'पावर्टी एण्ड अनब्रिटिश रूल इन इण्डिया' नामक पुस्तक किस वर्ष प्रकाशित हुई ?
- (a)1900 ई.
- (b)1901 ई.
- (c)1902 ई.
- (d)1903 ई.
सही उत्तर — (b) 1901। दादाभाई नौरोजी की प्रसिद्ध रचना 'पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' 1901 में (लंदन में) प्रकाशित हुई। इस पुस्तक ने उनके पूर्व लेखों और भाषणों को एकत्रित कर 'धन-निष्कासन' (Drain of Wealth) सिद्धांत का व्यवस्थित प्रस्तुतीकरण किया — यह तर्क कि ब्रिटिश शासन लगातार भारत के धन को इंग्लैंड की ओर बहा रहा है, जिससे औपनिवेशिक शासन 'अन-ब्रिटिश' अर्थात् ब्रिटेन के अपने ही उदारवादी सिद्धांतों के विपरीत बन जाता है।
- (a)1900 ई. — निकट किन्तु गलत — यह पुस्तक 1900 में नहीं, 1901 में प्रकाशित हुई थी।
- (c)1902 ई. — गलत — प्रकाशन 1901 में हुआ; 1902 एक वर्ष बाद का है।
- (d)1903 ई. — गलत — यह रचना 1903 में नहीं, 1901 में प्रकाशित हुई।
दादाभाई नौरोजी (1825–1917), 'भारत के वयोवृद्ध पुरुष' (Grand Old Man of India) तथा ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में बैठने वाले प्रथम भारतीय, ने उपनिवेशवाद की आर्थिक आलोचना का सूत्रपात किया। 'पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' (1901) में उन्होंने धन-निष्कासन सिद्धांत विकसित किया तथा भारत की प्रति-व्यक्ति आय (1867-68 के लिए लगभग 20 रुपये) का एक आरंभिक व्यवस्थित अनुमान प्रस्तुत किया, जिससे यह दर्शाया गया कि संसाधन किस प्रकार भारत से ब्रिटेन की ओर स्थानांतरित हो रहे थे।
'प्रकाशन के वर्ष' वाले प्रश्न के लिए तर्क स्मरण-आधारित है; पुस्तक को उसके लेखक और विचार से जोड़ें — नौरोजी, निष्कासन सिद्धांत, 1901 — तथा 'अन-ब्रिटिश' वाक्यांश से, जो स्वयं पुस्तक का शीर्षक है। UPSC ने बार-बार नौरोजी को इस पुस्तक और इस वाक्यांश से जोड़ा है।
- 'पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' — दादाभाई नौरोजी द्वारा, 1901 में प्रकाशित।
- उपनिवेशवादी शोषण के 'धन-निष्कासन' सिद्धांत को प्रस्तुत करती है।
- इसमें भारत की प्रति-व्यक्ति आय का नौरोजी का अनुमान है (~20 रुपये, 1867-68)।
- नौरोजी — 'भारत के वयोवृद्ध पुरुष'; तीन बार INC अध्यक्ष; ब्रिटिश संसद में प्रथम भारतीय सांसद।

- पास के किसी वर्ष का अनुमान लगाना — पुस्तक 1901 की है (इसे 'अन-ब्रिटिश' वाक्यांश के साथ जोड़ें)।
- निष्कासन सिद्धांत अथवा इस पुस्तक का श्रेय नौरोजी के बजाय आर.सी. दत्त या रानाडे को दे देना।
UPSC/UPPSC पूछते हैं कि 'अन-ब्रिटिश' किसने लिखा/गढ़ा, भारत की प्रति-व्यक्ति आय का पहला अनुमान किसने लगाया, या प्रमुख राष्ट्रवादी आर्थिक ग्रंथों का वर्ष/लेखकत्व।
निम्नलिखित में से किसने भारत पर अंग्रेज़ी औपनिवेशिक नियंत्रण की आलोचना करने के लिए 'अन-ब्रिटिश' वाक्यांश का प्रयोग किया?
- (a) आनंदमोहन बोस
- (b) बदरुद्दीन तैयबजी
- (c) दादाभाई नौरोजी
- (d) फिरोज़शाह मेहता
उत्तर(c) दादाभाई नौरोजी
समान अवधारणा — 'अन-ब्रिटिश' वाक्यांश नौरोजी की 1901 की पुस्तक के शीर्षक से आता है, जो इस प्रश्न का विषय है।
1867-68 में भारत में प्रति-व्यक्ति आय 20 रुपये थी, यह पहली बार किसने पता लगाया
- (a) एम.जी. रानाडे
- (b) सर डब्ल्यू. हंटर
- (c) आर.सी. दत्त
- (d) दादाभाई नौरोजी
उत्तर(d) दादाभाई नौरोजी
समान अवधारणा — प्रति-व्यक्ति आय का अनुमान नौरोजी की 'पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' से लिया गया है, जो पुस्तक यहाँ नामित है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
उपनिवेशवादी शोषण का 'धन-निष्कासन' सिद्धांत सबसे निकटता से किसके साथ जुड़ा है?
- (a)बाल गंगाधर तिलक
- (b)दादाभाई नौरोजी
- (c)बिपिन चंद्र पाल
- (d)लाला लाजपत राय
उत्तर(b) दादाभाई नौरोजी — 'पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' (1901) में विस्तृत।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
औपनिवेशिक काल के दौरान भारत की प्रति-व्यक्ति (राष्ट्रीय) आय का एक आरंभिक व्यवस्थित अनुमान किसने लगाया?
- (a)आर.सी. दत्त
- (b)एम.जी. रानाडे
- (c)दादाभाई नौरोजी
- (d)विलियम डिग्बी
उत्तर(c) दादाभाई नौरोजी — लगभग 20 रुपये, वर्ष 1867-68 के लिए।