निम्नलिखित में से कौन-सा वैश्विक तापवृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव है ? 1. समुद्र जल तल का बढ़ना 2. हिमनदी का पिघलना 3. बीमारियों का फैलना 4. प्रवाल भित्ति का विरंजन होना सही उत्तर का चुनाव नीचे दिये गये कूट से कीजिए । कूट :
- (a)केवल 1, 2 और 3
- (b)केवल 2 और 3
- (c)केवल 1, 3 और 4
- (d)1, 2, 3 और 4
सही उत्तर — (d) 1, 2, 3 और 4। पूर्व एक नोट: प्रश्न-पत्र की मूल हिन्दी छपाई में मुद्रण-त्रुटि है — '(ग्लोबल वार्मिंग' के आगे खुला कोष्ठक कभी बंद नहीं होता ('...वैश्विक तापवृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव है ?')। यह त्रुटि केवल टंकण की है, अर्थ पूर्णतः स्पष्ट है ('वैश्विक तापवृद्धि, अर्थात् ग्लोबल वार्मिंग, का प्रभाव है'), और इसका उत्तर या तर्क पर कोई असर नहीं पड़ता। सूचीबद्ध हर बिन्दु वैश्विक तापवृद्धि का प्रलेखित परिणाम है। तापवृद्धि (1) समुद्र-जल के तापीय प्रसार तथा भूमि-हिम से पिघले जल के कारण समुद्र जल-तल को बढ़ाती है; (2) पर्वतीय हिमनदों व ध्रुवीय हिम-चादरों के पीछे हटने व पिघलने का कारण बनती है; (3) गर्म व अधिक आर्द्र परिस्थितियों के मच्छरों व अन्य वाहकों की सीमा बढ़ाने से वाहक-जनित रोगों (मलेरिया, डेंगू) के व्यापक प्रसार का कारण बनती है; तथा (4) प्रवाल विरंजन का कारण बनती है, जिसमें ऊष्मा-तनावग्रस्त प्रवाल अपने सहजीवी ज़ूज़ैंथेली शैवाल को बाहर निकाल देते हैं और सफेद हो जाते हैं। चूँकि 1, 2, 3 और 4 सभी वास्तविक प्रभाव हैं, अतः उत्तर 1, 2, 3 और 4 है।
- (a)केवल 1, 2 और 3 — (4) प्रवाल भित्ति के विरंजन को गलत ढंग से छोड़ देता है, जो समुद्र-तापन के सर्वाधिक ज्ञात समुद्री प्रभावों में से एक है — ग्रेट बैरियर रीफ का सामूहिक विरंजन इसका शास्त्रीय उदाहरण है।
- (b)केवल 2 और 3 — (1) समुद्र जल-तल में वृद्धि तथा (4) प्रवाल विरंजन दोनों को छोड़ देता है, जो वैश्विक तापवृद्धि के सर्वाधिक व्यापक रूप से उद्धृत प्रभावों में से हैं।
- (c)केवल 1, 3 और 4 — (2) हिमनदी के पिघलने को छोड़ देता है, जबकि हिमनद-पीछे हटना गर्म होती जलवायु के सर्वाधिक दृश्य व सीधे मापे जाने वाले संकेतों में से एक है।
वैश्विक तापवृद्धि — ग्रीन हाउस गैसों के संचय से प्रेरित पृथ्वी के औसत सतही तापमान में दीर्घकालिक वृद्धि — भौतिक व जैविक प्रभावों की एक श्रृंखला को गति देती है। गर्म होते महासागर फैलते हैं (तापीय प्रसार) और भूमि-हिम पिघलता है, अतः समुद्र ऊपर उठते हैं; पर्वतीय व ध्रुवीय हिम सिकुड़ता है; पारिस्थितिक सीमाएँ खिसकती हैं, जिससे रोग-वाहक नए क्षेत्रों तक पहुँचते हैं; तथा ऊष्मा-तनावग्रस्त प्रवाल विरंजित होते हैं। इन्हें परस्पर-अपवर्जी विकल्पों के बजाय मानक, संचयी 'प्रभावों' के रूप में देखा जाता है।
'इनमें से कौन-से प्रभाव हैं' प्रकार के प्रश्न का जाल यह मान लेना है कि सूचीबद्ध कोई एक बिन्दु असंबद्ध है और विषम-तत्व खोजना है। यहाँ चारों वास्तविक, सुस्थापित परिणाम हैं, अतः सबसे सुरक्षित तर्क प्रत्येक बिन्दु को उसके अपने गुण पर परखना है — और प्रत्येक टिका रहता है — जिससे 'सभी' सही सिद्ध होता है।
- समुद्र जल-तल की वृद्धि गर्म होते समुद्री जल के तापीय प्रसार तथा हिमनदों व हिम-चादरों से पिघले जल से आती है।
- हिमनद व हिम-चादर का पीछे हटना गर्म होती जलवायु का प्रत्यक्ष, मापनीय संकेतक है।
- तापवृद्धि मलेरिया व डेंगू जैसे वाहक-जनित रोगों की भौगोलिक सीमा को बढ़ाती है।
- प्रवाल विरंजन तब होता है जब ऊष्मा-तनावग्रस्त प्रवाल अपने सहजीवी ज़ूज़ैंथेली शैवाल को बाहर निकाल देते हैं व रंग खो देते हैं।

- यह मान लेना कि प्रवाल विरंजन केवल प्रदूषण से होता है, तापवृद्धि से नहीं — ऊष्मा-तनाव ही प्राथमिक कारण है।
- यह सोचना कि समुद्र जल-तल वृद्धि केवल हिम-पिघलन से है, समुद्री जल के तापीय प्रसार को भूलकर।
UPPSC/UPSC इसे 'निम्नलिखित में से कौन-से वैश्विक तापवृद्धि के प्रभाव/परिणाम हैं' के रूप में गढ़ते हैं — एक जाँच-सूची जहाँ लगभग सभी सूचीबद्ध प्रभाव वास्तविक होते हैं, अतः 'सभी उपरोक्त' सामान्य उत्तर होता है; कारणों (ग्रीन हाउस गैसों) को प्रभावों (समुद्र जल-तल वृद्धि, विरंजन आदि) से अलग रखें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
वैश्विक तापवृद्धि के कारण समुद्र जल-तल की वृद्धि में निम्नलिखित में से कौन-सी प्रक्रियाएँ योगदान देती हैं ? 1. समुद्री जल का तापीय प्रसार 2. भूमि-आधारित हिमनदों व हिम-चादरों का पिघलना 3. तैरते समुद्री हिम का पिघलना
- (a)केवल 1 और 2
- (b)केवल 2 और 3
- (c)केवल 1 और 3
- (d)1, 2 और 3
उत्तर(a) केवल 1 और 2 — तापीय प्रसार व भूमि-हिम का पिघलना समुद्र जल-तल बढ़ाते हैं; तैरते समुद्री हिम का पिघलना अधिक योगदान नहीं देता क्योंकि वह पहले से अपने ही भार के बराबर जल विस्थापित करता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
प्रवाल विरंजन मुख्यतः किसके कारण होता है ?
- (a)ऊष्मा-तनाव में सहजीवी ज़ूज़ैंथेली शैवाल की हानि
- (b)अत्यधिक अवसादन से भित्ति का दबना
- (c)भित्ति की मछलियों का अति-मत्स्यन
- (d)समुद्री लवणता में गिरावट
उत्तर(a) ऊष्मा-तनाव में सहजीवी ज़ूज़ैंथेली शैवाल की हानि — गर्म होते समुद्र प्रवालों को वे शैवाल बाहर निकालने पर मजबूर करते हैं जो उन्हें रंग व भोजन देते हैं।