निम्नलिखित में से कौन-सा 1991 की नई आर्थिक नीति (NEP) के अंतर्गत 'उदारीकरण' का एक प्राथमिक उद्देश्य था?
- (a)बड़े व्यापारिक घरानों के विस्तार को रोकने के लिए MRTP अधिनियम को सुदृढ़ करना।
- (b)उन उद्योगों की सूची का विस्तार करना जो केवल सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित हैं।
- (c)घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए आयात पर अधिकतम सीमा शुल्क बढ़ाना।
- (d)अधिकांश उद्योगों के लिए औद्योगिक लाइसेंसिंग को समाप्त करना ताकि निजी प्रवेश को प्रोत्साहित किया जा सके।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D. NCERT की कक्षा 11 की पुस्तक भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास (Indian Economic Development) कहती है कि 1991 में शुरू हुए सुधारों ने लगभग सभी उद्योगों के लिए औद्योगिक लाइसेंसिंग समाप्त कर दी।
पुस्तक जो अपवाद गिनाती है, वे हैं: शराब, सिगरेट, खतरनाक रसायन, औद्योगिक विस्फोटक, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस, और दवाएँ व फ़ार्मास्युटिकल्स।
उद्योग लगाने को सरकारी अनुमति से मुक्त करना ही उदारीकरण का अर्थ था, इसलिए विकल्प (d) उसका उद्देश्य बताता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)बड़े व्यापारिक घरानों के विस्तार को रोकने के लिए MRTP अधिनियम को सुदृढ़ करना। — उल्टा है। 1991 के सुधारों ने MRTP कंपनी की अवधारणा ही खत्म कर दी, जिसके तहत एक तय सीमा से अधिक परिसंपत्ति वाली फर्में सरकारी निगरानी में आती थीं। बाद में MRTP अधिनियम की जगह प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 (Competition Act) आया।
- (b)उन उद्योगों की सूची का विस्तार करना जो केवल सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित हैं। — उल्टा है। NCERT के अनुसार अब सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित उद्योग केवल परमाणु ऊर्जा उत्पादन का एक हिस्सा और रेलवे की कुछ मुख्य गतिविधियाँ हैं। सुधारों ने आरक्षित सूची छोटी की, बढ़ाई नहीं।
- (c)घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए आयात पर अधिकतम सीमा शुल्क बढ़ाना। — उल्टा है। NCERT व्यापार सुधारों के उद्देश्यों में प्रशुल्क (tariff) दरों में कमी गिनाती है। बहुत ऊँचे प्रशुल्क और आयात कोटा 1991 से पहले घरेलू उद्योग को बचाने का तरीका थे।
अवधारणा
NCERT 1991 के सुधारों को तीन शीर्षकों में रखती है: उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण।
उदारीकरण का अर्थ था वे नियंत्रण हटाना, जिनमें हर उद्यमी को फर्म शुरू करने, बंद करने या कितना उत्पादन करना है, यह तय करने के लिए सरकारी अनुमति चाहिए थी।
इससे अधिकांश औद्योगिक लाइसेंसिंग खत्म हुई, सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित उद्योगों की सूची बहुत छोटी हो गई, लघु उद्योगों के लिए आरक्षित कई वस्तुएँ आरक्षण से बाहर हुईं, और प्रशुल्क घटे।
तीनों गलत विकल्प 1991 से पहले के नियंत्रण हैं, जिन्हें उद्देश्य बनाकर रखा गया है: बड़े व्यापार पर MRTP की रोक, सार्वजनिक क्षेत्र का आरक्षण और ऊँचा सीमा शुल्क।
उदारीकरण का मतलब ही इन्हें हटाना है, इसलिए हर गलत विकल्प उल्टा है, सही के करीब नहीं।
मुख्य तथ्य
- 1991 के सुधार प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिंह राव के समय शुरू हुए, और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह थे।
- मनमोहन सिंह ने सुधारों वाला बजट 24 जुलाई 1991 को पेश किया।
- NCERT: अब केवल परमाणु ऊर्जा उत्पादन का एक हिस्सा और रेलवे की कुछ मुख्य गतिविधियाँ सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित हैं।
- MRTP अधिनियम, 1969 की जगह प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 आया।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'उदारीकरण' को घरेलू उद्योग का संरक्षण समझकर ऊँचे सीमा शुल्क वाला विकल्प चुन लेना।
- बड़े व्यापार पर 1969 की रोक, यानी MRTP अधिनियम, को 1991 का सुधार-कदम समझ लेना।
यहाँ सुधार को उसकी सामग्री से जाँचा गया है, वर्ष से नहीं। 24 Sep 2024, 16:00, GA Q.17 पूछता है कि किस औद्योगिक नीति से उदारीकरण शुरू हुआ (1991), और 19 Jan 2026, 11:00 AM, GA Q.2 दूसरी पंचवर्षीय योजना के बुनियादी और भारी उद्योगों पर ज़ोर को लेकर है।
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