मध्यप्रदेश में बाँस का राष्ट्रीयकरण कब हुआ था ?
- (a)1975
- (b)1964
- (c)1973
- (d)1963
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — (c) 1973। मध्यप्रदेश ने बाँस, एक प्रमुख वन उपज, को 1973 में राज्य व्यापार एकाधिकार (राष्ट्रीयकरण) के अंतर्गत लाया — इसके बाद बाँस कूपों का कार्य राज्य वन विभाग द्वारा विभागीय रूप से किया जाने लगा, जिससे निजी ठेकेदारों और पट्टेदारों की पूर्व प्रणाली समाप्त हो गई।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)1975 — मध्यप्रदेश में बाँस के राष्ट्रीयकरण के लिए दस्तावेज़ित वर्ष नहीं है — आधिकारिक उत्तर 1973 की पुष्टि करता है।
- (b)1964 — 1964 वह वर्ष है जब मध्यप्रदेश ने एक अलग वन उपज — तेंदू (बीड़ी) पत्ता — को सर्वप्रथम, म.प्र. तेंदू पत्ता (व्यापार विनियमन) अधिनियम, 1964 के अंतर्गत राष्ट्रीयकृत किया — बाँस को नहीं।
- (d)1963 — मध्यप्रदेश के पहले वन-उपज राष्ट्रीयकरण (तेंदू पत्ता, 1964) से एक वर्ष पूर्व; उस राज्य में इतनी जल्दी कोई वन उपज राष्ट्रीयकृत नहीं हुई थी, और बाँस तो और भी बाद में, 1973 में राष्ट्रीयकृत हुआ।
अवधारणा
मध्यप्रदेश ने विभिन्न वन उपजों को एक साथ नहीं, बल्कि चरणों में राष्ट्रीयकृत (राज्य व्यापार एकाधिकार के अंतर्गत) किया। तेंदू पत्ता (बीड़ी पत्ता) सबसे पहले, 1964 में राष्ट्रीयकृत हुआ; बाँस बाद में, 1973 में, राष्ट्रीयकृत हुआ। राष्ट्रीयकरण का अर्थ था कि राज्य वन विभाग ने संग्रहण और व्यापार का कार्य विभागीय रूप से अपने हाथ में ले लिया, निजी ठेकेदारों और बिचौलियों के स्थान पर।
परीक्षा का जाल यह है कि 1964 (तेंदू पत्ता के लिए प्रसिद्ध 'सर्वप्रथम राष्ट्रीयकृत' वर्ष) को डिफ़ॉल्ट उत्तर मान लिया जाए, जबकि प्रश्न वास्तव में बाँस के बारे में है, जो लगभग एक दशक बाद राष्ट्रीयकृत हुआ।
मुख्य तथ्य
- तेंदू पत्ता (बीड़ी पत्ता) मध्यप्रदेश की पहली राष्ट्रीयकृत वन उपज थी, 1964 में, म.प्र. तेंदू पत्ता (व्यापार विनियमन) अधिनियम के अंतर्गत।
- मध्यप्रदेश में बाँस को 1973 में राज्य व्यापार एकाधिकार के अंतर्गत राष्ट्रीयकृत किया गया।
- राष्ट्रीयकरण के बाद बाँस कूपों का कार्य निजी ठेकेदारों के बजाय राज्य वन विभाग द्वारा विभागीय रूप से किया जाता है।
- मध्यप्रदेश ने अपने वन उपज व्यापार का राष्ट्रीयकरण चरणबद्ध ढंग से, वस्तु-दर-वस्तु, लगभग एक दशक की अवधि में किया।
- 1964 — तेंदू पत्ता (बीड़ी पत्ता) राष्ट्रीयकृत (पहली वस्तु)
- 1973 — बाँस राष्ट्रीयकृत
बाँस (1973) मध्यप्रदेश की दूसरी बड़ी राष्ट्रीयकृत वन उपज के रूप में तेंदू पत्ता (1964) के बाद आया।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- बाँस के राष्ट्रीयकरण वर्ष (1973) को तेंदू पत्ता के वर्ष (1964, मध्यप्रदेश की पहली राष्ट्रीयकृत वन उपज) से भ्रमित कर देना
- यह मान लेना कि बाँस हर जगह राज्य एकाधिकार के अंतर्गत ही बना रहता है — 2017 के केंद्रीय कानून ने गैर-वन भूमि पर उगे बाँस को 'वृक्ष' संबंधी प्रतिबंधों से मुक्त कर दिया
MPPSC मध्यप्रदेश के क्रमिक वन-उपज राष्ट्रीयकरणों (तेंदू पत्ता, बाँस) के लिए सटीक वर्षों पर बार-बार परीक्षण करता है — किसी एक अलग वर्ष को रटने के बजाय एक तिथिवार समयरेखा बनाएँ।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मध्यप्रदेश में सबसे पहले राष्ट्रीयकृत वन उपज कौन-सी थी, और किस वर्ष में?
- (a)बाँस, 1973
- (b)तेंदू पत्ता, 1964
- (c)साल बीज, 1980
- (d)हर्रा, 1970
उत्तर(b) तेंदू पत्ता, 1964 — म.प्र. तेंदू पत्ता (व्यापार विनियमन) अधिनियम के अंतर्गत, मध्यप्रदेश की पहली राष्ट्रीयकृत वन उपज। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारतीय वन अधिनियम, 1927 में 2017 के संशोधन ने बाँस की कानूनी स्थिति को किस प्रकार बदला?
- (a)गैर-वन भूमि पर उगे बाँस को 'वृक्ष' की परिभाषा से बाहर करके
- (b)बाँस की खेती को पूरी तरह प्रतिबंधित करके
- (c)पूरे देश में पहली बार बाँस के व्यापार का राष्ट्रीयकरण करके
- (d)बाँस को संरक्षित प्रजाति घोषित करके
उत्तर(a) इसने गैर-वन भूमि पर उगे बाँस को 'वृक्ष' की परिभाषा से बाहर कर दिया, जिससे वहाँ वन पारगमन/कटाई संबंधी प्रतिबंधों से मुक्ति मिली।