दो ग्रहों का द्रव्यमान 1 : 7 के अनुपात में है । उनके व्यासों के बीच अनुपात 2 : 1 है । उनके द्वारा एक दूसरे पर आरोपित बल का अनुपात क्या है ?
- (a)1 : 7
- (b)7 : 1
- (c)1 : 1
- (d)2 : 1
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, 1 : 1। दोनों ग्रह एक ही पारस्परिक गुरुत्वाकर्षण बल से एक-दूसरे को खींचते हैं। न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम के अनुसार F = G x M1 x M2 / r^2 — यह व्यंजक दोनों द्रव्यमानों में सममित है और केंद्र-से-केंद्र की एक ही दूरी r का प्रयोग करता है — अतः ग्रह 2 के कारण ग्रह 1 पर लगने वाला बल परिमाण में ग्रह 1 के कारण ग्रह 2 पर लगने वाले बल के बराबर होता है। न्यूटन का तृतीय नियम भी यही कहता है: क्रिया और प्रतिक्रिया बराबर और विपरीत होती हैं। द्रव्यमान अनुपात (1 : 7) और व्यास अनुपात (2 : 1) भटकाने वाले आँकड़े हैं, अतः बलों का अनुपात 1 : 1 है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)1 : 7 — यह तो केवल द्रव्यमान अनुपात है। दोनों पिंडों पर बल बराबर होते हैं; द्रव्यमानों के अनुपात में तो उनके त्वरण (a = F/m) भिन्न होंगे, बल नहीं।
- (b)7 : 1 — यह उल्टा द्रव्यमान अनुपात है — वही भूल कि पारस्परिक बल को द्रव्यमान के समानुपाती मान लिया जाए।
- (d)2 : 1 — यह व्यास अनुपात है। व्यास पारस्परिक बल तय नहीं करते, और दूरी r भी दोनों पिंडों के लिए एक ही है, अतः वह निरस्त हो जाती है।
अवधारणा
दो पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण एक ही अन्योन्यक्रिया है: प्रत्येक पिंड परिमाण में बराबर और दिशा में विपरीत खिंचाव अनुभव करता है (न्यूटन का तृतीय नियम), चाहे उनके द्रव्यमान या आकार कुछ भी हों। परिणामी त्वरण अवश्य भिन्न होते हैं — हल्का पिंड अधिक त्वरित होता है — किंतु बल सदैव बराबर रहते हैं।
जाल यह सहज धारणा है कि कहीं भारी ग्रह को 'अधिक बड़ा' बल लगाना चाहिए। ऐसा नहीं होता: द्रव्यमान की असमानता त्वरणों को बदलती है, बराबर-और-विपरीत बलों को नहीं। इसीलिए पृथ्वी सेब को ठीक उतने ही बल से नीचे खींचती है जितने बल से सेब पृथ्वी को ऊपर खींचता है।
मुख्य तथ्य
- न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम: F = G x M1 x M2 / r^2 — दोनों द्रव्यमानों में सममित, अतः प्रत्येक पिंड पर बल का परिमाण समान।
- न्यूटन का तृतीय नियम: प्रत्येक क्रिया की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।
- बल बराबर किंतु त्वरण असमान: a = F/m, अतः हल्का पिंड अधिक त्वरित होता है।
- पृथ्वी सेब को ठीक उसी बल से आकर्षित करती है जिससे सेब पृथ्वी को आकर्षित करता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- बलों के अनुपात को द्रव्यमानों के अनुपात के बराबर मान लेना।
- यह मान लेना कि बड़ा या भारी पिंड अधिक बल लगाता है।
'दो पिंड एक-दूसरे पर जो बल लगाते हैं उनका अनुपात' वाले जाल-प्रश्न के रूप में, जिसमें द्रव्यमान और आकार के आँकड़े जान-बूझकर भटकाने के लिए दिए जाते हैं।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
पृथ्वी गिरते हुए पत्थर को आकर्षित करती है। इसकी तुलना में पत्थर द्वारा पृथ्वी पर लगाया गया बल होता है
- (a)बहुत कम
- (b)बहुत अधिक
- (c)परिमाण में बराबर
- (d)शून्य
उत्तर(c) परिमाण में बराबर — क्रिया और प्रतिक्रिया बराबर और विपरीत होती हैं। - अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
असमान द्रव्यमान वाले दो पिंड एक-दूसरे पर बराबर गुरुत्वाकर्षण बल लगाते हैं। किस पिंड का त्वरण अधिक होगा ?
- (a)भारी पिंड का
- (b)हल्के पिंड का
- (c)दोनों का समान
- (d)किसी का नहीं
उत्तर(b) हल्के पिंड का — बल बराबर होने पर a = F/m तब अधिक होता है जब m कम हो।