नीचे दो कथन दिये गये हैं, जिनमें से एक को कथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है : कथन (A) : भारतीय राजनीतिक व्यवस्था की प्रकृति में 'निरन्तरता एवं परिवर्तन' के तत्व मूर्त रूप में पाये जाते हैं । कारण (R) : भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में निम्न राजनीतिक कार्यशैलियों जैसे-आधुनिक शैली, परम्परागत शैली तथा संत शैली के तत्व समाहित है । नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए । कूट :
- (a)(A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या करता है
- (b)(A) और (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
- (c)(A) सही है परन्तु (R) गलत है
- (d)(A) गलत है परन्तु (R) सही है
सही उत्तर — (a) दोनों कथन सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है। भारतीय राजनीति के 'आधुनिक, परम्परागत और संत' त्रयी विवरण को ब्रिटिश राजनीतिशास्त्री डब्ल्यू.एच. मॉरिस-जोन्स (The Government and Politics of India, 1964) ने दिया था, जिन्होंने तर्क दिया कि भारतीय राजनीति तीन सह-अस्तित्व वाली 'शैलियों' या 'भाषाओं' में संचालित होती है: आधुनिक (संवैधानिक, धर्मनिरपेक्ष, नौकरशाही-संसदीय), परम्परागत (जाति, नातेदारी, क्षेत्र, धर्म), और संत शैली (नैतिक, गांधीवादी विवेक-आधारित अपील)। चूँकि आधुनिक शैली परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करती है जबकि परम्परागत और संत शैलियाँ निरन्तरता वहन करती हैं, तीनों की एक साथ उपस्थिति ही ठीक वह कारण है कि व्यवस्था 'निरन्तरता एवं परिवर्तन' मूर्त रूप में दर्शाती है — इसलिए (R), (A) की प्रत्यक्ष व्याख्या करता है, न कि कोई असम्बद्ध तथ्य।
- (b)(A) और (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है — गलत — (R) कोई असम्बद्ध तथ्य नहीं है। आधुनिक शैली (परिवर्तन) का परम्परागत और संत शैलियों (निरन्तरता) के साथ मिश्रण ही ठीक वह है जो (A) के 'निरन्तरता एवं परिवर्तन' को उत्पन्न करता है, इसलिए (R), (A) की व्याख्या करता है।
- (c)(A) सही है परन्तु (R) गलत है — गलत — (R) सत्य है: भारतीय राजनीतिक शैलियों का आधुनिक-परम्परागत-संत वर्गीकरण एक सुस्थापित ढाँचा है (मॉरिस-जोन्स), कोई असत्य कथन नहीं।
- (d)(A) गलत है परन्तु (R) सही है — गलत — (A) सत्य है: भारतीय राजनीतिक व्यवस्था प्रत्यक्षतः विरासत में मिली संस्थाओं और सामाजिक स्वरूपों (निरन्तरता) को एक आधुनिक उदार-लोकतान्त्रिक-संवैधानिक व्यवस्था (परिवर्तन) के साथ जोड़ती है।
भारतीय राजनीतिक समाजशास्त्र देश की राजनीति को एक स्तरित व्यवस्था के रूप में वर्णित करता है जिसमें पूर्व-आधुनिक सामाजिक यथार्थ और एक आधुनिक उदार-लोकतान्त्रिक संविधान साथ-साथ कार्य करते हैं। डब्ल्यू.एच. मॉरिस-जोन्स ने इसे राजनीति की तीन 'शैलियों' — आधुनिक, परम्परागत और संत — से पकड़ा, जिन्हें नेता तथा मतदाता एक साथ प्रयोग करते हैं। यह सह-अस्तित्व ही वह है जिसका अर्थ विद्वान तब लेते हैं जब वे कहते हैं कि भारतीय राजनीतिक व्यवस्था 'निरन्तरता' (पुरानी संस्थाएँ, जातियाँ, नैतिक-गांधीवादी अपीलें) और 'परिवर्तन' (चुनाव, धर्मनिरपेक्ष विधि, नौकरशाही) दोनों दर्शाती है।
एक कथन-कारण प्रश्न में आपको यह तय करना होता है कि न केवल दोनों भाग सही हैं या नहीं, बल्कि यह भी कि क्या कारण, कथन का हेतु है। यहाँ तीन-शैली विवरण ठीक वही तन्त्र है जो 'निरन्तरता एवं परिवर्तन' के पीछे है, इसलिए सबसे प्रबल विकल्प (a) चुनें, न कि 'दोनों सही परन्तु असम्बद्ध' का जाल (b)।
- डब्ल्यू.एच. मॉरिस-जोन्स (1964) ने भारतीय राजनीति की तीन शैलियों का नामकरण किया: आधुनिक, परम्परागत और संत
- आधुनिक शैली = संवैधानिक, धर्मनिरपेक्ष, संसदीय-नौकरशाही व्यवस्था (परिवर्तन का तत्व)
- परम्परागत शैली = जाति, नातेदारी, क्षेत्र और धर्म; संत शैली = गांधीवादी नैतिक अपील (निरन्तरता का तत्व)
- इन शैलियों का सह-अस्तित्व भारतीय राजनीति में 'निरन्तरता एवं परिवर्तन' की मानक व्याख्या है

- (b) चुनना — (R) को सत्य-परन्तु-असम्बद्ध तथ्य मान लेना, जबकि वास्तव में यह (A) की व्याख्या है
- यह मान लेना कि 'संत शैली' मुद्रण-त्रुटि है; यह मॉरिस-जोन्स की मान्यताप्राप्त 'संत शैली' है
UPPSC/UPSC इसे कथन-कारण या एक श्रेय-निर्धारण प्रश्न ('भारतीय राजनीति को आधुनिक, परम्परागत और संत शैलियों में किसने वर्णित किया?') के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारतीय राजनीति को 'आधुनिक, परम्परागत और संत' शैलियों के मिश्रण के रूप में वर्णित करना किससे सम्बद्ध है ?
- (a)डब्ल्यू.एच. मॉरिस-जोन्स
- (b)रजनी कोठारी
- (c)लुई ड्यूमों
- (d)एम.एन. श्रीनिवास
उत्तर(a) डब्ल्यू.एच. मॉरिस-जोन्स — The Government and Politics of India (1964) में।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मॉरिस-जोन्स के ढाँचे में, भारतीय राजनीति की कौन-सी शैली मुख्यतः एक आधुनिक लोकतान्त्रिक व्यवस्था के 'परिवर्तन' तत्व का प्रतिनिधित्व करती है ?
- (a)आधुनिक शैली
- (b)परम्परागत शैली
- (c)संत शैली
- (d)सामन्ती शैली
उत्तर(a) आधुनिक शैली — संवैधानिक, धर्मनिरपेक्ष और संसदीय-नौकरशाही राजनीति।