हिमालय पर्वत श्रेणी के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है/हैं ? 1. मुख्य हिमालय की परतदार चट्टानें जीवाश्म हीन है । 2. लघु हिमालय की परतदार चट्टानों में समुद्री जीव-जंतुओं के जीवाश्म मिलते हैं । 3. बाह्य हिमालय या शिवालिक हिमालय में मानव सभ्यता के अवशेष मिले हैं । नीचे दिए हुए कूट में से सही उत्तर चुनिए : कूट :
- (a)केवल 1 और 2
- (b)केवल 2 और 3
- (c)केवल 1 और 3
- (d)1, 2 और 3 सही है
सही उत्तर — (d), तीनों कथन सही हैं। यह प्रश्न भारतीय भूगोल की पाठ्यपुस्तकों में प्रयुक्त हिमालय के मानक त्रि-स्तरीय विभाजन की परीक्षा लेता है, जहाँ प्रत्येक पट्टी की पहचान उस चट्टान के प्रकार और वह चट्टान क्या सुरक्षित रखती है, इससे होती है। (1) मुख्य हिमालय या हिमाद्रि क्रिस्टलीय चट्टान — ग्रेनाइट, नीस और शिस्ट — के एक क्रोड के इर्द-गिर्द बना है, और उस अक्षीय पट्टी में मुड़ी हुई अवसादी सामग्री इतनी अधिक तप्त और संपीड़ित हो चुकी है कि कार्बनिक अवशेष नष्ट हो गए; इसलिए पाठ्यपुस्तकें हिमाद्रि की चट्टानों को जीवाश्म-रहित बताती हैं। इसे भूवैज्ञानिक निरपेक्ष सत्य मानने से पहले नीचे 'भ्रम' में दी गई ईमानदार चेतावनी अवश्य पढ़ें। (2) मुख्य सीमा उत्क्रम और मुख्य मध्य उत्क्रम के बीच स्थित लघु हिमालय या हिमाचल, अधिकांशतः संपीड़ित और परिवर्तित पर अब भी पहचानी जा सकने वाली अवसादी चट्टान की पट्टी है। मसूरी और नैनीताल की पहाड़ियों में उजागर इसकी क्रोल-टाल शृंखला ने समुद्री जीवों के जीवाश्म दिए हैं, जो प्रत्यक्ष प्रमाण है कि पर्वत उठने से पहले ये अवसाद समुद्र के नीचे बिछाए गए थे। (3) बाह्य हिमालय या शिवालिक सबसे युवा पट्टी है, जो उठते पर्वतों से बहकर आई कोमल, कम संगठित रेत, गाद, चिकनी मिट्टी और शैलसमूह से बनी है और उनके पाद के साथ जमा हुई है। ये परतें मध्य-प्लाइस्टोसीन कशेरुकी जीवाश्मों के विश्व के सबसे समृद्ध स्रोतों में से हैं, जिनमें जीवाश्म वानर शिवापिथिकस शामिल है, और शिवालिक-सोन पहाड़ी-पाद पट्टी से पुरापाषाणकालीन पत्थर के औज़ार भी मिले हैं — यही आधार है जिसके कारण प्रश्नपत्र इन्हें 'मानव सभ्यता के अवशेष' कहता है। चूँकि प्रश्नपत्र तीनों को सही मानता है, तीनों को समाहित करने वाला कूट ही उत्तर है।
- (a)केवल 1 और 2 — यह कथन 3 को छोड़ देता है, पर शिवालिक ठीक वही हिमालयी पट्टी है जो जीवाश्म और प्रारंभिक पाषाण-युग की खोजों के लिए प्रसिद्ध है — इनकी युवा, कम संगठित नदी-निर्मित परतें आदर्श दफन माध्यम हैं, यही कारण है कि शिवालिक-सोन पहाड़ी-पाद क्षेत्र कशेरुकी जीवाश्मों और पुरापाषाणकालीन औज़ारों का एक शास्त्रीय खोज-क्षेत्र है।
- (b)केवल 2 और 3 — यह कथन 1 को छोड़ देता है, जो मुख्य हिमालय पर परीक्षा की घोषित स्थिति है: इसकी अक्षीय पट्टी क्रिस्टलीय और कायांतरित है, और इन चट्टानों का पाठ्यपुस्तक वर्णन यह है कि ये कोई जीवाश्म नहीं धारण करतीं।
- (c)केवल 1 और 3 — यह कथन 2 को छोड़ देता है, जबकि लघु हिमालय के समुद्री जीवाश्म इस बात का मानक पाठ्यपुस्तक प्रमाण हैं कि हिमालयी अवसाद उत्थान से पहले टेथिस सागर में संचित हुए थे।
हिमालय को परंपरागत रूप से तीन लगभग समानांतर, अनुदैर्घ्य पट्टियों के रूप में वर्णित किया जाता है जो बड़े उत्क्रम भ्रंशों से अलग होती हैं, प्रत्येक का अपना चट्टान-चरित्र है। मुख्य हिमालय (हिमाद्रि) सबसे ऊँचा है और प्राचीन क्रिस्टलीय व कायांतरित चट्टान से बना है। इसके दक्षिण में लघु हिमालय (हिमाचल) तीव्रता से मुड़ी हुई पर अब भी पहचानी जा सकने वाली अवसादी व निम्न-श्रेणी कायांतरित चट्टान की पट्टी है। इससे भी दक्षिण में, मुख्य सीमा उत्क्रम द्वारा इससे अलग, बाह्य हिमालय या शिवालिक स्थित है — सबसे युवा पट्टी, जो उठते पर्वतों के ही मलबे से बनी है, केवल कुछ लाख वर्ष पहले नदियों द्वारा बिछाई गई। प्रत्येक पट्टी की जीवाश्म-सामग्री इसी से अनुसरण करती है: भारी कायांतरित चट्टान अपने जीवाश्म खो देती है, मध्यम रूप से परिवर्तित समुद्री अवसाद उन्हें बनाए रखता है, और युवा नदी-निर्मित अवसाद उन जानवरों व लोगों की हड्डियाँ व औज़ार सुरक्षित रखता है जो उन नदियों के किनारे रहते थे।
तीनों कथनों को अलग-अलग रटने का प्रयास न करें; उन्हें उस आयु-और-परिवर्तन प्रवणता से निकालें जो उत्तर से दक्षिण तक चलती है। उत्तर में सबसे प्राचीन और सबसे अधिक तपी हुई (कोई जीवाश्म नहीं बचता), बीच में समुद्री अवसाद (समुद्री जीवाश्म बचते हैं), दक्षिण में सबसे युवा और सबसे कोमल (स्थलीय कशेरुकी और पत्थर के औज़ार बचते हैं)। यही एक प्रवणता इस प्रश्न और अधिकांश अन्य 'हिमालयी पट्टी को मिलाओ' प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देती है। लुभावनी त्रुटि यह मान लेना है कि सबसे ऊँची, सबसे भव्य श्रेणी में सबसे समृद्ध अभिलेख होना चाहिए — सत्य इसके विपरीत है, क्योंकि यहाँ ऊँचाई गहरे दबाव, ताप और दाब से आती है, जो सभी जीवाश्मों को नष्ट कर देते हैं।
- उत्तर से दक्षिण त्रि-स्तरीय विभाजन: मुख्य हिमालय (हिमाद्रि), लघु हिमालय (हिमाचल), बाह्य हिमालय (शिवालिक), जो मुख्य मध्य उत्क्रम और मुख्य सीमा उत्क्रम द्वारा अलग होते हैं।
- हिमाद्रि का क्रोड ग्रेनाइट, नीस और शिस्ट से बना है; ताप और दाब जीवाश्मों को नष्ट कर देते हैं, यही कारण है कि पाठ्यपुस्तकें इसकी चट्टानों को जीवाश्म-रहित बताती हैं।
- मसूरी और नैनीताल के आसपास लघु हिमालय की क्रोल-टाल अवसादी शृंखला ने समुद्री जीवों के जीवाश्म दिए हैं, जो इन चट्टानों को पूर्व टेथिस सागर निक्षेप के रूप में चिह्नित करता है।
- शिवालिक परतें युवा, अधिकांशतः असंगठित नदी अवसाद हैं और मध्य-प्लाइस्टोसीन कशेरुकी जीवाश्मों के विश्व के सबसे समृद्ध स्रोतों में से हैं, जिनमें जीवाश्म वानर शिवापिथिकस शामिल है।
- पुरापाषाणकालीन पत्थर के औज़ार-समूह शिवालिक-सोन पहाड़ी-पाद पट्टी से प्राप्त हुए हैं, जिसे प्रश्नपत्र 'मानव सभ्यता के अवशेष' कहता है।
- हिमाद्रि शिखर के उत्तर में टेथिस या तिब्बती हिमालय स्थित है, एक समुद्री अवसादी पट्टी जो जीवाश्मों में समृद्ध है — 'भ्रम' में दी गई चेतावनी देखें।
जीवाश्म अभिलेख दक्षिण की ओर बढ़ने पर सुधरता जाता है क्योंकि चट्टानें युवा और कम परिवर्तित होती जाती हैं — यही कारण है कि सबसे ऊँची पट्टी सबसे खाली है। आधिकारिक कुंजी तीनों कथनों को स्वीकार करती है, इसलिए तीनों पंक्तियाँ ही उत्तर हैं।
- कथन 1 परीक्षा की स्थिति है, कोई स्थिर भूवैज्ञानिक निरपेक्ष सत्य नहीं। टेथिस (तिब्बती) हिमालय का अवसादी अनुक्रम, जो हिमाद्रि शिखर के ठीक उत्तर स्थित है और कभी-कभी ढीले ढंग से 'मुख्य हिमालय' में गिना जाता है, वास्तव में जीवाश्मों में समृद्ध है — स्पीति शेल्स के अमोनाइट इसका मानक उदाहरण हैं। यह कथन केवल भारतीय भूगोल की पाठ्यपुस्तकों में प्रयुक्त संकीर्ण परिभाषा के तहत ही सही ठहरता है, जहाँ मुख्य हिमालय का अर्थ केवल क्रिस्टलीय अक्षीय पट्टी है और टेथिस हिमालय को एक अलग क्षेत्र माना जाता है। परीक्षा में कुंजी के अनुसार उत्तर दें; साक्षात्कार और मुख्य परीक्षा के लिए यह सूक्ष्म भेद जानें।
- यह मान लेना कि अधिक ऊँचाई का अर्थ है अधिक प्राचीन, बेहतर सुरक्षित चट्टान। यहाँ ऊँचाई गहरे दबाव, ताप और दाब से आती है — ठीक वही प्रक्रियाएँ जो जीवाश्मों को मिटा देती हैं।
- शिवालिक के वानर-सदृश और कशेरुकी जीवाश्मों को हड़प्पा-प्रकार की 'सभ्यता' समझ लेना। पहाड़ी-पाद क्षेत्र से वास्तव में जो मिलता है वह मध्य-प्लाइस्टोसीन पशु जीवाश्म और पुरापाषाणकालीन पत्थर के औज़ार हैं, अर्थात बहुत प्रारंभिक मानव उपस्थिति, न कि नगरीय अवशेष।
UPPSC ऐसे तीन-कथन प्रश्न पसंद करता है जो यह परखते हैं कि क्या आप किसी गुण — चट्टान प्रकार, जीवाश्म, ऊँचाई, अपवाह — को सही हिमालयी पट्टी से जोड़ सकते हैं; UPSC इसी पाठ्यक्रम तक विवर्तनिकी, अपवाह और भाबर-तराई-दून भू-आकृतियों के माध्यम से पहुँचना पसंद करता है।
अवसादी चट्टानों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: I. अवसादी चट्टानें पृथ्वी की सतह पर जलीय तंत्र द्वारा बनती हैं। II. अवसादी चट्टानों के निर्माण में पूर्व-विद्यमान चट्टानों का अपक्षय शामिल होता है। III. अवसादी चट्टानों में जीवाश्म होते हैं। IV. अवसादी चट्टानें सामान्यतः परतों में पाई जाती हैं। इनमें से कौन-से कथन सही हैं ?
- (a) I और II
- (b) I और IV
- (c) II, III और IV
- (d) I, II, III और IV
उत्तर(d) I, II, III और IV
वही मूल विचार — कि जीवाश्म परतदार अवसादी चट्टान में सुरक्षित रहते हैं, न कि उस चट्टान में जो पिघल गई हो या कायांतरित हो चुकी हो — जो ठीक वही कारण है कि हिमालयी पट्टियाँ जीवाश्म-सामग्री में भिन्न होती हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सी भारत की सबसे युवा पर्वत श्रेणी है ?
- (a) हिमाद्रि श्रेणी
- (b) अरावली श्रेणी
- (c) पश्चिमी घाट
- (d) विंध्य श्रेणी
उत्तर(a) हिमाद्रि श्रेणी
इसी हिमालयी संरचना की परीक्षा आयु के कोण से लेता है — इस प्रश्न की हिमाद्रि पट्टी वही है जिसके बारे में UPPSC ने एक वर्ष बाद भारत की सबसे युवा वलित-पर्वत श्रेणी के रूप में पूछा।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
हिमालय की शिवालिक श्रेणी मुख्यतः किससे बनी है ?
- (a)प्रीकैम्ब्रियन युग के ग्रेनाइट और नीस
- (b)नदियों द्वारा निक्षेपित असंगठित रेत, गाद, चिकनी मिट्टी और शैलसमूह
- (c)बेसाल्टी लावा प्रवाह
- (d)प्रवाल-समृद्ध समुद्री चूना पत्थर
उत्तर(b) नदियों द्वारा निक्षेपित असंगठित रेत, गाद, चिकनी मिट्टी और शैलसमूह — शिवालिक उठते हिमालय से अपरदित मलबे से बने हैं, यही कारण है कि ये तीनों पट्टियों में सबसे युवा, सबसे कोमल और भूस्खलन-प्रवण हैं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
हिमालयी अवसादी चट्टानों में मिले समुद्री जीवाश्मों को किस बात के प्रमाण के रूप में लिया जाता है ?
- (a)हिमालय कभी एक विशाल हिमचादर से ढका था
- (b)ये चट्टानें समुद्र के नीचे ज्वालामुखी विस्फोट से बनीं
- (c)ये अवसाद पर्वतों में उत्थित होने से पहले टेथिस सागर में संचित हुए
- (d)हिमालय दक्कन पठार के अपरदन से बना
उत्तर(c) ये अवसाद पर्वतों में उत्थित होने से पहले टेथिस सागर में संचित हुए — समुद्र तल से किलोमीटरों ऊपर खड़ी चट्टान में समुद्री जीवाश्म टेथिस सागर के बंद होने और उस टक्कर का शास्त्रीय प्रमाण हैं जिसने हिमालय को उठाया।