कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के समय किस संस्थान ने नाइट्रोजन जनरेटर को ऑक्सीजन जनरेटर में बदलने का प्रदर्शन किया था ?
- (a)भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु
- (b)आई.आई.टी., बम्बई
- (c)आई.आई.टी., मद्रास
- (d)आई.आई.टी., कानपुर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — (b), आई.आई.टी., बम्बई। COVID-19 की दूसरी लहर (अप्रैल 2021) के दौरान, आई.आई.टी. बम्बई ने यह प्रदर्शित किया कि मौजूदा PSA (प्रेशर स्विंग एड्ज़ॉर्प्शन) नाइट्रोजन-उत्पादन संयंत्र को ऑक्सीजन जनरेटर में बदला जा सकता है, अवशोषक आणविक चालनी (मॉलिक्यूलर सीव) को बदलकर — कार्बन आणविक चालनी के स्थान पर ज़ीओलाइट — जिससे लगभग 93-96% शुद्धता की ऑक्सीजन उत्पन्न हुई। प्रोफेसर मिलिंद अत्रे के नेतृत्व में, टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स व स्पैनटेक इंजीनियर्स के साथ किए गए इस पायलट परियोजना ने अस्पताल ऑक्सीजन आपूर्ति बढ़ाने का एक त्वरित, सस्ता उपाय दिया, उस समय जब आपूर्ति की कमी थी।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु — गलत — IISc ने भी COVID-काल में अन्य ऑक्सीजन-सम्बंधी कार्य किया, परन्तु अप्रैल 2021 में प्रदर्शित नाइट्रोजन-जनरेटर-से-ऑक्सीजन-जनरेटर परिवर्तन का श्रेय आई.आई.टी. बम्बई को जाता है।
- (c)आई.आई.टी., मद्रास — गलत — आई.आई.टी. मद्रास को इस विशिष्ट नाइट्रोजन-से-ऑक्सीजन परिवर्तन का श्रेय नहीं दिया गया था।
- (d)आई.आई.टी., कानपुर — गलत — आई.आई.टी. कानपुर को इस परिवर्तन पायलट का श्रेय नहीं दिया गया था।
अवधारणा
PSA (प्रेशर स्विंग एड्ज़ॉर्प्शन) संयंत्र सामान्य वायु से गैसों को 'आणविक चालनी' (मॉलिक्यूलर सीव) नामक अवशोषकों की सहायता से अलग करते हैं। एक नाइट्रोजन PSA संयंत्र कार्बन आणविक चालनी का उपयोग करता है (जो ऑक्सीजन को रोक देती है और नाइट्रोजन छोड़ती है); ज़ीओलाइट आणविक चालनी लगाने से वही स्किड नाइट्रोजन को अवशोषित कर ऑक्सीजन देने लगता है। इसका अर्थ था कि निष्क्रिय पड़े औद्योगिक नाइट्रोजन संयंत्रों को कमी के दौरान चिकित्सीय ऑक्सीजन बनाने के लिए पुनः उपयोग में लाया जा सकता था।
जाल यह है कि चार प्रमुख संस्थानों में से किसी एक को नवाचार का श्रेय देना है। इस विशिष्ट विचार को — नाइट्रोजन जनरेटर को आणविक चालनी बदलकर ऑक्सीजन जनरेटर में बदलना — अप्रैल 2021 में आई.आई.टी. बम्बई से जोड़ें।
मुख्य तथ्य
- आई.आई.टी. बम्बई (अप्रैल 2021) ने आणविक चालनी बदलकर PSA नाइट्रोजन संयंत्र को ऑक्सीजन संयंत्र में बदला।
- यह बदलाव कार्बन आणविक चालनी से ज़ीओलाइट आणविक चालनी में हुआ, जिससे लगभग 93-96% ऑक्सीजन शुद्धता मिली।
- PSA (प्रेशर स्विंग एड्ज़ॉर्प्शन) भिन्न दबावों पर अवशोषकों की सहायता से वायु से गैसें अलग करता है।
- इस परियोजना (प्रोफेसर मिलिंद अत्रे) का उद्देश्य COVID की दूसरी लहर के दौरान चिकित्सीय-ऑक्सीजन की कमी को कम करना था।

आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- परिवर्तन का श्रेय गलत आई.आई.टी. या IISc को देना
- PSA को क्रायोजेनिक (भिन्नात्मक आसवन) ऑक्सीजन उत्पादन से भ्रमित करना
करेंट-अफेयर्स/विज्ञान-प्रौद्योगिकी स्मृति किसी संस्थान को किसी विशिष्ट COVID-काल के नवाचार से जोड़ती है, या PSA ऑक्सीजन संयंत्रों के पीछे के सिद्धांत को पूछती है।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
चिकित्सीय ऑक्सीजन उत्पन्न करने के लिए प्रयुक्त PSA संयंत्र किस सिद्धांत पर कार्य करते हैं:
- (a)भिन्नात्मक आसवन
- (b)प्रेशर स्विंग एड्ज़ॉर्प्शन
- (c)विद्युत-अपघटन
- (d)रिवर्स ऑस्मोसिस
उत्तर(b) प्रेशर स्विंग एड्ज़ॉर्प्शन — एक अवशोषक (ज़ीओलाइट) चालनी की सहायता से वायु से ऑक्सीजन अलग करना। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
आई.आई.टी. बम्बई के नाइट्रोजन-जनरेटर-से-ऑक्सीजन-जनरेटर परिवर्तन में मुख्य बदलाव किसमें हुआ था:
- (a)संपीडक (कंप्रेसर)
- (b)आणविक चालनी (अवशोषक)
- (c)कूलिंग टावर
- (d)भंडारण टैंक
उत्तर(b) आणविक चालनी — कार्बन चालनी को ज़ीओलाइट चालनी से बदलने पर संयंत्र ऑक्सीजन देने लगता है।