भारत के महान्यायवादी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं ? (1) महान्यायवादी के पद पर ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति होगी, जो कि उच्चतम न्यायलय का न्यायधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित हो । (2) महान्यायवादी को उनके पद से उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है जैसे कि उच्चतम न्यायालय के न्यायधीशों को । नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए - कूट -
- (a)दोनों 1 तथा 2
- (b)केवल 2
- (c)न तो 1 ना ही 2
- (d)केवल 1
सही उत्तर — (d) केवल 1। अनुच्छेद 76(1) के अंतर्गत, महान्यायवादी वही व्यक्ति नियुक्त किया जा सकता है जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित हो — अतः कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है: महान्यायवादी राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (pleasure) पद धारण करता है (अनुच्छेद 76(4)) और राष्ट्रपति उसे किसी भी समय हटा सकते हैं; इसका कोई निश्चित कार्यकाल नहीं है और न ही उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों जैसी कोई विशेष निष्कासन प्रक्रिया लागू होती है (सिद्ध कदाचार या असमर्थता के आधार पर दोनों सदनों के अभिभाषण के बाद राष्ट्रपति द्वारा हटाया जाना, अनुच्छेद 124(4))। इसलिए केवल कथन 1 सही है। (नोट: प्रश्न-पत्र की हिंदी में कथन (1) में 'न्यायलय' और कथन (2) में 'न्यायालय' छपा है — यह पुस्तिका की अपनी वर्तनी असंगति है, दोनों उच्चतम न्यायालय के लिए ही हैं।)
- (a)दोनों 1 तथा 2 — कथन 2 गलत है — महान्यायवादी को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश वाली प्रक्रिया से नहीं हटाया जाता; वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है — इसलिए 'दोनों' सही नहीं हो सकता।
- (b)केवल 2 — यह सत्य को उलट देता है: कथन 2 ही गलत है, जबकि कथन 1 (उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की अर्हता) सही कथन है।
- (c)न तो 1 ना ही 2 — कथन 1 वास्तव में सही है (अनुच्छेद 76 के तहत उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की अर्हता आवश्यक है), अतः 'न तो' गलत है।
भारत के महान्यायवादी (अनुच्छेद 76) संघ का सर्वोच्च विधि अधिकारी है। इसकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होती है, इसे उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित होना चाहिए, यह सरकार को विधिक मामलों पर सलाह देता है, तथा इसे सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार एवं संसद में बोलने का अधिकार (परंतु मत देने का नहीं) प्राप्त है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है — इसका कोई निश्चित कार्यकाल और कोई विस्तृत निष्कासन प्रक्रिया नहीं है।
जाल यह मान लेना है कि एक उच्च संवैधानिक पद को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जैसी ही पद-सुरक्षा स्वतः प्राप्त होती है। ऐसा नहीं है: महान्यायवादी राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत सेवा करता है। कथन 1 अर्हता-आवश्यकता को दोहराता है (सत्य); कथन 2 न्यायाधीशों की निष्कासन-प्रक्रिया को महान्यायवादी पर आरोपित करता है (असत्य)।
- अनुच्छेद 76 भारत के महान्यायवादी के पद को नियंत्रित करता है।
- अर्हता: उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित होना चाहिए।
- राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त; राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।
- सर्वोच्च विधि अधिकारी; भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार; संसद में बोल सकता है परंतु मत नहीं दे सकता और मंत्रिमंडल का सदस्य नहीं है।
केवल कथन 1 सही है, अतः उत्तर (d) केवल 1 है।
- यह मान लेना कि महान्यायवादी का निश्चित कार्यकाल या न्यायाधीशों जैसी निष्कासन-प्रक्रिया है — वह तो राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत सेवा करता है
- महान्यायवादी (संघ) को अनुच्छेद 165 के अंतर्गत महाधिवक्ता (राज्य) से भ्रमित करना
UPSC/UPPSC महान्यायवादी को उसकी अर्हता, नियुक्ति-प्राधिकारी, कार्यकाल ('प्रसादपर्यंत'), और संसद व न्यायालयों में उसके अधिकारों पर आधारित कथन-प्रश्नों के माध्यम से परखते हैं।
भारत के महान्यायवादी के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: I. उसकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा होती है। II. उसके पास वही अर्हताएँ होनी चाहिए जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के लिए आवश्यक हैं। III. उसे संसद के किसी एक सदन का सदस्य होना चाहिए। IV. उसे संसद द्वारा महाभियोग से हटाया जा सकता है। इनमें से कौन से कथन सही हैं?
- (a) I और II
- (b) I और III
- (c) II, III और IV
- (d) III और IV
उत्तर(a) I और II
वही पद और लगभग समान दो बिंदु — महान्यायवादी में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जैसी अर्हता तो होनी चाहिए (सत्य) परंतु उसे किसी महाभियोग/न्यायाधीशों-जैसी प्रक्रिया से नहीं हटाया जाता (असत्य)।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत के महान्यायवादी अपना पद धारण करते हैं:
- (a)पाँच वर्ष के निश्चित कार्यकाल के लिए
- (b)राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत
- (c)65 वर्ष की आयु तक
- (d)संसद के दो-तिहाई बहुमत द्वारा हटाए जाने तक
उत्तर(b) राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत — महान्यायवादी का कोई निश्चित कार्यकाल नहीं है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
संविधान का कौन सा अनुच्छेद भारत के महान्यायवादी के पद का प्रावधान करता है?
- (a)अनुच्छेद 74
- (b)अनुच्छेद 76
- (c)अनुच्छेद 148
- (d)अनुच्छेद 165
उत्तर(b) अनुच्छेद 76 — अनुच्छेद 165 राज्य के महाधिवक्ता का प्रावधान करता है।