निम्न में से कौन-सा अभिलेख विश्व के प्रथम विज्ञापन के तौर पर जाना जाता है ?
- (a)दशपुर अभिलेख
- (b)सोहगरा अभिलेख
- (c)सुपिया अभिलेख
- (d)एरण अभिलेख
सही उत्तर — (a) दशपुर अभिलेख। दशपुर (मंदसौर) अभिलेख रेशम-बुनकरों की श्रेणी (गिल्ड) का है — जो कुमारगुप्त और स्थानीय शासक बंधुवर्मन के काल में स्थापित हुआ तथा बाद में 473 ई. में पुनः उत्कीर्ण किया गया — यह अभिलेख दर्ज करता है कि श्रेणी ने अपनी संचित संपत्ति से दशपुर में एक सूर्य मंदिर बनवाया (और बाद में उसका जीर्णोद्धार कराया), तथा श्रेणी के कौशल व समृद्धि की गर्व से घोषणा करता है। चूँकि यह मूलतः एक सार्वजनिक अभिलेख है जो समूह की अपनी शिल्पकुशलता व सफलता की प्रशंसा करता है, इसे लोकप्रिय रूप से विश्व के आरंभिक ज्ञात 'विज्ञापनों' में से एक माना जाता है।
- (b)सोहगरा अभिलेख — गलत — सोहगौरा ताम्रपत्र अभिलेख (गोरखपुर, उत्तर प्रदेश; मौर्यकालीन) अकाल-राहत उपायों — सार्वजनिक वितरण हेतु अन्न-भंडार (कोष्ठागार) — को दर्ज करता है, विज्ञापन को नहीं।
- (c)सुपिया अभिलेख — गलत — सुपिया (शहडोल, मध्य प्रदेश) स्तंभ अभिलेख एक गुप्तकालीन राजवंशीय अभिलेख है, न कि आत्म-प्रचारक श्रेणी-अभिलेख।
- (d)एरण अभिलेख — गलत — एरण अभिलेख (सागर, मध्य प्रदेश) गुप्तकालीन राजनीतिक घटनाओं को दर्ज करते हैं, जिनमें सती प्रथा का सबसे प्रारंभिक ज्ञात अभिलेखीय प्रमाण शामिल है; ये विज्ञापन नहीं हैं।
दशपुर/मंदसौर अभिलेख प्रवासी रेशम-बुनकरों की एक श्रेणी का पत्थर पर उत्कीर्ण अभिलेख है, जो दशपुर (मंदसौर) में बस गई, समृद्ध हुई, और सार्वजनिक चंदा माँगे बिना — पूरी तरह श्रेणी की अपनी संपत्ति से — वहाँ एक सूर्य मंदिर बनवाया। यह अभिलेख सार्वजनिक रूप से श्रेणी की शिल्पकुशलता व सफलता का बखान करता है, इसीलिए परीक्षा-स्रोत इसे 'विज्ञापन' का आरंभिक ज्ञात उदाहरण बताते हैं — एक समूह द्वारा अपनी उत्कृष्टता का सार्वजनिक अभिलेख में प्रचार।
MPPSC इसे मध्य प्रदेश क्षेत्र के तीन अन्य अभिलेखों (सोहगरा/सोहगौरा, सुपिया, एरण) के साथ जोड़ता है, जो सभी वास्तविक प्राचीन अभिलेख हैं परंतु बहुत भिन्न उद्देश्यों (अकाल-राहत, राजवंशीय अभिलेख, सती प्रमाण) की पूर्ति करते हैं — जाल यह मान लेना है कि 'प्राचीन अभिलेख' का अर्थ स्वतः ही 'विज्ञापन' है।
- दशपुर/मंदसौर अभिलेख: रेशम-बुनकरों की श्रेणी द्वारा दशपुर में स्व-वित्तपोषित सूर्य मंदिर के निर्माण को दर्ज करता है
- कुमारगुप्त और बंधुवर्मन के काल में स्थापित; बाद में मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और यह घटना पुनः उत्कीर्ण की गई (473 ई.)
- लोकप्रिय रूप से विश्व/भारत का ज्ञात प्रथम विज्ञापन माना जाता है — एक श्रेणी द्वारा अपनी समृद्धि व कौशल का प्रचार
- अभिलेख के कवि वात्सभट्टि थे — MPPSC का एक सामान्य जाल उन्हें बहुत बाद के नाटककार भवभूति से गड्डमड्ड कर देता है
- सोहगौरा (उत्तर प्रदेश), सुपिया व एरण (मध्य प्रदेश) अभिलेख प्राचीन तो हैं परंतु भिन्न उद्देश्यों (अकाल-राहत, राजवंशीय/सती अभिलेख) की पूर्ति करते हैं

- यह मान लेना कि किसी राजा या समूह की प्रशंसा करने वाला कोई भी अभिलेख 'विज्ञापन' गिना जाता है — दशपुर अभिलेख को विशेष रूप से इसलिए यह श्रेय दिया जाता है क्योंकि यह श्रेणी की आत्म-प्रशस्ति है, राजकीय स्तुति नहीं
- दशपुर/मंदसौर (मालवा, मध्य प्रदेश) को एरण/सुपिया से गड्डमड्ड करना, जो असंबद्ध विषयवस्तु वाले अलग मध्य प्रदेश स्थल हैं
MPPSC ने 2024 में दशपुर अभिलेख की विषयवस्तु को पुनः (कथन-आधारित प्रश्न में) परखा है — इसे 'प्रथम विज्ञापन' के रूप में तथा इसके तथ्यात्मक विवरण (कुमारगुप्त/बंधुवर्मन, कवि वात्सभट्टि, पश्चिमपुर उपनाम, रेशम-बुनकर) दोनों रूपों में जानें।
कुमारगुप्त और बंधुवर्मन के दशपुर अभिलेख के संबंध में कौन-सा कथन असत्य है?
- (a) इस अभिलेख में रेशम बुनकरों के एक समूह द्वारा सूर्य मंदिर के निर्माण का उल्लेख है।
- (b) यह भारत में विज्ञापन परंपरा का सबसे पुराना उदाहरण है।
- (c) इस अभिलेख में दशपुर को पश्चिमपुर भी कहा गया है।
- (d) यह अभिलेख भवभूति द्वारा रचा गया था।
उत्तर(d) असत्य कथन है — यह अभिलेख वास्तव में कवि वात्सभट्टि द्वारा रचा गया था, भवभूति द्वारा नहीं।
वही अभिलेख (दशपुर/मंदसौर) MPPSC द्वारा 2024 में पुनः परखा गया, जिसमें इसकी 'प्राचीनतम विज्ञापन' पहचान की पुष्टि करते हुए गहरे तथ्यात्मक विवरणों की जाँच की गई।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
रेशम-बुनकरों की श्रेणी का दशपुर (मंदसौर) अभिलेख किस प्राचीन भारतीय राजवंश से संबंधित है?
- (a)मौर्य
- (b)गुप्त
- (c)कुषाण
- (d)चोल
उत्तर(b) गुप्त — यह अभिलेख गुप्त काल का है, कुमारगुप्त और स्थानीय शासक बंधुवर्मन के अधीन।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत के सबसे प्राचीन अभिलेखों में से एक, सोहगौरा ताम्रपत्र अभिलेख, मुख्यतः किसे दर्ज करता है?
- (a)किसी श्रेणी की आत्म-प्रशंसा
- (b)अकाल-राहत हेतु अन्न-भंडार
- (c)किसी राजा की सैन्य विजयें
- (d)एक सती घटना
उत्तर(b) अकाल-राहत हेतु अन्न-भंडार (कोष्ठागार) — एक मौर्यकालीन प्रशासनिक अभिलेख।