शकों पर विजयोपरांत चन्द्रगुप्त II ने निम्न में से किस धातु के सिक्के प्रचलित किए ?
- (a)स्वर्ण
- (b)चाँदी
- (c)ताँबा
- (d)काँसा
सही उत्तर — (b) चाँदी। गुजरात-मालवा-सौराष्ट्र के पश्चिमी क्षत्रप (शक) शासकों को पराजित करने के बाद (लगभग चौथी सदी के अंत/पाँचवीं सदी CE की शुरुआत में), चन्द्रगुप्त II ने उनका क्षेत्र अपने अधीन कर लिया और वहाँ क्षत्रप शैली में चाँदी के सिक्के जारी करना आरम्भ किया — उनके अपने प्रतिरूप व लेख ने क्षत्रप के स्थान ले लिया — क्योंकि उस क्षेत्र की स्थापित मुद्रा-धातु स्वर्ण नहीं, चाँदी थी। उनके चाँदी के सिक्कों को इतिहासकार इस विजय का सबसे मज़बूत मुद्राशास्त्रीय प्रमाण मानते हैं।
- (a)स्वर्ण — गुप्त स्वर्ण सिक्के ('दीनार', कुषाण भार-मानक पर आधारित) के लिए प्रसिद्ध हैं — परन्तु यह स्वर्ण परंपरा इस विजय से पहले की है; शक विजय के बाद विशेष रूप से जो सिक्के प्रचलित किए गए, वे चाँदी के थे, जो उस क्षेत्र की अपनी मुद्रा को ही जारी रखते थे।
- (c)ताँबा — गुप्त ताँबे की मुद्रा सीमित व स्थानीयकृत थी, यह शक विजय से जुड़ी मुद्रा नहीं थी।
- (d)काँसा — यह एक मानक गुप्त मुद्रा-धातु नहीं है, और शक-विजय से जुड़ी मुद्रा से भी संबंधित नहीं है।
चन्द्रगुप्त I से आगे के गुप्त सम्राटों ने कुषाण प्रतिरूपों पर आधारित स्वर्ण सिक्के (दीनार) ढाले, जिनमें राजा को धनुर्धर या व्याघ्र-हन्ता जैसी मुद्राओं में दिखाया गया। जब चन्द्रगुप्त II ने पश्चिमी क्षत्रपों — जो शक क्षत्रप गुजरात-सौराष्ट्र-मालवा पर सदियों से अपनी दीर्घकालिक चाँदी-सिक्का परंपरा पर शासन करते आए थे — को पराजित किया, तो उन्होंने वहाँ केवल स्वर्ण मुद्रा का विस्तार नहीं किया; बल्कि प्रशासन व व्यापार को सुचारु बनाने हेतु क्षत्रप प्रारूप की नक़ल करते हुए चाँदी के सिक्के जारी किए, जिससे उस क्षेत्र की मौजूदा मुद्रा जारी रही।
जाल यह है कि 'गुप्त सिक्के' सबसे अधिक स्वर्ण से जुड़े होने के कारण विद्यार्थी डिफ़ॉल्ट रूप से 'स्वर्ण' चुन लेते हैं। योग्यता-सूचक वाक्यांश 'शकों पर विजय के बाद' ही उत्तर को चाँदी की ओर मोड़ता है — यह एक क्षेत्र-विशिष्ट, विजय-संबद्ध मुद्रा निर्णय है, न कि सामान्य साम्राज्यिक स्वर्ण-मुद्रा।
- चन्द्रगुप्त II ने गुजरात-मालवा-सौराष्ट्र के पश्चिमी क्षत्रप (शक) शासकों को लगभग चौथी सदी के अंत/पाँचवीं सदी CE की शुरुआत में पराजित किया
- उसके बाद उन्होंने उस क्षेत्र में चाँदी के सिक्के जारी किए, जिससे क्षत्रपों की अपनी चाँदी-सिक्का परंपरा जारी रही
- गुप्त स्वर्ण सिक्के ('दीनार') एक अलग, पुरानी साम्राज्यिक मुद्रा-शृंखला थे, जो इस विजय-संबद्ध चाँदी-मुद्रा से भिन्न थे
- चन्द्रगुप्त II को परंपरागत रूप से 'विक्रमादित्य' उपाधि से पहचाना जाता है

- यह मान लेना कि सभी गुप्त मुद्रा स्वर्ण की थी — शक-विजय के बाद की चाँदी मुद्रा एक अलग, क्षेत्र-विशिष्ट तथ्य है
- चन्द्रगुप्त II की शक-विजय को समुद्रगुप्त के पूर्ववर्ती, भिन्न अभियानों से भ्रमित करना
MPPSC/UPSC 'शासक ↔ मुद्रा-धातु/प्रकार' जोड़ी बनाते हैं; वाक्यांश 'शकों पर विजय के बाद' चाँदी का संकेत देता है, न कि डिफ़ॉल्ट स्वर्ण का।
चन्द्रगुप्त-II के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? 1. शकों पर उसकी विजय का सबसे मज़बूत प्रमाण उसके चाँदी के सिक्कों से मिलता है। 2. इन सिक्कों का भार लगभग 33 ग्रेन होता था। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
- (a) न तो 1 और न ही 2
- (b) 1 और 2 दोनों
- (c) केवल 2
- (d) केवल 1
उत्तर(d) केवल 1 एक सुस्थापित मूल तथ्य है — कथन 1 (चाँदी के सिक्के शक-विजय के सबसे मज़बूत प्रमाण के रूप में) इस कार्ड से मेल खाता है; कथन 2 का विशिष्ट सिक्का-भार आँकड़ा (~33 ग्रेन) यहाँ स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सका, अतः इसे सावधानी के साथ प्रस्तुत किया गया है। ध्यान दें कि इस स्टेट-PCS प्रश्न हेतु स्टोर में कोई सत्यापित correct_answer उपलब्ध नहीं है।
UPPSC 2022 ठीक इसी मूल तथ्य की परीक्षा लेता है — चन्द्रगुप्त II की शकों पर विजय का प्रमाण उनकी चाँदी की मुद्रा से मिलता है — परन्तु प्रत्यक्ष 'कौन-सी धातु' प्रश्न के बजाय कथन-आधारित प्रारूप में।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
पूर्ववर्ती कुषाण मानक पर आधारित गुप्त स्वर्ण सिक्के किस नाम से जाने जाते थे?
- (a)दीनार
- (b)द्रैख्म
- (c)पण
- (d)कहापण
उत्तर(a) दीनार।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
शकों पर उनकी विजय से जुड़ी कौन-सी उपाधि परंपरागत रूप से चन्द्रगुप्त II से संबद्ध है?
- (a)विक्रमादित्य
- (b)अशोकादित्य
- (c)देवपुत्र
- (d)चक्रवर्तिन
उत्तर(a) विक्रमादित्य।