निम्न में से कौन एक 1924 के कानपुर षड़यंत्र मामले में शामिल नहीं था ?
- (a)मुजफ्फर अहमद
- (b)नलीनी गुप्ता
- (c)शौकत उसमानी
- (d)एम. ए. अंसारी
सही उत्तर — (d), एम. ए. अंसारी। 1924 का कानपुर (काउनपुर) बोल्शेविक षड़यंत्र मामला औपनिवेशिक सरकार द्वारा भारत के आरंभिक साम्यवादियों के विरुद्ध चलाया गया एक अभियोजन था, जिसमें उन पर 'सम्राट को ब्रिटिश भारत की संप्रभुता से वंचित करने का षड़यंत्र रचने' का आरोप लगाया गया था। प्रमुख अभियुक्त थे मुजफ्फर अहमद, शौकत उसमानी, एस.ए. डांगे और नलीनी गुप्ता (एम.एन. रॉय, जो उस समय विदेश में थे, को फरार घोषित किया गया)। डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी (एम. ए. अंसारी) एक राष्ट्रवादी चिकित्सक तथा कांग्रेस नेता थे — 1927 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष — और इस साम्यवादी षड़यंत्र मामले से उनका कोई संबंध नहीं था। अतः वे ही इससे असंबद्ध व्यक्ति हैं।
- (a)मुजफ्फर अहमद — गलत (वे इससे जुड़े थे) — मुजफ्फर अहमद, बंगाल में साम्यवादी आंदोलन के अग्रणी, इस मामले में दोषी ठहराए गए तथा सज़ा पाए अभियुक्तों में से एक थे, अतः वे 'असंबद्ध' उत्तर नहीं हो सकते।
- (b)नलीनी गुप्ता — गलत (वे इससे जुड़े थे) — नलीनी गुप्ता कानपुर बोल्शेविक षड़यंत्र मामले में मुकदमा चलाए गए तथा सज़ा पाए अभियुक्तों में शामिल थे, अतः वे अपवाद नहीं हैं।
- (c)शौकत उसमानी — गलत (वे इससे जुड़े थे) — शौकत उसमानी इसी मामले में दोषी ठहराए गए आरंभिक साम्यवादियों में से एक थे, अतः वे वास्तव में इससे जुड़े हुए हैं।
कानपुर बोल्शेविक षड़यंत्र मामला (1924) औपनिवेशिक राज्य द्वारा भारत में उभरते साम्यवादी आंदोलन को कुचलने के आरंभिक प्रयासों में से एक था। सरकार ने ब्रिटिश ताज की संप्रभुता के विरुद्ध षड़यंत्र रचने के आरोप में कुछ आरंभिक साम्यवादियों पर मुकदमा चलाया; चार अभियुक्तों को दोषी ठहराकर चार वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा दी गई। मुकदमे ने वास्तव में साम्यवादी विचारों का प्रचार किया, और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी औपचारिक रूप से 1925 में कानपुर में ही संगठित हुई। इसके बाद कहीं बड़ा मेरठ षड़यंत्र मामला 1929 में हुआ।
जाल यह है कि मुजफ्फर अहमद, नलीनी गुप्ता और शौकत उसमानी — तीनों ही इस मामले से जुड़े वास्तविक आरंभिक-साम्यवादी नाम हैं, इसलिए वे परस्पर विनिमेय प्रतीत होते हैं। आपको यह पहचानना होगा कि एम. ए. अंसारी मुख्यधारा की कांग्रेसी राष्ट्रवादी राजनीति से जुड़े थे (वे 1927 में INC अध्यक्ष रहे), न कि साम्यवादी षड़यंत्र मामलों से — जिससे वे स्पष्ट अपवाद बन जाते हैं।
- कानपुर (काउनपुर) बोल्शेविक षड़यंत्र मामला, 1924 — आरंभिक साम्यवादियों पर सम्राट की संप्रभुता के विरुद्ध षड़यंत्र रचने का आरोप।
- मुख्य अभियुक्त: मुजफ्फर अहमद, एस.ए. डांगे, शौकत उसमानी तथा नलीनी गुप्ता (एम.एन. रॉय को भी नामित किया गया परन्तु वे विदेश में थे)।
- चार अभियुक्तों को चार वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा दी गई।
- एम. ए. अंसारी (मुख्तार अहमद अंसारी) एक कांग्रेसी राष्ट्रवादी तथा 1927 में INC अध्यक्ष थे, इस मामले से असंबद्ध।

- साम्यवादी षड़यंत्र-मामले के व्यक्तित्वों को मुख्यधारा के कांग्रेस नेताओं के साथ गड्डमड्ड करना
- कानपुर बोल्शेविक षड़यंत्र मामला (1924) को बाद के मेरठ षड़यंत्र मामला (1929) के साथ भ्रमित करना
UPPSC और UPSC 'कौन X मामले या आंदोलन से जुड़ा था / नहीं जुड़ा था' पूछते हैं — आपको केवल नाम नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की राजनीतिक संबद्धता भी पता होनी चाहिए।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
कानपुर बोल्शेविक षड़यंत्र मामला (1924) मुख्यतः किस समूह के विरुद्ध निर्देशित था ?
- (a)आरंभिक साम्यवादी
- (b)उदारवादी कांग्रेस नेता
- (c)हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के क्रांतिकारी आतंकवादी
- (d)खिलाफत आंदोलन के नेता
उत्तर(a) आरंभिक साम्यवादी — अभियुक्तों पर ब्रिटिश ताज की संप्रभुता के विरुद्ध षड़यंत्र रचने का आरोप था।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
कानपुर मामले से बड़ा कौन-सा षड़यंत्र मामला 1929 में साम्यवादियों तथा ट्रेड-यूनियन नेताओं के विरुद्ध शुरू किया गया था ?
- (a)मेरठ षड़यंत्र मामला
- (b)लाहौर षड़यंत्र मामला
- (c)काकोरी षड़यंत्र मामला
- (d)अलीपुर बम कांड
उत्तर(a) मेरठ षड़यंत्र मामला — 1929 में साम्यवादियों व श्रमिक नेताओं पर चलाया गया मुकदमा।