राइबोफ्लेविन की कमी से निम्न में से कौन-सा रोग होता है ?
- (a)पेलाग्रा
- (b)स्कर्वी
- (c)बेरी बेरी
- (d)चेईलोसिस
सही उत्तर — (d) चेईलोसिस। राइबोफ्लेविन (विटामिन B2) की कमी (एरिबोफ्लेविनोसिस) से क्लासिक रूप से चेईलोसिस होता है — मुँह के कोनों और होंठों पर दरारें व चिराव (कोणीय स्टोमेटाइटिस) — साथ ही ग्लॉसाइटिस (सूजी हुई, गहरे लाल रंग की जीभ) और सेबोरिक डर्मेटाइटिस भी होता है। अतः राइबोफ्लेविन के साथ जुड़ा कमी-रोग चेईलोसिस है।
- (a)पेलाग्रा — पेलाग्रा नियासिन (विटामिन B3 / निकोटिनिक अम्ल) की कमी से होता है, जिसकी पहचान '3 D' से होती है — डर्मेटाइटिस, डायरिया और डिमेंशिया — राइबोफ्लेविन की कमी से नहीं।
- (b)स्कर्वी — स्कर्वी विटामिन C (एस्कॉर्बिक अम्ल) की कमी से होता है — मसूड़ों से खून आना/मसूड़े स्पंजी होना, घाव भरने में देरी और जोड़ों में सूजन — यह एक भिन्न विटामिन है।
- (c)बेरी बेरी — बेरी-बेरी थायमिन (विटामिन B1) की कमी से होता है, जिससे तंत्रिका-सम्बन्धी (dry) और हृदय-सम्बन्धी (wet) लक्षण उत्पन्न होते हैं — राइबोफ्लेविन की कमी से नहीं।
प्रत्येक जल-घुलनशील B-कॉम्प्लेक्स विटामिन और विटामिन C का अपना विशिष्ट कमी-रोग होता है। राइबोफ्लेविन (B2) → चेईलोसिस / कोणीय स्टोमेटाइटिस / ग्लॉसाइटिस; थायमिन (B1) → बेरी-बेरी; नियासिन (B3) → पेलाग्रा; एस्कॉर्बिक अम्ल (C) → स्कर्वी। प्रत्येक विटामिन को उसके कमी-विकार से मिलाना एक मानक विज्ञान स्मरण प्रश्न है।
सभी चार विकल्प वास्तविक कमी-रोग हैं, इसलिए यह प्रश्न विशुद्ध रूप से विटामिन↔रोग युग्मन पर आधारित है। राइबोफ्लेविन/B2 → चेईलोसिस को स्थिर करें, फिर B1 (बेरी-बेरी), B3 (पेलाग्रा) और C (स्कर्वी) वाले युग्मों को हटा दें।
- राइबोफ्लेविन = विटामिन B2; इसकी कमी (एरिबोफ्लेविनोसिस) → चेईलोसिस, कोणीय स्टोमेटाइटिस, ग्लॉसाइटिस
- थायमिन (विटामिन B1) की कमी → बेरी-बेरी
- नियासिन (विटामिन B3) की कमी → पेलाग्रा ('3 D')
- विटामिन C (एस्कॉर्बिक अम्ल) की कमी → स्कर्वी
राइबोफ्लेविन (B2) की कमी → चेईलोसिस; तीनों भ्रामक विकल्प B1, B3 और विटामिन C से जुड़े हैं।
- B-विटामिनों को गड्ड-मड्ड करना — B1 (बेरी-बेरी) बनाम B2 (चेईलोसिस) बनाम B3 (पेलाग्रा)
- यह मान लेना कि मुँह या त्वचा का कोई भी घाव स्कर्वी का संकेत है
प्रत्यक्ष विटामिन↔कमी-रोग सुमेलन के रूप में, या 'Match List' / 'सही सुमेलित युग्म' प्रश्न के रूप में।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. लैक्रिमल ग्रंथि (अश्रु ग्रंथि) का कार्य न करना विटामिन A की कमी का एक महत्त्वपूर्ण लक्षण है। 2. विटामिन B1 की कमी से अपच और हृदय का बढ़ना हो सकता है। 3. विटामिन C की कमी से मांसपेशियों में दर्द हो सकता है। 4. विटामिन D की कमी से मूत्र में Ca++ की हानि बढ़ जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं ?
- (a) 1 और 2
- (b) 2, 3 और 4
- (c) 1, 3 और 4
- (d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर(a) 1 और 2
वही अवधारणा — विटामिन कमियों (A, B1, C, D) को उनके नैदानिक प्रभावों से जोड़ना; राइबोफ्लेविन (B2) भी इसी विटामिन-कमी ढाँचे का हिस्सा है।
भारत में आज उपचारात्मक कार्यवाही हेतु सर्वोच्च प्राथमिकता किस पोषण-सम्बन्धी कमी स्थिति को दी जानी चाहिए ?
- (a) स्कर्वी
- (b) रिकेट्स
- (c) ज़ीरोफ्थाल्मिया
- (d) पेलाग्रा
उत्तर(c) ज़ीरोफ्थाल्मिया
वही अवधारणा — एक विटामिन/पोषण-कमी रोग (उत्तर ज़ीरोफ्थाल्मिया = विटामिन A की कमी), राइबोफ्लेविन→चेईलोसिस जैसी ही 'कमी से रोग' विषयवस्तु।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किस विटामिन की कमी से पेलाग्रा होता है ?
- (a)विटामिन B1
- (b)विटामिन B2
- (c)विटामिन B3 (नियासिन)
- (d)विटामिन C
उत्तर(c) विटामिन B3 (नियासिन) — पेलाग्रा में '3 D' दिखते हैं: डर्मेटाइटिस, डायरिया, डिमेंशिया।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
रतौंधी और ज़ीरोफ्थाल्मिया किस विटामिन की कमी से होते हैं ?
- (a)विटामिन A
- (b)विटामिन C
- (c)विटामिन K
- (d)विटामिन B12
उत्तर(a) विटामिन A — यह दृष्टि-वर्णक रोडोप्सिन और नेत्र-स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।