हड़प्पा सभ्यता में, नहरों के अवशोष किस स्थान पर पाए गए ?
- (a)बनावली
- (b)लोथल
- (c)शोर्तुघई (शोरतुग़ई)
- (d)धौलावीरा
उत्तर
क्यों
सही — C, शोर्तुघई (शोरतुग़ई)। उत्तर-पूर्वी अफ़गानिस्तान में ऑक्सस अर्थात् आमू दरिया पर स्थित शोर्तुघई सबसे उत्तरी हड़प्पाई बस्ती और लाजवर्द मणि की व्यापारिक चौकी है। यहीं सिंचाई नहरों के अवशेष — जो कोकचा नदी से खेतों तक जल लाती थीं — और एक जुता हुआ खेत मिले हैं, जो हड़प्पाई स्थलों में नहर-अवशेषों के लिए इसे विशिष्ट बना देते हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)बनावली — हरियाणा का बनावली अपनी अग्नि-वेदियों, अच्छी गुणवत्ता के जौ और मानक जालनुमा नगर-योजना से हटकर बनी बसावट के लिए स्मरण किया जाता है — नहरों के लिए नहीं।
- (b)लोथल — गुजरात का लोथल अपने ईंटों से बने ज्वारीय गोदीबाड़े के लिए प्रसिद्ध है, जो सामुद्रिक व्यापार की विशेषता है, न कि खेतों की सिंचाई नहरों की।
- (d)धौलावीरा — कच्छ का धौलावीरा अपने विस्तृत जलाशयों और वर्षाजल संचयन प्रणाली (तथा 'साइनबोर्ड' शिलालेख) के लिए जाना जाता है — ये भंडारण टंकियाँ और बाँध हैं, सिंचाई नहरें नहीं।
अवधारणा
हड़प्पा (सिंधु घाटी) सभ्यता सिंधु द्रोणी से कहीं आगे तक फैली थी। अफ़गानिस्तान का शोर्तुघई उसकी सुदूर उत्तर-पश्चिमी व्यापारिक सीमा को चिह्नित करता है। अलग-अलग हड़प्पाई स्थल अपनी विशिष्ट विशेषताओं के लिए स्मरण किए जाते हैं — लोथल गोदीबाड़े के लिए, धौलावीरा जलाशयों के लिए, कालीबंगा जुते हुए खेत के लिए, और शोर्तुघई सिंचाई नहरों तथा लाजवर्द व्यापार के लिए।
कई हड़प्पाई स्थलों में उन्नत जल-अभियांत्रिकी दिखती है, जिससे विकल्प आकर्षक लगते हैं। किंतु बची हुई नहरों के अवशेषों की विशिष्ट विशेषता शोर्तुघई की है, जिसके खेतों को कोकचा नदी से निकाली गई नहर सींचती थी — यह धौलावीरा के भंडारण जलाशयों से भिन्न है।
मुख्य तथ्य
- शोर्तुघई सबसे उत्तरी हड़प्पाई स्थल है, जो उत्तर-पूर्वी अफ़गानिस्तान में आमू दरिया (ऑक्सस) पर स्थित है।
- वहाँ सिंचाई नहरों के अवशेष (कोकचा नदी से लगभग 25 किमी दूर से लाया गया जल) और एक जुता हुआ खेत मिले हैं।
- शोर्तुघई लगभग 2000 ईसा पूर्व के आसपास आस-पास के क्षेत्र से खनित लाजवर्द मणि की व्यापारिक बस्ती थी।
- इसके विपरीत लोथल अपने गोदीबाड़े के लिए, धौलावीरा जलाशयों के लिए और बनावली अग्नि-वेदियों तथा जौ के लिए जाना जाता है।
नहरों के अवशेष शोर्तुघई को अलग करते हैं; शेष स्थल गोदीबाड़े, जलाशयों और अग्नि-वेदियों के लिए प्रसिद्ध हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- लोथल या धौलावीरा को इसलिए चुन लेना कि वे किसी और प्रकार के जल-कार्यों के लिए प्रसिद्ध हैं।
- सिंचाई नहरों (शोर्तुघई) को वर्षाजल भंडारण जलाशयों (धौलावीरा) के साथ भ्रमित कर लेना।
यह हड़प्पाई पुरातत्व में स्थल-से-विशेषता सुमेलन या सीधे 'नहरों के अवशेष कहाँ मिले' प्रश्न के रूप में पूछा जाता है।
संबंधित PYQ
निम्नलिखित में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? I. लोथल: प्राचीन गोदीबाड़ा II. सारनाथ: बुद्ध का प्रथम उपदेश III. राजगीर: अशोक की सिंह-शीर्ष IV. नालंदा: बौद्ध विद्या का महान केंद्र। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a) I, II, III और IV
- (b) III और IV
- (c) I, II और IV
- (d) I और II
उत्तर(c) I, II और IV
स्थल-से-विशेषता का वही तर्क। वहाँ लोथल अपने गोदीबाड़े से सही सुमेलित है (और सिंह-शीर्ष गलत ढंग से राजगीर से); यहाँ एक अन्य हड़प्पाई विशेषता — नहरों के अवशेष — को सही स्थल शोर्तुघई से जोड़ना है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अफ़गानिस्तान में स्थित कौन-सा हड़प्पाई स्थल लाजवर्द मणि की व्यापारिक चौकी के रूप में कार्य करता था?
- (a)लोथल
- (b)शोर्तुघई
- (c)कालीबंगा
- (d)रोपड़
उत्तर(b) शोर्तुघई — आमू दरिया पर स्थित सबसे उत्तरी हड़प्पाई स्थल, जो लाजवर्द मणि का व्यापार करता था। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
हड़प्पाई ज्वारीय गोदीबाड़ा किस स्थल से संबद्ध है?
- (a)धौलावीरा
- (b)लोथल
- (c)बनावली
- (d)शोर्तुघई
उत्तर(b) लोथल — उसका ईंटों से बना गोदीबाड़ा सामुद्रिक व्यापार की ओर संकेत करता है।