नवरोज़’ (Nowruz) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- (a)यह एक चंद्र आधारित उत्सव है, जिसे केवल हिमालयी क्षेत्र में बौद्ध समुदाय द्वारा मनाया जाता है।
- (b)यह दक्षिण भारत में फसल कटाई के मौसम की शुरुआत को चिह्नित करता है और इसे सूर्य देवता को समर्पित किया गया है।
- (c)यह एक मानसून उत्सव है, जो मुगल दरबारों में अच्छाई की बुराई पर विजय की याद में मनाया जाता है।
- (d)यह फारसी नववर्ष है, जिसे वसंत विषुव पर मनाया जाता है, और भारत में इसे ग़ियासुद्दीन बलबन द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D. नवरोज़ (Nowruz) फ़ारसी नववर्ष है, जो वसंत विषुव पर, 21 मार्च (या 20 मार्च) को, वसंत की शुरुआत का प्रतीक है।
भारत में इसके आने का श्रेय दिल्ली सल्तनत का इतिहास ग़ियासुद्दीन बलबन (शासन 1266–1287) को देता है।
उसने अपना दरबार फ़ारसी राजत्व के नमूने पर बनाया, और सिजदा (साष्टांग प्रणाम) और पैबोस (सुल्तान के पैर चूमना) जैसी दरबारी रीतियाँ भी शुरू कीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)यह एक चंद्र आधारित उत्सव है, जिसे केवल हिमालयी क्षेत्र में बौद्ध समुदाय द्वारा मनाया जाता है। — नवरोज़ वसंत विषुव से तय होता है, जो एक सौर घटना है, इसलिए यह चंद्र आधारित उत्सव नहीं है। इसकी जड़ें फ़ारसी हैं और, संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 3,000 वर्ष से भी पुरानी हैं, हिमालयी बौद्ध धर्म में नहीं।
- (b)यह दक्षिण भारत में फसल कटाई के मौसम की शुरुआत को चिह्नित करता है और इसे सूर्य देवता को समर्पित किया गया है। — यह सूर्य देवता को समर्पित किसी फसल उत्सव का वर्णन है, जैसे तमिलनाडु का पोंगल। नवरोज़ नववर्ष का उत्सव है, जो वसंत के आगमन का प्रतीक है।
- (c)यह एक मानसून उत्सव है, जो मुगल दरबारों में अच्छाई की बुराई पर विजय की याद में मनाया जाता है। — नवरोज़ मार्च में वसंत विषुव पर पड़ता है, मानसून में नहीं। इसे शुरू करने का श्रेय दिल्ली सल्तनत के बलबन को दिया जाता है, मुगलों से बहुत पहले, इसलिए यह मुगल दरबारों में शुरू नहीं हुआ।
अवधारणा
नवरोज़ 21 मार्च (या 20 मार्च) को, वसंत विषुव पर मनाया जाता है, और संयुक्त राष्ट्र इसकी जड़ें 3,000 वर्ष से भी पुरानी बताता है।
2010 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 मार्च को अंतरराष्ट्रीय नवरोज़ दिवस घोषित किया।
भारतीय इतिहास में यह दिल्ली सल्तनत से जुड़ा है। इसे शुरू करने का श्रेय बलबन को है, उसके फ़ारसी ढंग के दरबार के हिस्से के रूप में।
वहाँ उसने ज़िल्ल-ए-इलाही (ईश्वर की छाया) की उपाधि ली, और सिजदा व पैबोस अनिवार्य किए।
बलबन से जोड़ना पाठ्यपुस्तकों का मानक श्रेय है। भारत के पारसी, यानी वे ज़रथुस्त्री जिनके पूर्वज फ़ारस से आए थे, भी नवरोज़ मनाते हैं।
मुख्य तथ्य
- नवरोज़ 21 मार्च (या 20 मार्च) को, वसंत विषुव पर पड़ता है।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2010 में प्रस्ताव A/RES/64/253 द्वारा 21 मार्च को अंतरराष्ट्रीय नवरोज़ दिवस घोषित किया।
- यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में नवरोज़ के अंकन में भारत भी भागीदार देशों (States Parties) में है।
- बलबन (शासन 1266–1287) ने सिजदा और पैबोस जैसी फ़ारसी दरबारी रीतियाँ शुरू कीं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- फ़ारसी स्वरूप के कारण नवरोज़ को मुगलों से जोड़ देना, जबकि इसका श्रेय दिल्ली सल्तनत के बलबन को जाता है।
यहाँ त्योहार को उसके मौसम, उसके उद्गम और उससे जुड़े सुल्तान के ज़रिए जाँचा गया है। बलबन के सुधार 10 Sep 2024, 16:00, GA Q.18 में भी आते हैं, जो पूछता है कि उसने किस विभाग का पुनर्गठन किया (दीवान-ए-अर्ज़)।
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