विरोधाभास के सिद्धांत' (अनुच्छेद 254) के संबंध में निम्नलिखित कथनों को पढ़ें: कथन I: यदि "राज्य सूची" के किसी विषय पर राज्य का कानून "समवर्ती सूची" के किसी विषय पर संघ के कानून से टकराता है, तो संघ का कानून प्रभावी होगा और राज्य का कानून उस विरोधाभास की सीमा तक 'अमान्य' हो जाएगा। कथन II: समवर्ती विषय पर राज्य का कानून, जो संघ के कानून से टकराता है, फिर भी उस राज्य में प्रभावी रह सकता है यदि उसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए आरक्षित किया गया हो और स्वीकृति प्राप्त हो गई हो। उपरोक्त में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
- (a)केवल कथन II सही है
- (b)कथन I और II दोनों सही हैं
- (c)केवल कथन I सही हैं
- (d)न तो कथन I सही है और न ही कथन II सही है
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B. दोनों कथन अनुच्छेद 254 के दो खंड हैं।
कथन I खंड (1) है: समवर्ती सूची के किसी विषय पर राज्य का कानून संघ के कानून से टकराए, तो संघ का कानून प्रभावी होता है और राज्य का कानून उस विरोध (repugnancy) की मात्रा तक शून्य (अमान्य) हो जाता है।
प्रश्नपत्र इसी विरोध को 'विरोधाभास' लिखता है।
ध्यान दें: हिन्दी प्रश्नपत्र के कथन I में राज्य के कानून के साथ "राज्य सूची" छप गया है। अंग्रेज़ी प्रश्नपत्र में यही कथन समवर्ती सूची के विषय पर बने राज्य के कानून की बात करता है, और कुंजी दोनों कथनों को सही मानती है, इसलिए कथन I को इसी अर्थ में पढ़िए।
कथन II खंड (2) है: राज्य का वह कानून राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित किया गया हो और उसे राष्ट्रपति की स्वीकृति मिल गई हो, तो वह उस राज्य में प्रभावी रहता है। दोनों सही → विकल्प (b)।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल कथन II सही है — कथन I भी सही है। यह अनुच्छेद 254(1) का सामान्य नियम है: समवर्ती विषय पर टकराव हो, तो विरोधी राज्य कानून पीछे हटता है और संघ का कानून प्रभावी होता है।
- (c)केवल कथन I सही हैं — कथन II भी सही है। अनुच्छेद 254(2) के तहत विरोधी राज्य कानून राष्ट्रपति के लिए आरक्षित होकर स्वीकृति पा ले, तो उस राज्य में प्रभावी रहता है।
- (d)न तो कथन I सही है और न ही कथन II सही है — दोनों कथन अनुच्छेद 254 के पाठ के अनुसार हैं: खंड (1) नियम बताता है, खंड (2) स्वीकृति वाला अपवाद। किसी भी कथन में उसे गलत नहीं लिखा गया।
अवधारणा
समवर्ती सूची के विषयों पर संसद और राज्य विधानमंडल दोनों कानून बना सकते हैं, इसलिए उनके कानून आपस में टकरा सकते हैं। कौन-सा कानून टिकेगा, यह अनुच्छेद 254 तय करता है।
नियम, खंड (1): संघ का कानून प्रभावी होता है, चाहे वह राज्य के कानून से पहले पारित हुआ हो या बाद में।
अपवाद, खंड (2): राष्ट्रपति के लिए आरक्षित और स्वीकृति-प्राप्त राज्य कानून उस राज्य में प्रभावी रहता है। फिर भी इसका परंतुक (proviso) संसद को बाद में उस राज्य कानून में जोड़ने, संशोधन करने, बदलने या उसे निरस्त करने देता है।
दोनों कथन एक-दूसरे के विरोधी लगते हैं, पर हैं नहीं। खंड (1) में ही लिखा है कि यह नियम 'subject to the provisions of clause (2)' है, यानी खंड (2) के उपबंधों के अधीन, इसलिए संघ के कानून वाला नियम स्वीकृति वाले अपवाद के लिए पहले से जगह छोड़ता है।
मुख्य तथ्य
- समवर्ती सूची सातवीं अनुसूची की सूची III है।
- अनुच्छेद 254(1): समवर्ती विषय पर संघ के कानून से टकराने वाला राज्य का कानून विरोध (repugnancy) की मात्रा तक शून्य (अमान्य) होता है।
- अनुच्छेद 254(2): विरोधी राज्य कानून राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित हो और उसे स्वीकृति मिल जाए, तो वह उस राज्य में प्रभावी रहता है।
- अनुच्छेद 254(2) का परंतुक संसद को बाद में ऐसा कानून बनाने देता है जो उस राज्य कानून में जोड़े, संशोधन करे, बदलाव करे या उसे निरस्त करे।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- कथन II को कथन I का विरोधी मान लेना। खंड (1) को खंड (2) के अधीन रखा गया है, इसलिए दोनों सही हैं।
- राष्ट्रपति की स्वीकृति को स्थायी सुरक्षा मान लेना। परंतुक के तहत संसद बाद में उस राज्य कानून में संशोधन कर सकती है या उसे निरस्त कर सकती है।
15 Sep 2025, 12:30, GA Q.15 यही खंड दूसरी ओर से पूछता है: स्वीकृति-प्राप्त राज्य कानून का उस राज्य में संघ के कानून पर भारी पड़ना, और संसद की बाद में उसे निष्प्रभावी करने की शक्ति।
14 Sep 2025, 12:30, GA Q.15 संघ-राज्य विधायी संबंध पूछता है, और उसकी कुंजी अनुच्छेद 256 के तहत राज्यों को दिए जाने वाले निर्देशों पर है।
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