निम्नलिखित में से किस वर्ष में लॉर्ड विलियम बैंटिंक द्वारा प्रेस स्वतंत्रता प्रदान की गई ?
- (a)1832 ई.
- (b)1833 ई.
- (c)1834 ई.
- (d)1835 ई.
सही उत्तर — (d) 1835 ई.। गवर्नर-जनरल जॉन एडम्स के 1823 के प्रेस अध्यादेश के बाद से समाचार-पत्र सख़्त पूर्व-लाइसेंसिंग व्यवस्था के अधीन थे। यह लाइसेंसिंग व्यवस्था 1835 के प्रेस अधिनियम से समाप्त हुई, जिसने लाइसेंस की अनिवार्यता हटाकर एक स्वतंत्र प्रेस बहाल की — यह बैंटिंक के गवर्नर-जनरल काल के समापन पर ही लागू हुआ, तथा उनके उत्तराधिकारी चार्ल्स मेटकाफ़ ने इसे आगे बढ़ाया, जिन्हें इसी सुधार हेतु इतिहासकार 'भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता' मानते हैं।
- (a)1832 ई. — इस वर्ष कोई प्रेस-विधि परिवर्तन नहीं हुआ; एडम्स का प्रतिबंधात्मक 1823 का लाइसेंसिंग अध्यादेश तब भी पूर्णतः लागू था।
- (b)1833 ई. — यह 1833 के चार्टर अधिनियम का वर्ष है (जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी के शेष व्यापार एकाधिकार को समाप्त किया, तथा भारत के गवर्नर-जनरल पद का सृजन किया) — एक बड़ा सुधार, परन्तु प्रेस-विधि नहीं।
- (c)1834 ई. — यह अभी भी लाइसेंसिंग-प्रतिबंधित प्रेस व्यवस्था के भीतर था; उदारीकरण करने वाला प्रेस अधिनियम अगले ही वर्ष आया।
19वीं सदी के आरम्भ में भारत का प्रेस कानून प्रतिबंध व स्वतंत्रता के बीच झूलता रहा। जॉन एडम्स के 1823 के अध्यादेश ने समाचार-पत्रों पर अनिवार्य लाइसेंसिंग लगाई। वह लाइसेंसिंग व्यवस्था 1835 के प्रेस अधिनियम से हटाई गई, जिसने समाचार-पत्रों को बिना सरकारी लाइसेंस के प्रकाशित होने दिया — एक वास्तविक उदार मील का पत्थर, जो बैंटिंक से मेटकाफ़ को सत्ता-हस्तांतरण के ठीक समय पड़ा।
विकल्प 1832-1835 के आसपास सघन रूप से गुँथे हैं, इसलिए यह प्रश्न बैंटिंक से जुड़े उदार-सुधार के सामान्य कालखंड (सती प्रथा उन्मूलन 1829, अंग्रेज़ी शिक्षा अधिनियम 1835 आदि) के बजाय प्रेस अधिनियम के ठीक वर्ष के ज्ञान को पुरस्कृत करता है।
- जॉन एडम्स के प्रेस अध्यादेश (1823) ने समाचार-पत्रों पर सख़्त लाइसेंसिंग लगाई
- 1835 के प्रेस अधिनियम ने लाइसेंसिंग प्रतिबंध हटाए तथा प्रेस स्वतंत्रता बहाल की
- यह सुधार 1835 में कार्यवाहक गवर्नर-जनरल चार्ल्स मेटकाफ़ को श्रेय दिया जाता है, जिन्हें 'प्रेस का मुक्तिदाता' कहा जाता है
- प्रेस पर प्रतिबंध बाद में वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम (1878) से लौटे, जिन्हें 1882 में लॉर्ड रिपन ने निरस्त किया
- प्रेस अध्यादेश, 1823 — सख़्त लाइसेंसिंग (एडम्स)
- प्रेस अधिनियम, 1835 — लाइसेंसिंग हटाई गई, स्वतंत्रता बहाल
- वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम, 1878 — भारतीय-भाषा प्रेस पर अंकुश (लिटन)
- 1882 में निरस्त (रिपन)
1835 के प्रेस अधिनियम ने समाचार-पत्रों पर लाइसेंसिंग प्रतिबंध समाप्त किए — यही वह वर्ष है जो इस प्रश्न में पूछा गया है।
- 1835 के प्रेस अधिनियम का श्रेय व्यक्तिगत रूप से बैंटिंक को देना, न कि उनके उत्तराधिकारी मेटकाफ़ को, जिन्होंने वास्तव में इसे लागू किया
- 1833 (चार्टर अधिनियम) को 1835 (प्रेस अधिनियम) से भ्रमित करना, क्योंकि दोनों उसी उदार-सुधार कालखंड में आते हैं
प्रेस-विधि के उतार-चढ़ाव (1823 प्रतिबंध → 1835 स्वतंत्रता → 1878 प्रतिबंध → 1882 निरसन) का तिथि-स्मरण MPPSC/UPSC में बार-बार आने वाला पैटर्न है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1835 के प्रेस अधिनियम हेतु इतिहासकारों द्वारा किसे 'भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता' श्रेय दिया जाता है?
- (a)लॉर्ड विलियम बैंटिंक
- (b)चार्ल्स मेटकाफ़
- (c)लॉर्ड ऑकलैंड
- (d)लॉर्ड मैकाले
उत्तर(b) चार्ल्स मेटकाफ़ — कार्यवाहक गवर्नर-जनरल जिन्होंने 1835 में प्रेस लाइसेंसिंग हटाई।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1878 का वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम, जिसने भारतीय-भाषा समाचार-पत्रों पर पुनः अंकुश लगाए, 1882 में किसके द्वारा निरस्त किया गया?
- (a)लॉर्ड लिटन
- (b)लॉर्ड रिपन
- (c)लॉर्ड कर्ज़न
- (d)लॉर्ड डफ़रिन
उत्तर(b) लॉर्ड रिपन।