भारत शासन अधिनियम, 1935 के तहत प्रस्तावित संघीय प्रणाली थी
- (a)अखिल भारतीय संघ
- (b)भारत संघ
- (c)संयुक्त भारत
- (d)भारतीय परिसंघ
सही उत्तर — (a) अखिल भारतीय संघ। भारत शासन अधिनियम, 1935 ने ब्रिटिश भारत के ग्यारह गवर्नर-प्रांतों को उन देशी रियासतों के साथ जोड़कर, जो सम्मिलित होना चुनतीं, एक एकल 'अखिल भारतीय संघ' बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसका शासन एक द्विसदनीय संघीय विधानमंडल तथा संघ, प्रांतीय व समवर्ती सूचियों में विषयों के विभाजन द्वारा होना था। यह संघीय केंद्र वास्तव में कभी अस्तित्व में नहीं आया — बहुत कम रियासतें सम्मिलित हुईं — किंतु अधिनियम का प्रांतीय भाग (प्रांतीय स्वायत्तता) 1937 में प्रभावी हुआ।
- (b)भारत संघ — अधिनियम की अपनी योजना का नाम नहीं — यह एक प्रशंसनीय प्रतीत होने वाला किंतु गढ़ा गया विकल्प है; स्वयं अधिनियम 'अखिल भारतीय संघ' शब्द का प्रयोग करता है।
- (c)संयुक्त भारत — 1935 के अधिनियम में यह शब्द कहीं भी प्रयुक्त नहीं है; यह बाद की राजनीतिक बयानबाज़ी की प्रतिध्वनि है, अधिनियम की संघीय संरचना की नहीं।
- (d)भारतीय परिसंघ — केवल नाम में ही नहीं, प्रकृति में भी गलत — 1935 की योजना शक्तियों के संवैधानिक रूप से परिभाषित विभाजन वाला एक संघ (federation) था, न कि संप्रभु इकाइयों का ढीला परिसंघ (confederation)।
भारत शासन अधिनियम, 1935 सबसे लंबा तथा सबसे विस्तृत ब्रिटिश भारतीय क़ानून था, और भारत के अपने 1950 के संविधान का प्रत्यक्ष संरचनात्मक प्रारूप (template) था। इसके भाग II ने ब्रिटिश भारत के प्रांतों को उन देशी रियासतों के साथ जोड़कर एक 'अखिल भारतीय संघ' बनाने का प्रस्ताव रखा, जो सम्मिलित होना चुनतीं — किंतु सम्मिलन के लिए रियासती जनसंख्या/सीटों के कम-से-कम आधे हिस्से को कवर करने वाली रियासतों की आवश्यकता थी, जो सीमा कभी पूरी नहीं हुई, इसलिए अधिनियम में वर्णित संघीय केंद्र वास्तव में कभी स्थापित नहीं हुआ।
जाल यह मान लेना है कि 'संघ (federation)' और 'प्रांतीय स्वायत्तता' दोनों एक साथ प्रभावी हुए। केवल प्रांतीय स्वायत्तता आरंभ हुई (1937 में, निर्वाचित प्रांतीय मंत्रिमंडलों के साथ); केंद्र में अखिल भारतीय संघ कागज़ पर ही रह गया।
- भारत शासन अधिनियम, 1935 — ब्रिटिश भारतीय प्रांतों + सम्मिलित होने वाली रियासतों के 'अखिल भारतीय संघ' का प्रस्ताव
- संघीय (केंद्र) भाग कभी प्रभावी नहीं हुआ; प्रांतीय स्वायत्तता 1937 से प्रभावी हुई
- अधिनियम ने संघीय न्यायालय (1937) भी स्थापित किया और प्रांतों में द्वैध शासन (dyarchy) समाप्त किया (इसके बजाय केंद्र में इसका एक रूप लागू किया)
- व्यापक रूप से 1950 के संविधान का 'ढाँचा (skeleton)' कहा जाता है — इसकी अधिकांश संरचना और यहाँ तक कि भाषा भी आगे ले जाई गई
1935 के अधिनियम का अपना पाठ इस योजना को 'अखिल भारतीय संघ' नाम देता है — यह केंद्र में वास्तव में कभी प्रभावी नहीं हुआ।
- यह मान लेना कि अखिल भारतीय संघ वास्तव में कार्यरत था — यह कभी प्रभावी नहीं हुआ
- 1935 के अधिनियम द्वारा प्रांतीय स्तर पर द्वैध शासन की समाप्ति को 1919 के अधिनियम द्वारा द्वैध शासन की शुरुआत के साथ गड्डमड्ड करना
प्रायः प्रत्यक्ष तथ्य/नाम आधारित प्रश्न, या 'कथनों पर विचार कीजिए' प्रकार का प्रश्न जो यह जाँचता है कि 1935 के अधिनियम की कौन-सी विशेषताएँ सत्य हैं (प्रांतीय स्वायत्तता, संघीय न्यायालय, अखिल भारतीय संघ, गवर्नर-जनरल को अवशिष्ट शक्तियाँ)।
भारत शासन अधिनियम, 1935 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसने ब्रिटिश भारतीय प्रांतों तथा देशी रियासतों के संघ पर आधारित एक अखिल भारतीय संघ की स्थापना का प्रावधान किया। 2. रक्षा तथा विदेश मामले संघीय विधानमंडल के नियंत्रण में रखे गए थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर(a) केवल 1 — अधिनियम ने अखिल भारतीय संघ का प्रस्ताव अवश्य रखा, किंतु रक्षा व विदेश मामले संघीय विधानमंडल को नहीं, गवर्नर-जनरल को आरक्षित थे।
वही तथ्य सीधे परखा गया — 1935 के अधिनियम का प्रस्तावित 'अखिल भारतीय संघ'।
निम्नलिखित में से कौन-सा भारत शासन अधिनियम, 1935 की विशेषता नहीं थी: (1) इसने प्रांतीय स्वायत्तता की शुरुआत को चिह्नित किया। (2) अधिनियम ने अखिल भारतीय संघ का प्रावधान किया। (3) इसने प्रांतीय स्तर पर द्वैध शासन समाप्त किया और केंद्र में इसे प्रस्तुत किया। (4) अवशिष्ट विषय प्रांतीय विधानमंडलों को आवंटित किए गए थे।
- (a) इसने प्रांतीय स्वायत्तता की शुरुआत को चिह्नित किया
- (b) अधिनियम ने अखिल भारतीय संघ का प्रावधान किया
- (c) इसने प्रांतीय स्तर पर द्वैध शासन समाप्त किया और केंद्र में इसे प्रस्तुत किया
- (d) अवशिष्ट विषय प्रांतीय विधानमंडलों को आवंटित किए गए थे
उत्तर(d) अवशिष्ट विषय प्रांतीय विधानमंडलों को आवंटित किए गए थे — असत्य; अवशिष्ट शक्तियाँ वास्तव में गवर्नर-जनरल में निहित थीं, प्रांतीय विधानमंडलों में नहीं।
वही अधिनियम, वही 'अखिल भारतीय संघ' विशेषता, विशेषता-पहचान प्रारूप (RPSC 2016) के माध्यम से परखी गई।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत शासन अधिनियम, 1935 ने प्रांतीय स्वायत्तता किस वर्ष से प्रभावी की?
- (a)1935
- (b)1937
- (c)1919
- (d)1947
उत्तर(b) 1937 — प्रांतीय स्वायत्तता 1937 में चुनावों व कांग्रेस मंत्रिमंडलों के साथ आरंभ हुई, यद्यपि अधिनियम 1935 में पारित हुआ था।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत शासन अधिनियम, 1935 के तहत अवशिष्ट शक्तियाँ (तीनों सूचियों में से किसी में भी सूचीबद्ध न किए गए विषय) किसमें निहित थीं?
- (a)संघीय विधानमंडल
- (b)गवर्नर-जनरल
- (c)प्रांतीय विधानमंडल
- (d)प्रांतीय गवर्नर
उत्तर(b) गवर्नर-जनरल — वह सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा अवशिष्ट विधि-निर्माण संघीय या किसी प्रांतीय विधानमंडल को प्रत्यायोजित कर सकता था, किंतु अवशिष्ट शक्ति स्वयं उसी में निहित थी।