मानव वृक्क के वृक्काणु (नेफ्रॉन) का कौन-सा भाग उत्सर्जन हेतु रक्त के निस्यंदन के लिए उत्तरदायी है ?
- (a)संग्राही नलिका
- (b)वृक्क शिरा
- (c)मूत्र वाहिनी
- (d)बोमेन संपुट
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, बोमेन संपुट। प्रत्येक वृक्काणु का आरंभ प्याले जैसे बोमेन संपुट से होता है, जो कोशिकागुच्छ (ग्लोमेरुलस) नामक केशिकाओं के गुच्छे को घेरे रहता है। रक्त दाब के साथ कोशिकागुच्छ में प्रवेश करता है और उसके छोटे अणु (जल, ग्लूकोस, लवण, यूरिया) दबाव से बाहर निकलकर बोमेन संपुट में आ जाते हैं — यही अत्यनिस्यंदन उत्सर्जन का रक्त-निस्यंदन चरण है। इसके बाद वृक्काणु का शेष भाग उपयोगी पदार्थों का पुनरवशोषण कर लेता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)संग्राही नलिका — संग्राही नलिका वृक्काणु के अंत में आती है; यह पहले से बन चुके मूत्र को एकत्र और सांद्र करती है (अंतिम जल-पुनरवशोषण)। यह रक्त का निस्यंदन नहीं करती।
- (b)वृक्क शिरा — वृक्क शिरा एक रक्तवाहिका है जो निस्यंदित (स्वच्छ) रक्त को वृक्क से बाहर ले जाती है — यह वृक्काणु का भाग ही नहीं है और कोई निस्यंदन नहीं करती।
- (c)मूत्र वाहिनी — मूत्र वाहिनी वह नली है जो तैयार मूत्र को वृक्क से मूत्राशय तक ले जाती है; यह वृक्काणु के बाहर है और रक्त का निस्यंदन नहीं करती।
अवधारणा
वृक्काणु वृक्क की संरचनात्मक और क्रियात्मक (निस्यंदन) इकाई है; मानव के प्रत्येक वृक्क में लगभग दस लाख वृक्काणु होते हैं। वृक्काणु में एक मैल्पीघी काय होता है — बोमेन संपुट के भीतर बैठा कोशिकागुच्छ (केशिका-गुच्छ) — तथा एक लंबी वृक्क नलिका। उत्सर्जन तीन चरणों में होता है: कोशिकागुच्छ/बोमेन संपुट पर अत्यनिस्यंदन, नलिका में वरणात्मक पुनरवशोषण, तथा नलिकीय स्रवण।
वृक्क से संबंधित चार संरचनाएँ दी गई हैं, किंतु वास्तविक निस्यंदन केवल एक ही करती है। प्रवाह का पीछा कीजिए: रक्त भीतर आता है -> कोशिकागुच्छ + बोमेन संपुट उसे छानते हैं -> नलिका उपयोगी भाग पुनः अवशोषित करती है -> संग्राही नलिका सांद्र करती है -> मूत्र वाहिनी मूत्र बाहर ले जाती है। निस्यंदन के चरण पर केवल बोमेन संपुट/कोशिकागुच्छ बैठता है; शिरा, मूत्र वाहिनी और संग्राही नलिका — सभी निस्यंदन के बाद की सामग्री सँभालते हैं।
मुख्य तथ्य
- रक्त का निस्यंदन (अत्यनिस्यंदन) बोमेन संपुट के भीतर स्थित कोशिकागुच्छ पर होता है — मूत्र-निर्माण का पहला चरण।
- वृक्काणु वृक्क की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है; मानव के प्रति वृक्क लगभग 10 लाख।
- निस्यंदन के बाद वृक्क नलिका ग्लूकोस, अधिकांश जल और लवणों को पुनः रक्त में अवशोषित कर लेती है।
- निस्यंदन के बाद का क्रम: बोमेन संपुट -> वृक्क नलिका (पुनरवशोषण) -> संग्राही नलिका -> मूत्र वाहिनी -> मूत्राशय।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- वृक्क धमनी/शिरा (वृक्क को रक्त पहुँचाने वाली वाहिकाएँ) को वृक्काणु के भागों से भ्रमित कर देना।
- यह सोचना कि मूत्र वाहिनी या संग्राही नलिका रक्त छानती है — वे तो पहले से बने मूत्र को ही ले जाती या सांद्र करती हैं।
वृक्क/वृक्काणु पर प्रश्न 'कौन-सा भाग रक्त छानता है', 'वृक्क की क्रियात्मक इकाई', अथवा भाग-से-कार्य के सुमेलन के रूप में आते हैं।
संबंधित PYQ
मानव वृक्क के कार्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. वृक्क में अपशिष्ट हटा दिए जाने के बाद स्वच्छ रक्त वृक्क धमनी के माध्यम से वापस भेजा जाता है। 2. बोमेन संपुट से निस्यंदित द्रव सूक्ष्म नलिकाओं से होकर गुजरता है, जहाँ अधिकांश ग्लूकोस पुनः अवशोषित होकर वृक्क शिरा के रक्त में भेज दिया जाता है। इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1, न ही 2
उत्तर(b) केवल 2
यह सीधे वृक्काणु के कार्य पर है — कथन 2 बोमेन संपुट पर अत्यनिस्यंदन और उसके बाद नलिका में ग्लूकोस के पुनरवशोषण का वर्णन करता है (सही); कथन 1 गलत है, क्योंकि स्वच्छ रक्त वृक्क शिरा से निकलता है, वृक्क धमनी से नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
मानव वृक्क की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है
- (a)तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन)
- (b)वृक्काणु (नेफ्रॉन)
- (c)कूपिका (एल्विओलस)
- (d)वृक्किका (नेफ्रिडियम)
उत्तर(b) वृक्काणु (नेफ्रॉन) — वृक्क की रक्त-निस्यंदन इकाई (प्रति वृक्क लगभग दस लाख)। - अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
वृक्काणु में निस्यंद का अधिकांश ग्लूकोस पुनः रक्त में कहाँ अवशोषित होता है ?
- (a)बोमेन संपुट में
- (b)वृक्क नलिका में
- (c)मूत्र वाहिनी में
- (d)संग्राही नलिका में
उत्तर(b) वृक्क नलिका में — निस्यंदन के बाद ग्लूकोस और जल का वरणात्मक पुनरवशोषण होता है।