुग़ल काल की हस्तियाँ हैं, इसलिए जाल यह है कि सही राजवंश और सदी से जोड़े बिना किसी परिचित 'दरबारी विद्वान/कवि' नाम को चुन लिया जाए। (स्रोत इस बात में भिन्न हैं कि संग्रह लगभग 300 या 1,300 खंडों का था; अनुवादक और शीर्षक स्थिर बिंदु हैं।)
- फ़िरोज़ शाह तुगलक ने नागरकोट (कांगड़ा) पर अधिकार किया और ज्वालामुखी मंदिर-पुस्तकालय से संस्कृत पांडुलिपियाँ ज़ब्त कीं।
- अज़ीजुद्दीन खान ने इनमें से कुछ रचनाओं का फ़ारसी में अनुवाद किया।
- परिणामी फ़ारसी रचना का शीर्षक 'दलाइल-ए-फ़िरोज़शाही' रखा गया।
- फ़िरोज़ शाह संस्कृत-से-फ़ारसी अनुवाद को संरक्षण देने वाला पहला दिल्ली सुल्तान था।

- तुगलक-कालीन अनुवादक के बजाय किसी प्रसिद्ध मुग़ल-कालीन विद्वान/कवि को चुनना
- खंडों की संख्या (300 बनाम 1,300) पर अटक जाना — स्रोत भिन्न हैं; अनुवादक/शीर्षक ही महत्वपूर्ण है
UPSC और UPPSC दोनों 'किसने किस शासक के अधीन कौन-सा ग्रंथ अनूदित किया' पूछते हैं — शृंखला फ़िरोज़ तुगलक / नागरकोट / अज़ीजुद्दीन खान / दलाइल-ए-फ़िरोज़शाही को याद रखें।
"योगवासिष्ठ" का फ़ारसी में अनुवाद निज़ामुद्दीन पानीपती द्वारा किस शासक के काल में किया गया था ?
- (a) अकबर
- (b) हुमायूँ
- (c) शाहजहाँ
- (d) औरंगज़ेब
उत्तर(a) अकबर — संस्कृत 'योगवासिष्ठ' का फ़ारसी में अनुवाद निज़ामुद्दीन पानीपती द्वारा 'जुग-बशिष्ठ' के नाम से किया गया।
वही अवधारणा — भारतीय ग्रंथों का संस्कृत-से-फ़ारसी अनुवाद तथा उसका अनुवादक/संरक्षक, यहाँ मुग़ल संदर्भ में।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
फ़िरोज़ शाह तुगलक द्वारा नागरकोट में एकत्रित संस्कृत रचनाओं का फ़ारसी में अनुवाद किस शीर्षक से किया गया ?
- (a)रज़्मनामा
- (b)दलाइल-ए-फ़िरोज़शाही
- (c)तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही
- (d)फ़ुतूहात-ए-फ़िरोज़शाही
उत्तर(b) दलाइल-ए-फ़िरोज़शाही — नागरकोट पांडुलिपियों का फ़ारसी अनुवाद।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
फ़िरोज़ शाह तुगलक अनुवाद के इतिहास में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह था:
- (a)संस्कृत-से-फ़ारसी अनुवाद को संरक्षण देने वाला पहला दिल्ली सुल्तान
- (b)फ़ारसी में महाभारत का अनुवादक
- (c)अकबर के अनुवाद विभाग का संस्थापक
- (d)आइन-ए-अकबरी का लेखक
उत्तर(a) संस्कृत-से-फ़ारसी अनुवाद को संरक्षण देने वाला पहला दिल्ली सुल्तान।