कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के संदर्भ में निम्न में से कौन-सा कथन सही है/हैं ? 1. कम्पनी एक्ट 2014 ने सी.एस.आर. को अनिवार्य बना दिया । 2. इसके अंतर्गत आनेवाली कंपनियों को अपने वार्षिक शुद्ध लाभ का एक प्रतिशत सी.एस.आर. गतिविधियों में व्यय करना होगा । नीचे दिए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)1 एवं 2 दोनों
- (d)न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर — (d) न तो 1 और न ही 2। कथन 1 विधि की दृष्टि से गलत है: 'कंपनी एक्ट 2014' नाम का कोई अधिनियम नहीं है। अनिवार्य कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 द्वारा बनाया गया था; 2014 से जो चीज़ें संबंधित हैं वे हैं कंपनी (कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व नीति) नियम, 2014, और 1 अप्रैल 2014 से धारा 135 का प्रभाव में आना — ठीक यहीं से '2014' का लुभावना आँकड़ा आता है। कथन 2 संख्या की दृष्टि से गलत है: धारा 135(5) एक आच्छादित कंपनी को अपने वार्षिक शुद्ध लाभ के एक प्रतिशत के बजाय, ठीक पहले के तीन वित्तीय वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम-से-कम दो प्रतिशत व्यय करने को कहती है। वर्ष और प्रतिशत दोनों गलत बताए गए हैं, इसलिए दोनों में से कोई कथन नहीं टिकता और उत्तर (d) है।
- (a)केवल 1 — यह 'कंपनी एक्ट 2014' को अनिवार्य CSR का स्रोत मान लेता है। सक्षमकारी विधि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 है; 2014 CSR नीति नियमों तथा धारा के प्रवर्तन का वर्ष है, अधिनियम का नहीं।
- (b)केवल 2 — यह एक प्रतिशत के आँकड़े को स्वीकार कर लेता है। वैधानिक न्यूनतम दो प्रतिशत है, और इसकी गणना किसी एक वर्ष के शुद्ध लाभ पर नहीं बल्कि ठीक पहले के तीन वित्तीय वर्षों के औसत शुद्ध लाभ पर की जाती है।
- (c)1 एवं 2 दोनों — दोनों कथनों में त्रुटि है — पहले में गलत अधिनियम-वर्ष और दूसरे में गलत व्यय-सीमा — इसलिए दोनों एक साथ सही नहीं हो सकते।
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 ने भारत को उन पहले देशों में शामिल किया जिन्होंने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व व्यय को स्वैच्छिक संहिताओं पर छोड़ने के बजाय वैधानिक आधार पर रखा। कोई कंपनी आच्छादित मानी जाती है यदि, ठीक पहले के वित्तीय वर्ष में, उसकी निवल संपत्ति 500 करोड़ रुपये या अधिक, या कारोबार 1,000 करोड़ रुपये या अधिक, या शुद्ध लाभ 5 करोड़ रुपये या अधिक रहा हो। ऐसी कंपनी को बोर्ड की एक CSR समिति गठित करनी होती है और ठीक पहले के तीन वित्तीय वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम-से-कम दो प्रतिशत अनुसूची VII से लिए गए कार्यकलापों पर व्यय करना होता है — जिसमें भूख व गरीबी उन्मूलन, शिक्षा को बढ़ावा देना, लैंगिक समानता, पर्यावरणीय स्थिरता, राष्ट्रीय धरोहर का संरक्षण, तथा अधिसूचित सरकारी निधियों में योगदान जैसी मदें सूचीबद्ध हैं। विस्तृत तंत्र — क्या CSR में गिना जाता है, क्या नहीं, और इसे कैसे रिपोर्ट किया जाता है — कंपनी (CSR नीति) नियम, 2014 में है।
CSR पर कथन-आधारित प्रश्न लगभग हमेशा दो संख्याओं पर जीते या हारे जाते हैं, अधिनियम-वर्ष और प्रतिशत, इसलिए इन्हें एक जोड़ी के रूप में याद करें: 2013 और दो प्रतिशत। परीक्षक की पसंदीदा युक्ति है 2014 को बदल कर डाल देना, क्योंकि नियम और प्रवर्तन-तिथि वास्तव में 2014 की हैं, और दो प्रतिशत को एक प्रतिशत से बदल देना, क्योंकि लाभ पर एक अनिवार्य शुल्क के लिए छोटी संख्या विश्वसनीय लगती है। याद रखने योग्य तीसरा विवरण है आधार: यह पिछले तीन वर्षों के शुद्ध लाभ का औसत है, जो किसी एक बुरे या बंपर वर्ष को समतल कर देता है, न कि कथन 2 द्वारा संकेतित वर्तमान वर्ष का लाभ।
- अनिवार्य CSR कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 से आती है; यह धारा तथा कंपनी (CSR नीति) नियम 1 अप्रैल 2014 से प्रभाव में आए
- सीमा: ठीक पहले के वित्तीय वर्ष में निवल संपत्ति 500 करोड़ रुपये या अधिक, या कारोबार 1,000 करोड़ रुपये या अधिक, या शुद्ध लाभ 5 करोड़ रुपये या अधिक
- अनिवार्य व्यय: ठीक पहले के तीन वित्तीय वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम-से-कम 2 प्रतिशत
- अनुमेय CSR गतिविधियाँ कंपनी अधिनियम, 2013 की अनुसूची VII में सूचीबद्ध हैं; एक बोर्ड-स्तरीय CSR समिति नीति की निगरानी करती है
- 2021 से प्रभावी एक बाद के संशोधन के अनुसार, किसी चालू परियोजना की अव्ययित CSR राशि को 'अव्ययित CSR खाते' में स्थानांतरित कर तीन वित्तीय वर्षों के भीतर उपयोग करना होगा, तथा अन्य अव्ययित राशियों को अनुसूची VII में निर्दिष्ट किसी निधि में स्थानांतरित करना होगा
दोनों कथन विधि को गलत बताते हैं — इसलिए उत्तर (d), न तो 1 और न ही 2।
- '2014' को अधिनियम-वर्ष मान लेना — नियम 2014 के हैं, अधिनियम 2013 का है
- एक प्रतिशत उद्धृत करना, या दो प्रतिशत को तीन-वर्ष के औसत के बजाय किसी एक वर्ष के लाभ पर लागू करना
- यह मान लेना कि CSR वैकल्पिक है; आच्छादित कंपनियों के लिए यह व्यय अनिवार्य है, और अव्ययित राशियों को अब केवल स्पष्टीकरण देकर टाला नहीं जा सकता बल्कि पार्क या स्थानांतरित करना होगा
UPPSC अधिनियम-वर्ष व प्रतिशत पर दो-कथन जाँच पूछता है, जबकि UPSC नियमों में एक स्तर और गहराई तक जाता है — क्या CSR व्यय की योग्यता रखता है, क्या कोई न्यूनतम सीमा निर्धारित है, और अव्ययित राशियों के साथ कैसा व्यवहार किया जाना चाहिए।
भारत में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) नियमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. CSR नियम यह निर्दिष्ट करते हैं कि जो व्यय कंपनी को सीधे या उसके कर्मचारियों को लाभान्वित करता है उसे CSR गतिविधि नहीं माना जाएगा। 2. CSR नियम CSR गतिविधियों पर न्यूनतम व्यय निर्दिष्ट नहीं करते। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर(a) केवल 1
वही वैधानिक योजना, पाँच वर्ष बाद परखी गई: UPSC का दूसरा कथन ठीक उसी कारण गलत है जिस कारण UPPSC का दूसरा कथन गलत है — धारा 135 के अंतर्गत तीन-वर्ष के औसत शुद्ध लाभ का दो प्रतिशत न्यूनतम व्यय निर्धारित है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के अंतर्गत, किसी कंपनी को CSR दायित्वों का पालन करना होगा यदि ठीक पहले के वित्तीय वर्ष में उसकी थी:
- (a)निवल संपत्ति 500 करोड़ रुपये या अधिक, या कारोबार 1,000 करोड़ रुपये या अधिक, या शुद्ध लाभ 5 करोड़ रुपये या अधिक
- (b)निवल संपत्ति 100 करोड़ रुपये या अधिक, या कारोबार 500 करोड़ रुपये या अधिक, या शुद्ध लाभ 1 करोड़ रुपये या अधिक
- (c)केवल कारोबार 5,000 करोड़ रुपये या अधिक
- (d)केवल शुद्ध लाभ 50 करोड़ रुपये या अधिक
उत्तर(a) तीन सीमाओं में से कोई भी एक — निवल संपत्ति 500 करोड़, कारोबार 1,000 करोड़ या शुद्ध लाभ 5 करोड़ रुपये — किसी कंपनी को धारा 135 के दायरे में ले आती है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
वे गतिविधियाँ जिन्हें कंपनियाँ अपनी CSR नीति में शामिल कर सकती हैं, कंपनी अधिनियम, 2013 की किस अनुसूची में दी गई हैं?
- (a)अनुसूची V
- (b)अनुसूची VI
- (c)अनुसूची VII
- (d)अनुसूची VIII
उत्तर(c) अनुसूची VII — इसमें भूख व गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, लैंगिक समानता, पर्यावरणीय स्थिरता, धरोहर संरक्षण व अधिसूचित निधियाँ, अन्य के साथ, शामिल हैं।