निम्नलिखित में से कौन-सा वृक्ष पर्यावरण के लिये खतरा है ?
- (a)यूकेलिप्टिस
- (b)केला
- (c)नीम
- (d)बबूल
सही उत्तर — (a) यूकेलिप्टिस। यूकेलिप्टिस के विरुद्ध मामला चार सुविख्यात गुणों पर टिका है। पहला, यह बहुत अधिक वाष्पोत्सर्जन करता है और मिट्टी से भारी मात्रा में जल खींचता है — इतना विश्वसनीय रूप से कि इसे जल-स्तर घटाने व मिट्टी की लवणता कम करने के लिए जान-बूझकर लगाया गया है, एक ऐसा हस्तक्षेप जो पारिस्थितिकीय रूप से उत्पादक आर्द्रभूमि को नष्ट कर सकता है। दूसरा, यह ऐलेलोपैथिक है: यह ऐसे यौगिक छोड़ता है जो अन्य पादप-प्रजातियों को अपने निकट उगने से रोकते हैं, इसीलिए यूकेलिप्टिस के झुरमुट के नीचे की ज़मीन विशिष्ट रूप से खाली रहती है। तीसरा, यूकेलिप्टिस का तेल अत्यधिक ज्वलनशील है, और पर्याप्त ऊँचे तापमान पर यह तेल फैलता है और जंगल की आग के फैलाव को तेज़ कर देता है; कैलिफ़ोर्निया की 1991 की ओकलैण्ड हिल्स की अग्नि-आपदा इसका मानक उदाहरण है। चौथा, अपने मूल ऑस्ट्रेलिया के बाहर यह वृक्ष स्थानीय पौधों से प्रतिस्पर्धा करता है और सामान्यतः स्थानीय जीवों को सहारा नहीं देता, इसलिए एक यूकेलिप्टिस बागान वृक्ष-आवरण तो जोड़ता है परन्तु आवास नहीं जोड़ता। भारत में बड़े पैमाने पर यूकेलिप्टिस-रोपण के आलोचकों ने सामाजिक-वानिकी एकल-कृषि (monoculture) के विरुद्ध यही तर्क दिये हैं — गिरता जल-स्तर व खाद्य-फसलों का विस्थापन — और यही तर्क इस प्रश्न का आधार है।
- (b)केला — एक कृषित खाद्य-फसल जिसके विरुद्ध ऐसा कोई तुलनीय आरोप नहीं है, और सख़्ती से यह कोई वृक्ष है ही नहीं: केला एक विशाल शाकीय पौधा है जिसका दिखने वाला तना कसकर लिपटे पत्ती-आधारों का एक छद्म-तना (pseudostem) है। यह एक जल-प्यासी फ़सल है, परन्तु इसे वानिकी के रूप में बड़े पैमाने पर लगाने के बजाय खेत में फ़सल के रूप में उगाया जाता है, और इसमें ऐसा कुछ नहीं है जो जल-स्तर घटाए या पड़ोसी वनस्पति को उस तरह दबाए जैसे यूकेलिप्टिस करता है।
- (c)नीम — उत्तर के लगभग विपरीत। नीम, Azadirachta indica, भारतीय मैदानों का प्रचलित सूखा-सहिष्णु स्वदेशी वृक्ष है, जो छाया, इसकी लकड़ी, तथा सबसे अधिक इसके बीज व पत्ती में मौजूद जैव-कीटनाशक यौगिकों के लिए महत्वपूर्ण है। इसे ठीक इसलिए लगाया जाता है क्योंकि यह ख़राब मिट्टियों व कम जल में फलता-फूलता है और अपने आसपास की हर चीज़ के साथ सह-अस्तित्व में रहता है।
- (d)बबूल — बबूल, Acacia nilotica, एक काँटेदार लेगुमिनस वृक्ष है जो लम्बे समय से भारत के शुष्क क्षेत्रों में प्राकृतिक हो चुका है और अवक्रमित व लवणीय भूमि के वनीकरण के साथ-साथ गोंद, चारे व ईंधन-लकड़ी के लिए प्रयोग होता है। यह नाम एक वास्तविक भ्रम का स्रोत है जिसे स्पष्ट करना उचित है: 'विलायती बबूल', Prosopis juliflora, एक अलग व बाहर से लाई गई प्रजाति है जिसकी घने झुरमुट बनाने व स्थानीय जैव-विविधता घटाने के लिए व्यापक रूप से आलोचना होती है। देशी बबूल वह वृक्ष नहीं है, और यह प्रश्न इसकी ओर इशारा नहीं कर रहा है।
यूकेलिप्टिस ऑस्ट्रेलिया की मूल कई सैकड़ों प्रजातियों का एक वंश है, जिसे भारत व उष्णकटिबन्धीय विश्व के अधिकांश भाग में बागान-वानिकी के लिए लाया गया क्योंकि यह तेज़ी से व सीधा बढ़ता है और कुछ ही वर्षों में लुगदी-लकड़ी व खम्भे देता है। यही गुण पारिस्थितिकीय लागतें भी साथ लाते हैं, और इन्हें एक नारे के बजाय क्रियाविधि (mechanism) के रूप में सीखना उचित है: भारी वाष्पोत्सर्जन जो स्थानीय जल-स्तर को घटाता है; ऐलेलोपैथी जो नीचे की वनस्पति-परत को दबाती है; वाष्पशील, ज्वलनशील तेल जो अग्नि-जोखिम बढ़ाता है; तथा एकल-कृषि खण्ड जो आँकड़ों में वृक्ष-आवरण के रूप में गिने जाते हैं जबकि स्थानीय कीटों, पक्षियों व स्तनधारियों को लगभग कुछ नहीं देते। यह बाहरी बागान-प्रजातियों की सामान्य समस्या है — Prosopis juliflora व Lantana camara भारतीय पर्यावरणीय लेखन में बार-बार आने वाले अन्य नाम हैं — और यही कारण है कि वन-नीति वृक्ष-आवरण बढ़ाने व वन-पारितन्त्र को पुनर्स्थापित करने के बीच अन्तर करती है।
'पर्यावरण के लिये खतरा' को यह पूछते हुए पढ़ें कि कौन-सी प्रजाति अपने ही दायरे से परे नुकसान करती है। तीन विकल्प यह परीक्षा तुरन्त असफल कर देते हैं: केला एक खाद्य-फ़सल है, और नीम व बबूल लम्बे समय से भारतीय परिस्थितियों में स्थापित सुदृढ़ वृक्ष हैं जिन्हें अवक्रमित भूमि को बिगाड़ने के बजाय सुधारने के लिए लगाया जाता है। केवल यूकेलिप्टिस के विरुद्ध एक स्थायी, प्रलेखित पर्यावरणीय मामला है। जो व्यापक आदत बनानी चाहिए वह है दो प्रश्नों को अलग रखना — क्या कोई प्रजाति उपयोगी है, और क्या वह पारिस्थितिकीय रूप से सुरक्षित है। यूकेलिप्टिस व्यावसायिक रूप से अत्यन्त उपयोगी है, और ठीक इसीलिए इसे इतने व्यापक रूप से लगाया गया; उपयोगिता यहाँ मुद्दा नहीं है। और वन-आँकड़ों के अंकगणित से भ्रमित न हों: एक बागान एकल-कृषि दर्ज वृक्ष-आवरण बढ़ाती है जबकि उस प्राकृतिक वन की जैव-विविधता का एक अंश ही सहारा देती है जिसे उसने प्रतिस्थापित किया।
- यूकेलिप्टिस वाष्पोत्सर्जन द्वारा मिट्टी से भारी मात्रा में जल खींचता है, और इसे जान-बूझकर जल-स्तर घटाने व मिट्टी की लवणता कम करने के लिए लगाया गया है — एक ऐसा प्रभाव जो पारिस्थितिकीय रूप से उत्पादक क्षेत्रों को नष्ट कर सकता है
- यह ऐलेलोपैथिक है: यह ऐसे यौगिक छोड़ता है जो निकट अन्य पादप-प्रजातियों के उगने को रोकते हैं
- यूकेलिप्टिस का तेल अत्यधिक ज्वलनशील है और उच्च तापमान पर फैलकर जंगल की आग के फैलाव को तेज़ करता है; 1991 की ओकलैण्ड हिल्स अग्नि-आपदा इसका मानक उदाहरण है
- अपने मूल ऑस्ट्रेलिया के बाहर, यूकेलिप्टिस स्थानीय पौधों से प्रतिस्पर्धा करता है और सामान्यतः स्थानीय जीवों को सहारा नहीं देता
- नीम एक स्वदेशी सूखा-सहिष्णु वृक्ष है जो छाया व जैव-कीटनाशक के लिए महत्वपूर्ण है; बबूल (Acacia nilotica) अवक्रमित व लवणीय भूमि के वनीकरण में प्रयोग होता है; केला एक खाद्य-फ़सल है और वानस्पतिक रूप से वृक्ष नहीं, एक विशाल शाकीय पौधा है
- देशी बबूल (Acacia nilotica) को विलायती बबूल (Prosopis juliflora) से भ्रमित न करें, जो बाहर से लाई गई प्रजाति है जिसकी स्थानीय जैव-विविधता घटाने के लिए आलोचना होती है

- देशी बबूल (Acacia nilotica) को विलायती बबूल (Prosopis juliflora) से भ्रमित करना — यह दूसरी, बाहर से लाई गई प्रजाति ही है जिसकी जैव-विविधता घटाने के लिए आलोचना होती है
- केले को वृक्ष मान लेना; यह एक विशाल शाकीय पौधा है जिसका छद्म-तना है, और यह वानिकी-प्रजाति के बजाय फ़सल है
- बढ़ते वृक्ष-आवरण आँकड़ों को पारिस्थितिकीय लाभ मान लेना जबकि वह वृद्धि बागान एकल-कृषि की है
UPPSC इसे सीधे पूछता है, जैसा यहाँ हुआ — कौन-सा वृक्ष खतरनाक है, कौन-सी प्रजाति हानिकारक है — और एक नाम की अपेक्षा करता है। UPSC इसी विचार को क्रियाविधि के माध्यम से पूछता है — कोई नामित प्रजाति समाचार में क्यों है, जिसमें सही विकल्प यह वर्णित करता है कि वह पारितन्त्र के साथ वास्तव में क्या करती है। समस्याग्रस्त प्रजातियों की एक छोटी सूची, प्रत्येक के लिए एक वाक्य की क्रियाविधि सहित, तैयार करें, और दोनों प्रारूप कवर हो जाते हैं।
Prosopis juliflora नामक पौधे का समाचारों में अक्सर उल्लेख क्यों होता है ?
- (a) इसका सत्त्व प्रसाधन-सामग्री में व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है।
- (b) यह उस क्षेत्र की जैव-विविधता को घटाने की प्रवृत्ति रखता है जहाँ यह उगता है।
- (c) इसका सत्त्व कीटनाशकों के संश्लेषण में प्रयुक्त होता है।
- (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर(b) यह उस क्षेत्र की जैव-विविधता को घटाने की प्रवृत्ति रखता है जहाँ यह उगता है।
वही विचार एक अलग प्रजाति व बेहतर ढंग से गढ़े गये प्रश्न-वाक्य के साथ। UPPSC पूछता है कि कौन-सा वृक्ष खतरनाक है और एक नाम चाहता है; UPSC पूछता है कि कोई विशेष बाहर से लाई गई प्रजाति समाचार में क्यों है और क्रियाविधि चाहता है — कि यह अपने फैलाव के क्षेत्र में जैव-विविधता घटाती है। Prosopis juliflora वही 'विलायती बबूल' भी है जिसे अभ्यर्थी यहाँ विकल्प (d) में छपे देशी बबूल से भ्रमित करते हैं, जो इन दोनों को साथ हल करना दोगुना सार्थक बनाता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
बड़े पैमाने पर यूकेलिप्टिस-रोपण की पर्यावरणीय आधार पर आलोचना मुख्यतः इसलिए होती है क्योंकि यह वृक्ष
- (a)अत्यधिक नाइट्रोजन स्थिरीकृत करता है और मिट्टी को अन्य फ़सलों के लिए विषाक्त बना देता है
- (b)इतना अधिक वाष्पोत्सर्जन करता है कि स्थानीय जल-स्तर घट जाता है, और ऐसे यौगिक छोड़ता है जो निकट उगने वाले अन्य पौधों को दबाते हैं
- (c)भारी सिंचाई के बिना जीवित नहीं रह सकता और इसलिए अवक्रमित भूमि पर असफल हो जाता है
- (d)ऐसे कीट पालता है जो पड़ोसी खाद्य-फ़सलों पर आक्रमण करते हैं
उत्तर(b) इतना अधिक वाष्पोत्सर्जन करता है कि स्थानीय जल-स्तर घट जाता है, और ऐसे यौगिक छोड़ता है जो निकट उगने वाले अन्य पौधों को दबाते हैं — इसका ज्वलनशील तेल व ऑस्ट्रेलिया के बाहर आवास के रूप में इसका कम मूल्य इस मामले को पूरा करते हैं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सी भारत में लाई गई प्रजाति है जिसकी घने झुरमुट बनाने व स्थानीय जैव-विविधता घटाने के लिए बार-बार आलोचना होती है ?
- (a)Azadirachta indica (नीम)
- (b)Prosopis juliflora (विलायती बबूल)
- (c)Acacia nilotica (देशी बबूल)
- (d)Ficus religiosa (पीपल)
उत्तर(b) Prosopis juliflora — बाहर से लाई गई और अब शुष्क क्षेत्रों व घासभूमियों में आक्रामक रूप से फैली हुई, जहाँ यह स्थानीय वनस्पति को दबा देती है; इसे स्वदेशी देशी बबूल, Acacia nilotica, से भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए।