निम्नलिखित में से कौन-सा एक वन्यप्राणियों के विलुप्तीकरण का प्रमुख कारण नहीं है ?
- (a)प्राकृतिक आवास का नष्ट होना
- (b)जंगलों में आग लगा देना
- (c)वन्यप्राणियों का अवैध वाणिज्यिक व्यापार
- (d)जनसंख्या की तीव्र वृद्धि
सही उत्तर (आधिकारिक कुंजी के अनुसार) — (d) 'जनसंख्या की तीव्र वृद्धि'। प्राकृतिक आवास का नष्ट होना (a), जंगलों में आग (b) तथा वन्यप्राणियों का अवैध वाणिज्यिक व्यापार (c) — ये सभी प्रत्यक्ष, निकटस्थ कारण हैं — ये उन पारिस्थितिक तंत्रों को नष्ट करते हैं जिन पर प्राणी निर्भर हैं, या स्वयं प्राणियों को मार देते हैं। तीव्र मानव जनसंख्या वृद्धि को यहाँ एक अंतर्निहित, अप्रत्यक्ष प्रेरक माना गया है: यह केवल इन्हीं प्रत्यक्ष कारणों (अधिक भूमि साफ करना, अधिक शिकार व व्यापार) के माध्यम से विलुप्तीकरण को बढ़ावा देती है, न कि स्वयं प्रत्यक्ष कारण के रूप में कार्य करती है, अतः प्रश्नपत्र इसे 'प्रमुख (प्रत्यक्ष) कारण नहीं' वाला विकल्प चिह्नित करता है। ईमानदार टिप्पणी: कुछ पारिस्थितिक ढांचे मानव जनसंख्या वृद्धि को जैवविविधता हानि के मूल प्रेरकों में भी गिनते हैं; यह प्रश्न निकटस्थ-कारण दृष्टिकोण अपनाता है, और उत्तर कुंजी का अनुसरण करता है।
- (a)प्राकृतिक आवास का नष्ट होना — यह एक प्रमुख कारण है, अतः यह उत्तर नहीं है — आवास विनाश व विखंडन विश्व भर में प्रजाति-विलुप्तीकरण का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष कारक है।
- (b)जंगलों में आग लगा देना — यह एक कारण है, अतः यह उत्तर नहीं है — वन-अग्नि आवास को नष्ट करती है व प्रत्यक्ष रूप से वन्यप्राणियों को मारती है, जिससे यह विलुप्तीकरण का एक वास्तविक कारण बनता है।
- (c)वन्यप्राणियों का अवैध वाणिज्यिक व्यापार — यह एक कारण है, अतः यह उत्तर नहीं है — अवैध शिकार व वन्यप्राणी व्यापार बाघ, गैंडा व पैंगोलिन जैसी प्रजातियों को प्रत्यक्ष रूप से क्षीण करता है।
प्रजाति-विलुप्तीकरण के निकटस्थ (प्रत्यक्ष) कारण भी होते हैं — आवास हानि व विखंडन, अति-दोहन व अवैध शिकार, आक्रामक प्रजातियाँ, प्रदूषण व अग्नि — तथा अंतिम (अप्रत्यक्ष) प्रेरक भी, जैसे मानव जनसंख्या वृद्धि व बढ़ती आर्थिक मांग जो इन्हीं प्रत्यक्ष कारणों के माध्यम से कार्य करते हैं। विलुप्तीकरण पर 'विषम-को-चुनें' प्रकार के प्रश्न सामान्यतः किसी प्रत्यक्ष कारण को किसी अप्रत्यक्ष प्रेरक से अलग करने की अपेक्षा रखते हैं।
यह प्रश्न अपवाद पूछता है। तीन विकल्प (आवास हानि, वन-अग्नि, अवैध व्यापार) प्रत्यक्ष कारण हैं; जनसंख्या वृद्धि अपवाद है क्योंकि यह अप्रत्यक्ष रूप से कार्य करती है। अतः तात्पर्यित उत्तर वह अप्रत्यक्ष प्रेरक है, जिसे 'प्रमुख कारण नहीं' चिह्नित किया गया है।
- आवास हानि व विखंडन वन्यप्राणी विलुप्तीकरण का प्रमुख प्रत्यक्ष कारण है
- अवैध वन्यप्राणी व्यापार/शिकार बाघ, गैंडा व पैंगोलिन जैसी प्रजातियों को प्रत्यक्ष रूप से संकटग्रस्त करता है
- वन-अग्नि आवास को नष्ट करती है तथा वन्यप्राणियों को प्रत्यक्ष रूप से मारती है
- मानव जनसंख्या वृद्धि को सामान्यतः एक अंतर्निहित/अप्रत्यक्ष प्रेरक माना जाता है, जो आवास-रूपांतरण व संसाधन-मांग के माध्यम से कार्य करती है
तीन विकल्प प्रत्यक्ष कारण हैं; तीव्र जनसंख्या वृद्धि एक अंतर्निहित प्रेरक है, अतः यह 'प्रमुख कारण नहीं' वाला उत्तर (d) है।
- प्रश्न को 'कौन-सा कारण है' के रूप में पढ़ना, न कि 'कौन-सा कारण नहीं है' के रूप में
- यह मान लेना कि जनसंख्या वृद्धि असंबंधित है — यह एक अप्रत्यक्ष प्रेरक है, न कि प्रत्यक्ष कारण के समतुल्य
UPPSC/UPSC पूछते हैं 'कौन-सा कारण नहीं है/विषम कौन-सा है' — विलुप्तीकरण के प्रत्यक्ष (निकटस्थ) कारणों को अप्रत्यक्ष (अंतिम) प्रेरकों से अलग करें।
'छठा सामूहिक विलुप्तीकरण/छठा विलुप्तीकरण' शब्द प्रायः किस चर्चा के संदर्भ में समाचारों में उल्लिखित होता है ?
- (a) विश्व के अनेक भागों में व्यापक एकल-फसली कृषि पद्धतियाँ तथा रसायनों के अंधाधुंध उपयोग वाली बड़े पैमाने की व्यावसायिक खेती, जो अच्छे देशज पारिस्थितिक तंत्रों की हानि का परिणाम दे सकती है।
- (b) किसी उल्कापिंड के पृथ्वी से भविष्य में टकराने की आशंका, उसी प्रकार जैसे 65 मिलियन वर्ष पहले हुआ था, जिसने डायनासोरों सहित अनेक प्रजातियों का सामूहिक विलुप्तीकरण किया था।
- (c) विश्व के अनेक भागों में आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों की बड़े पैमाने पर खेती तथा उनकी खेती को अन्य भागों में बढ़ावा देना, जिससे अच्छी देशज फसल-प्रजातियों का लोप तथा खाद्य जैवविविधता की हानि हो सकती है।
- (d) मानव जाति द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का अति-दोहन/दुरुपयोग, प्राकृतिक आवासों का विखंडन/नष्ट होना, पारिस्थितिक तंत्रों का विनाश, प्रदूषण तथा वैश्विक जलवायु परिवर्तन।
उत्तर(d) मानव जाति द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का अति-दोहन/दुरुपयोग, प्राकृतिक आवासों का विखंडन/नष्ट होना, पारिस्थितिक तंत्रों का विनाश, प्रदूषण तथा वैश्विक जलवायु परिवर्तन।
समान अवधारणा — विलुप्तीकरण के मानव-प्रेरित कारण; UPSC का उत्तर आवास हानि, अति-दोहन, प्रदूषण तथा जलवायु परिवर्तन को प्रेरक बताता है, जो इस प्रश्न के प्रत्यक्ष-कारण विकल्पों को प्रतिबिंबित करता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सा सामान्यतः वन्यजीव/जैवविविधता हानि का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष कारण है ?
- (a)प्राकृतिक आवास का नष्ट होना व विखंडन
- (b)ज्वालामुखी विस्फोट
- (c)भूकंप
- (d)सौर ज्वालाएँ
उत्तर(a) प्राकृतिक आवास का नष्ट होना व विखंडन — विलुप्तीकरण का प्रमुख प्रत्यक्ष प्रेरक।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
संकटग्रस्त वन्य जीव व वनस्पति प्रजातियों के अवैध अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को कौन-सा अभिसमय विनियमित करता है ?
- (a)रामसर अभिसमय
- (b)CITES
- (c)मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल
- (d)बेसल अभिसमय
उत्तर(b) CITES — संकटग्रस्त प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय।