नीचे दो कथन हैं, जिसमें से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है - अभिकथन (A) - देश के पर्यावरण को बनाये रखने के लिए जनसंख्या नियंत्रण आवश्यक है । कारण (R) - जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के कारण पर्यावरण संतुलन बना रहता है । नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए - कूट -
- (a)(A) और (R) दोनों सत्य हैं किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता
- (b)(A) गलत है किन्तु (R) सत्य है
- (c)(A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
- (d)(A) सत्य है किन्तु (R) गलत है
सही उत्तर — (d) '(A) सत्य है किन्तु (R) गलत है'। अभिकथन (A) सत्य है: जनसंख्या नियंत्रण से सीमित संसाधनों (भूमि, जल, वन, वायु) पर दबाव कम होता है, जिससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। कारण (R) असत्य है — जनसंख्या में तीव्र वृद्धि से पर्यावरण संतुलन 'बना रहता' नहीं है; इसके विपरीत, अधिक उपभोग, वनों की कटाई, प्रदूषण, अपशिष्ट उत्पादन और संसाधनों के क्षरण के माध्यम से यह संतुलन बिगड़ता है। चूँकि A सत्य है और R असत्य है, सही कूट (d) है।
- (a)(A) और (R) दोनों सत्य हैं किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता — R बिल्कुल भी सत्य नहीं है — जनसंख्या की तीव्र वृद्धि पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के बजाय बिगाड़ती है — इसलिए 'दोनों सत्य' कहना गलत है।
- (b)(A) गलत है किन्तु (R) सत्य है — स्थिति उलटी है: सत्य तो A है और गलत R है, न कि इसके विपरीत।
- (c)(A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है — यह व्याख्या हो ही नहीं सकती क्योंकि R असत्य है; कोई असत्य कारण किसी सत्य अभिकथन की सही व्याख्या कभी नहीं कर सकता।
अभिकथन-कारण (Assertion-Reason) प्रश्नों में पहले प्रत्येक कथन की सच्चाई का स्वतंत्र रूप से आकलन करें, फिर देखें कि क्या कारण (यदि सत्य हो) वास्तव में अभिकथन की व्याख्या करता है। यहाँ अभिकथन (जनसंख्या नियंत्रण पर्यावरण की सहायता करता है) सही है, परन्तु कारण वास्तविकता को उलट देता है — यह दावा करता है कि तीव्र जनसंख्या वृद्धि संतुलन 'बनाए रखती' है, जबकि वास्तव में तीव्र वृद्धि पारिस्थितिकी तंत्रों पर दबाव डालती है।
जाल यह है कि दोनों वाक्यों में 'जनसंख्या' और 'पर्यावरण' शब्द आते हैं, इसलिए जल्दबाज़ी में पढ़ने वाला 'दोनों सत्य' अंकित कर सकता है। पहचान का बिंदु R की क्रिया में है: तीव्र जनसंख्या वृद्धि से 'पर्यावरण संतुलन बना रहता है' — यह तथ्यतः उल्टा है। इस एक उलटफेर को पहचान लेने से (d) प्राप्त होता है।
- तीव्र जनसंख्या वृद्धि भोजन, जल, ऊर्जा और भूमि की माँग बढ़ाती है — जिससे वनों की कटाई, प्रदूषण और संसाधन क्षरण बढ़ता है।
- जनसंख्या नियंत्रण (स्थिरीकरण) पारिस्थितिकी तंत्रों पर दबाव कम करता है और सतत विकास में सहायक होता है।
- अभिकथन-कारण प्रश्न में, कोई असत्य कारण अभिकथन की 'सही व्याख्या' नहीं हो सकता।
- भारत में पर्यावरण-जनसंख्या संबंध वहन क्षमता (कैरींग कैपेसिटी) और सतत विकास की बहसों का आधार है।
- दोनों वाक्यों में साझा शब्द 'जनसंख्या' और 'पर्यावरण' होने के कारण 'दोनों सत्य' अंकित करना।
- यह नज़रअंदाज़ करना कि R वास्तविक कार्य-कारण संबंध को उलट देता है ('बना रहता है' के स्थान पर 'बिगड़ता है' होना चाहिए)।
UPPSC/UPSC ऐसे अभिकथन-कारण प्रश्न बनाते हैं जहाँ कारण चुपचाप कार्य-कारण संबंध को उलट देता है — व्याख्या का निर्णय करने से पहले हमेशा प्रत्येक कथन की सत्यता स्वतंत्र रूप से जाँचें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अभिकथन (A): जनसंख्या की तीव्र वृद्धि प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ाती है। कारण (R): एक बड़ी जनसंख्या अधिक भोजन, जल और ऊर्जा का उपभोग करती है। सही कूट चुनिए:
- (a)दोनों सत्य, R, A की सही व्याख्या करता है
- (b)दोनों सत्य, R, A की सही व्याख्या नहीं करता
- (c)A सत्य, R गलत
- (d)A गलत, R सत्य
उत्तर(a) दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या करता है — अधिक उपभोग ही ठीक वह कारण है जिससे बढ़ती जनसंख्या संसाधनों पर दबाव डालती है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन सा तीव्र, अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि का प्रत्यक्ष पर्यावरणीय परिणाम है ?
- (a)प्रति व्यक्ति वन क्षेत्र में वृद्धि
- (b)भूजल का क्षरण और वनों की कटाई में वृद्धि
- (c)समग्र प्रदूषण स्तर में गिरावट
- (d)स्वतः पारिस्थितिक संतुलन
उत्तर(b) भूजल का क्षरण और वनों की कटाई में वृद्धि — अधिक माँग भूमि, जल और वनों पर दबाव डालती है।