नैदानिक प्रयोगशालाओं में रक्त परीक्षणों के लिए निम्नलिखित में से किस पृथक्करण तकनीक का उपयोग किया जाता है ?
- (a)निस्यंदन (फिल्ट्रेशन)
- (b)वर्णलेखन(क्रोमेटोग्राफी)
- (c)अपकेंद्रीकरण (सेंट्रीफ्यूगेशन)
- (d)क्रिस्टलन
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, अपकेंद्रीकरण (सेंट्रीफ्यूगेशन)। रक्त के नमूने को अपकेंद्रित्र में तीव्र गति से घुमाया जाता है; अधिक घनत्व वाली लाल तथा श्वेत रुधिर कोशिकाएँ तली में चली जाती हैं जबकि हल्का प्लाज़्मा (अथवा रक्त के थक्का बन जाने पर सीरम) ऊपर एक स्वच्छ पारदर्शी परत के रूप में आ जाता है, जिसे परीक्षण के लिए निकाल लिया जाता है। घनत्व पर आधारित यह पृथक्करण लगभग हर जैव-रासायनिक रक्त परीक्षण का नियमित पहला चरण है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)निस्यंदन (फिल्ट्रेशन) — निस्यंदन में किसी अघुलनशील ठोस को द्रव से कण-आकार के आधार पर छन्ने के छिद्रों द्वारा अलग किया जाता है। रक्त कोशिकाएँ छन्ने को जाम कर देंगी, और यह घनत्व के आधार पर प्लाज़्मा को कोशिकाओं से स्वच्छ रूप से अलग नहीं कर सकता — अतः रक्त के लिए यह प्रयोगशाला विधि नहीं है।
- (b)वर्णलेखन(क्रोमेटोग्राफी) — वर्णलेखन किसी मिश्रण के घुले हुए घटकों को स्थिर प्रावस्था तथा गतिशील प्रावस्था के प्रति उनकी भिन्न-भिन्न आसक्ति के आधार पर अलग करता है (वर्णकों, अमीनो अम्लों, औषधियों के लिए प्रयुक्त)। यह एक विश्लेषणात्मक उपकरण है, पूर्ण रक्त को कोशिकाओं और प्लाज़्मा में बाँटने की तकनीक नहीं।
- (d)क्रिस्टलन — क्रिस्टलन में किसी घुलनशील ठोस को ठंडा करने या वाष्पन द्वारा विलयन से क्रिस्टल बनाकर शुद्ध किया जाता है (जैसे नमक या चीनी का शोधन)। रक्त के भौतिक घटकों को अलग करने से इसका कोई संबंध नहीं है।
अवधारणा
प्रत्येक पृथक्करण तकनीक किसी भिन्न भौतिक गुण का लाभ उठाती है। अपकेंद्रीकरण उन घटकों को अलग करता है जिनके घनत्व भिन्न होते हैं — तीव्र गति से घुमाने पर अधिक घनत्व वाले कण बाहर की ओर जाकर बैठ जाते हैं। नैदानिक प्रयोगशाला में पूर्ण रक्त की नली को अपकेंद्रित किया जाता है जिससे रचित तत्व (RBC, WBC, बिंबाणु) तली में जम जाते हैं और प्लाज़्मा या सीरम को विश्लेषण हेतु निकाल लिया जाता है।
तकनीक को उस गुण से मिलाइए जिसका वह उपयोग करती है: कण-आकार के लिए निस्यंदन, घनत्व के लिए अपकेंद्रीकरण, भिन्न आसक्ति के लिए वर्णलेखन, तथा विलेयता/ताप के लिए क्रिस्टलन। रक्त को नमूने को क्षति पहुँचाए बिना घनत्व के आधार पर बाँटना है, जो सीधे अपकेंद्रीकरण की ओर संकेत करता है।
मुख्य तथ्य
- अपकेंद्रीकरण तीव्र घूर्णन के अंतर्गत घनत्व के अंतर से घटकों को अलग करता है।
- अपकेंद्रित रक्त में ऊपर प्लाज़्मा/सीरम और नीचे संकुलित कोशिकाएँ मिलती हैं; सीरम वह प्लाज़्मा है जिसमें से थक्का बनाने वाले कारक निकल चुके हैं।
- निस्यंदन कण-आकार से पृथक करता है; क्रिस्टलन विलयन से ठोस को शुद्ध करता है; वर्णलेखन घुले घटकों को भिन्न आसक्ति के आधार पर अलग करता है।
- अपकेंद्रीकरण के बाद संकुलित कोशिकाओं का अंश हीमैटोक्रिट (PCV) देता है।

आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- अपकेंद्रीकरण को निस्यंदन से भ्रमित कर देना — निस्यंदन आकार पर काम करता है, घनत्व पर नहीं।
- वर्णलेखन इसलिए चुन लेना कि वह 'नैदानिक प्रयोगशाला की तकनीक जैसा लगता है' — वह अणुओं को अलग करता है, रक्त को कोशिकाओं और प्लाज़्मा में नहीं।
NDA और UPSC पूछते हैं कि 'X के लिए कौन-सी पृथक्करण तकनीक प्रयुक्त होती है' — विधि को उस भौतिक गुण से जोड़िए जिसका वह उपयोग करती है (आकार, घनत्व, आसक्ति, विलेयता)।
संबंधित PYQ
वाशिंग मशीन का कार्यकारी सिद्धांत है
- (a) अपकेंद्रीकरण
- (b) अपोहन (डायलिसिस)
- (c) प्रतीप परासरण
- (d) विसरण
उत्तर(a) अपकेंद्रीकरण
UPSC ने अपकेंद्रीकरण को कार्यकारी सिद्धांत के रूप में पूछा है — घूमता हुआ ड्रम अपकेंद्री बल से गीले कपड़ों में से पानी बाहर फेंक देता है; यह वही घनत्व/जड़त्व-आधारित पृथक्करण है जो रक्त को कोशिकाओं और प्लाज़्मा में बाँटता है।
अभ्यास
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
दूध से मलाई अलग करने वाले क्रीम सेपरेटर में कौन-सी तकनीक प्रयुक्त होती है ?
- (a)निस्यंदन
- (b)आसवन
- (c)अपकेंद्रीकरण
- (d)क्रिस्टलन
उत्तर(c) अपकेंद्रीकरण — दूध को घुमाने पर अधिक घनत्व वाला मलाई-रहित भाग बाहर की ओर फेंक दिया जाता है और हल्की वसा-युक्त मलाई बच जाती है; यह ठीक वही घनत्व-आधारित सिद्धांत है जो रक्त के लिए प्रयुक्त होता है। - अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
सीरम प्लाज़्मा से इस अर्थ में भिन्न है कि सीरम में नहीं होता :
- (a)ग्लूकोस
- (b)फाइब्रिनोजन जैसे थक्का बनाने वाले कारक
- (c)प्रतिरक्षी (एंटीबॉडी)
- (d)विद्युत्-अपघट्य
उत्तर(b) फाइब्रिनोजन जैसे थक्का बनाने वाले कारक — सीरम वह तरल है जो रक्त का थक्का बन जाने के बाद बचता है, अर्थात् प्लाज़्मा में से थक्का बनाने वाले प्रोटीन निकाल देने पर।