दो विभिन्न प्रकार के पदार्थों के कणों का स्वतः अंतःमिश्रण क्या कहलाता है ?
- (a)परासरण
- (b)ब्राऊनी गति
- (c)विसरण
- (d)चालकत्व
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, विसरण। विसरण कणों की वह स्वतः-प्रवृत्त शुद्ध गति है जिसमें कण उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र से निम्न सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर तब तक जाते हैं जब तक वे समान रूप से फैल न जाएँ। चूँकि कण निरंतर यादृच्छिक गति में रहते हैं, दो पदार्थ स्वयं ही आपस में मिल जाते हैं — हिलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती — और ठीक यही बात 'दो विभिन्न प्रकार के पदार्थों के कणों का स्वतः अंतःमिश्रण' वाक्यांश कह रहा है (जैसे कमरे में इत्र की गंध का फैलना)।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)परासरण — परासरण में विलायक (सामान्यतः जल) अर्ध-पारगम्य झिल्ली के आर-पार तनु विलयन से सांद्र विलयन की ओर जाता है। इसमें झिल्ली आवश्यक है और केवल विलायक ही गति करता है, अतः यह दो पदार्थों का मुक्त अंतःमिश्रण नहीं है।
- (b)ब्राऊनी गति — ब्राऊनी गति किसी तरल में निलंबित सूक्ष्म कणों की यादृच्छिक टेढ़ी-मेढ़ी गति है, जो तरल के अणुओं से टक्करों के कारण होती है। यह अलग-अलग कणों की अंतर्निहित यादृच्छिक गति है, दो भिन्न प्रकार के पदार्थों का शुद्ध अंतःमिश्रण नहीं।
- (d)चालकत्व — चालकत्व का आशय किसी पदार्थ में से विद्युत धारा (अथवा ऊष्मा) के प्रवाह से है — यह आवेश या तापीय ऊर्जा का अभिगमन है, दो पदार्थों के कणों का मिश्रण नहीं।
अवधारणा
विसरण गैसों और द्रवों में कणों की निरंतर यादृच्छिक गति का परिणाम है। जब दो पदार्थ पास लाए जाते हैं, तो उनके कण इधर-उधर विचरण करते हुए धीरे-धीरे आपस में मिल जाते हैं जब तक मिश्रण एकसमान न हो जाए; औसतन वे वहाँ से चलते हैं जहाँ भीड़ अधिक है (उच्च सांद्रता) उस ओर जहाँ विरलता है (निम्न सांद्रता)।
विकल्पों को इस आधार पर छाँटिए कि वास्तव में क्या गति करता है और कैसे। विसरण = किन्हीं दो पदार्थों के कणों का मुक्त रूप से अंतःमिश्रण। परासरण इसे सीमित कर देता है — केवल विलायक, और वह भी झिल्ली के आर-पार। ब्राऊनी गति वह यादृच्छिक कंपन है जो विसरण को चलाती है, स्वयं मिश्रण नहीं। चालकत्व धारा/ऊष्मा से संबंधित है, कणों के मिश्रण से नहीं। 'स्वतः / दो विभिन्न प्रकार के पदार्थ' का संकेत विसरण की ओर ले जाता है।
मुख्य तथ्य
- विसरण: कणों की उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर शुद्ध गति, जब तक वितरण एकसमान न हो जाए।
- यह गैसों में सबसे तेज़, द्रवों में धीमा और अधिकांश ठोसों में नगण्य होता है।
- परासरण विसरण का ही एक विशेष रूप है — अर्ध-पारगम्य झिल्ली के आर-पार विलायक का विसरण।
- ब्राऊनी गति (कणों की यादृच्छिक गति) ही वह क्रियाविधि है जिससे विसरण संभव होता है।

आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- परासरण चुन लेना — उसमें केवल विलायक गति करता है, और वह भी केवल झिल्ली के आर-पार।
- ब्राऊनी गति चुन लेना — यह विसरण के पीछे की यादृच्छिक कण-गति है, दो पदार्थों का मिश्रण नहीं।
परिभाषा के रूप में ('कणों का स्वतः अंतःमिश्रण') अथवा दैनिक उदाहरणों के रूप में (इत्र का फैलना, जल में स्याही) पूछा जाता है — उत्तर विसरण होता है।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
पूरे कमरे में इत्र की गंध का फैल जाना किसका उदाहरण है ?
- (a)परासरण
- (b)विसरण
- (c)चालन
- (d)केशिकत्व
उत्तर(b) विसरण — इत्र के कण वायु के कणों के साथ स्वतः ही मिल जाते हैं। - अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
अर्ध-पारगम्य झिल्ली के आर-पार विलायक अणुओं का तनु विलयन से सांद्र विलयन की ओर गमन कहलाता है
- (a)विसरण
- (b)परासरण
- (c)ब्राऊनी गति
- (d)चालकत्व
उत्तर(b) परासरण — यह विसरण का ही एक विशेष, झिल्ली-सीमित रूप है जिसमें केवल विलायक भाग लेता है।