मध्यप्रदेश में काली मिट्टी का निर्माण किस चट्टान के द्वारा हुआ ?
- (a)बलुआ पत्थर
- (b)चूना-पत्थर
- (c)बेसाल्ट
- (d)नीस
सही उत्तर — (c) बेसाल्ट। काली मिट्टी (रेगुर/काली कपासी मिट्टी) एक अवशिष्ट (residual) मिट्टी है, जो दक्कन ट्रैप की विदर-विस्फोट (fissure-eruption) लावा चट्टान — बेसाल्ट — के दीर्घकालिक अपक्षय से यथास्थान (in situ) बनी है। इस अपक्षय में मुक्त होने वाले लोहा, मैग्नीशियम और मृदा खनिज (मुख्यतः मॉण्टमोरिलोनाइट) इस मिट्टी को उसका गहरा रंग, उच्च नमी-धारण क्षमता, और सूखने पर स्वयं-जुताई (दरार पड़ने) का विशिष्ट व्यवहार देते हैं। मध्यप्रदेश के मालवा व निमाड़ पठार, जो इसी बेसाल्ट-आच्छादित दक्कन ट्रैप पर बने हैं, राज्य के प्रमुख काली-मिट्टी क्षेत्र हैं।
- (a)बलुआ पत्थर — बलुआ पत्थर, एक अवसादी चट्टान, सामान्यतः रेतीली, अक्सर लाल या पीली मिट्टी में अपक्षयित होता है — मृदा-समृद्ध काली मिट्टी में नहीं।
- (b)चूना-पत्थर — चूना-पत्थर कैल्शियम-समृद्ध (कैल्केरियस) मिट्टी में अपक्षयित होता है, जो बेसाल्ट-जनित काली मिट्टी से भिन्न है।
- (d)नीस — नीस, एक कायांतरित चट्टान जो प्रायद्वीपीय भारत के पुराने शील्ड क्षेत्रों में सामान्य है, लाल व लैटेराइट मिट्टी से संबंधित है, काली मिट्टी से नहीं।
काली मिट्टी (रेगुर/काली कपासी मिट्टी) एक अवशिष्ट मिट्टी है, जो बेसाल्ट — दक्कन ट्रैप बनाने वाली विदर-विस्फोट लावा चट्टान — के दीर्घकालिक रासायनिक अपक्षय से यथास्थान बनी है। इसकी मृदा-समृद्ध, नमी-धारक, स्वयं-जुताई करने वाली प्रकृति (मॉण्टमोरिलोनाइट मृदा खनिजों के उच्च अनुपात के कारण) इसे कपास व अन्य वर्षा-आधारित फसलों के लिए उपयुक्त बनाती है।
जाल यह है कि काली मिट्टी की उत्पत्ति को चूना-पत्थर जैसी अवसादी चट्टान (जो कैल्केरियस मिट्टी में अपक्षयित होती है) या नीस जैसी कायांतरित चट्टान (जो प्रायद्वीपीय भारत के अन्य भागों में लाल व लैटेराइट मिट्टी से जुड़ी है) से जोड़ दिया जाए — काली मिट्टी की मूल चट्टान विशेष रूप से आग्नेय, ज्वालामुखीय बेसाल्ट है।
- काली मिट्टी (रेगुर/काली कपासी मिट्टी) बेसाल्ट — दक्कन ट्रैप की लावा चट्टान — के यथास्थान अपक्षय से बनती है।
- इसमें लोहा, मैग्नीशियम और मॉण्टमोरिलोनाइट मृदा खनिज प्रचुर मात्रा में होते हैं, जिससे इसकी उच्च नमी-धारण क्षमता और सूखने पर स्वयं-जुताई (दरार पड़ने) की प्रकृति बनती है।
- बलुआ पत्थर, चूना-पत्थर और नीस क्रमशः भिन्न प्रकार की मिट्टी (रेतीली, कैल्केरियस, तथा लाल/लैटेराइट) में अपक्षयित होते हैं — काली मिट्टी में नहीं।
- मध्यप्रदेश के मालवा व निमाड़ पठार, जो बेसाल्ट-आच्छादित दक्कन ट्रैप पर स्थित हैं, प्रमुख काली-मिट्टी क्षेत्र हैं।
काली मिट्टी विशेष रूप से बेसाल्ट से बनती है — दक्कन ट्रैप की ज्वालामुखीय चट्टान से, न कि किसी अवसादी या कायांतरित चट्टान से।
- काली मिट्टी को आग्नेय बेसाल्ट के बजाय किसी अवसादी चट्टान (चूना-पत्थर/बलुआ पत्थर) से जोड़ देना
- नीस (कायांतरित, लाल/लैटेराइट मिट्टी) को काली मिट्टी की ज्वालामुखीय उत्पत्ति से भ्रमित कर देना
MPPSC/UPSC मूल-चट्टान-से-मिट्टी-प्रकार की शृंखला को बार-बार परखते हैं — बेसाल्ट-से-काली-मिट्टी सबसे अधिक पूछी जाने वाली जोड़ी है — भारत के प्रत्येक प्रमुख मिट्टी प्रकार को उसकी मूल चट्टान से जोड़कर याद रखें।
भारत की काली कपासी मिट्टी का निर्माण किसके अपक्षय के कारण हुआ है
- (a) भूरी वन मिट्टी
- (b) विदर ज्वालामुखीय चट्टान
- (c) ग्रेनाइट और शिस्ट
- (d) शेल और चूना-पत्थर
उत्तर(b) विदर ज्वालामुखीय चट्टान
लगभग सीधे पूछा गया वही मूल भाव: भारत की काली कपासी मिट्टी (रेगुर) विदर ज्वालामुखीय चट्टान — यानी बेसाल्ट, दक्कन ट्रैप का लावा — के अपक्षय से बनी है, जो इस प्रश्न का भी सही उत्तर है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
काली कपासी मिट्टी (रेगुर) विशेष रूप से किस फसल के लिए उपयुक्त है, जिसके नाम पर इसे यह लोकप्रिय नाम मिला है?
- (a)गेहूँ
- (b)कपास
- (c)चावल
- (d)चाय
उत्तर(b) कपास — इसीलिए इसे 'काली कपासी मिट्टी' कहा जाता है; इसकी मृदा-समृद्ध, नमी-धारक प्रकृति वर्षा-आधारित कपास की खेती के लिए उपयुक्त है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
दक्कन ट्रैप, जो भारत की काली मिट्टी का स्रोत-चट्टान है, किस भूवैज्ञानिक प्रक्रिया से बना?
- (a)समुद्री अवसादन
- (b)व्यापक विदर-प्रकार के बेसाल्टी लावा विस्फोट
- (c)वायु-जनित (एओलियन) निक्षेपण
- (d)चूना-पत्थर का कायांतरण
उत्तर(b) व्यापक विदर-प्रकार के बेसाल्टी लावा विस्फोट (पश्च-क्रीटेशियस-प्रारंभिक इओसीन काल) — यह ठंडा हुआ लावा ही बेसाल्ट है, जिसके अपक्षय से काली मिट्टी बनती है।