मानव शरीर के किस भाग या अंग में उपास्थि (कार्टिलेज) नहीं पाई जाती है ?
- (a)नाक
- (b)श्वासनली
- (c)श्वसनिका
- (d)जानु संधि
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, श्वसनिका। उपास्थि नाक, स्वरयंत्र, श्वासनली और श्वसनी में उपस्थित रहती है (जिनमें वायुमार्ग को खुला रखने के लिए C-आकार के वलय या उपास्थि की पट्टिकाएँ होती हैं) तथा जानु जैसी संधियों की संधि-सतहों पर भी। ज्यों-ज्यों वायुमार्ग शाखित होकर छोटी श्वसनिकाओं तक पहुँचते हैं, उपास्थि लुप्त हो जाती है — श्वसनिका की भित्तियों को उपास्थि नहीं, बल्कि चिकनी पेशी और प्रत्यास्थ ऊतक सहारा देते हैं। अतः श्वसनिका में उपास्थि नहीं पाई जाती।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)नाक — नाक में उपास्थि होती है — नाक के अग्र भाग और पट (सेप्टम) का लचीला ढाँचा उपास्थिमय है, अतः यहाँ उपास्थि पाई ही जाती है।
- (b)श्वासनली — श्वासनली (विंडपाइप) हायलिन उपास्थि के C-आकार के वलयों द्वारा खुली रखी जाती है, अतः यहाँ उपास्थि उपस्थित है।
- (d)जानु संधि — जानु में अस्थियों के सिरों पर संधि (हायलिन) उपास्थि तथा तंतु-उपास्थि से बने मेनिस्कस होते हैं, अतः जानु संधि में उपास्थि पाई ही जाती है।
अवधारणा
उपास्थि एक दृढ़ किंतु लचीला संयोजी ऊतक है जो सहारा देता है और गद्दी का काम करता है। श्वसन मार्ग में बड़े वायुमार्ग (श्वासनली और श्वसनी) खुला रहने के लिए उपास्थि के वलय/पट्टिकाएँ रखते हैं; श्वसनिका में संक्रमण की पहचान ही यही है कि वहाँ उपास्थि लुप्त हो जाती है — श्वसनिकाएँ इसके बदले चिकनी पेशी पर निर्भर रहती हैं। उपास्थि चल संधियों को भी आस्तरित करती है तथा नाक और बाह्य कर्ण का निर्माण करती है।
प्रत्येक स्थान पर उपास्थि की उपस्थिति जाँचिए। नाक (संरचनात्मक उपास्थि), श्वासनली (C-वलय) और जानु (संधि उपास्थि) — तीनों में वह स्पष्ट रूप से मौजूद है। पाठ्यपुस्तक का निर्णायक तथ्य यही है कि श्वसनिकाओं में — श्वसनी के विपरीत — उपास्थि नहीं होती। इसी से (c) 'नहीं पाई जाती' वाला सही उत्तर बनता है।
मुख्य तथ्य
- श्वासनली और श्वसनी में वायुमार्ग को खुला रखने के लिए उपास्थि (C-आकार के वलय / पट्टिकाएँ) होती है।
- श्वसनिकाओं में उपास्थि नहीं होती — उनकी भित्तियाँ चिकनी पेशी और प्रत्यास्थ तंतुओं की होती हैं; यही श्वसनिका को श्वसनी से अलग करता है।
- नाक और बाह्य कर्ण को उपास्थि सहारा देती है; जानु जैसी संधियों में संधि (हायलिन) उपास्थि तथा मेनिस्कस होते हैं।
- उपास्थि एक अवाहिकीय (रक्तवाहिका-रहित) संयोजी ऊतक है जिसे उपास्थि-कोशिकाएँ (कॉन्ड्रोसाइट) बनाती हैं; इसके तीन प्रकार हैं — हायलिन, प्रत्यास्थ और तंतु-उपास्थि।
उपास्थि केवल श्वसनिका में अनुपस्थित होती है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- यह मान लेना कि सभी वायुमार्गों में उपास्थि होती है — श्वसनिकाओं में नहीं होती; यही उनकी परिभाषक विशेषता है।
- उपास्थि (नाक, संधियों की गद्दी) को स्नायु/कंडरा से भ्रमित कर देना।
'उपास्थि कहाँ नहीं पाई जाती' के रूप में, अथवा श्वसनी बनाम श्वसनिका के भेद तथा उपास्थि के प्रकारों की जाँच के रूप में पूछा जाता है।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
श्वासनली को पिचकने से रोकने वाले वलय किसके बने होते हैं ?
- (a)अस्थि
- (b)हायलिन उपास्थि
- (c)चिकनी पेशी
- (d)स्नायु
उत्तर(b) हायलिन उपास्थि — C-आकार के वलय श्वासनली को खुला रखते हैं। - अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
कौन-सा संयोजी ऊतक किसी संधि पर एक अस्थि को दूसरी अस्थि से जोड़ता है ?
- (a)कंडरा
- (b)स्नायु
- (c)उपास्थि
- (d)अवकाशी ऊतक
उत्तर(b) स्नायु — यह अस्थि को अस्थि से जोड़ता है (कंडरा पेशी को अस्थि से जोड़ती है)।