‘आर्यमंजूश्रीमूलकल्प’ निम्न में से किससे संबंधित है ?
- (a)महायान
- (b)हीनयान
- (c)थेरवाद
- (d)वज्रयान
सही उत्तर — (a) अथवा (d) (दोनों स्वीकृत)। आर्यमंजूश्रीमूलकल्प एक संस्कृत बौद्ध ग्रंथ है जो बोधिसत्व मंजुश्री — प्रज्ञा के प्रतीक — पर केंद्रित है; इसकी मूल विषयवस्तु (बोधिसत्व सिद्धांत, मंजुश्री की स्तुति) महायान की है। परन्तु इस ग्रंथ में अनुष्ठान-सामग्री — मंडल, मंत्र व भविष्यवाणी — भी है, जो इसे वज्रयान (तांत्रिक) बौद्ध धर्म की ओर सेतु बनाने वाले ग्रंथों में स्थान देती है। चूँकि यह वास्तव में दोनों लक्षण रखता है, आयोग ने ग्रेस देते हुए (a) महायान व (d) वज्रयान दोनों को स्वीकार किया।
- (b)हीनयान — हीनयान प्राचीनतर, अधिक रूढ़िवादी प्रारंभिक-बौद्ध परंपरा है; इस ग्रंथ की महायान-बोधिसत्व व तांत्रिक विषयवस्तु का इस परंपरा से कोई संबंध नहीं है।
- (c)थेरवाद — थेरवाद उसी प्राचीनतर हीनयान परंपरा का बचा हुआ स्कूल है — हीनयान की भाँति, यह भी इस महायान-वज्रयान ग्रंथ से असंबद्ध है।
बौद्ध धर्म को व्यापक रूप से एक प्राचीनतर परंपरा (हीनयान, जिसका बचा हुआ रूप थेरवाद है) तथा बाद की महायान परंपरा में विभाजित किया जाता है, जिससे वज्रयान (तांत्रिक बौद्ध धर्म) मंडल व मंत्रों की अपनी अनुष्ठान-व्यवस्था के साथ विकसित हुआ। कुछ ग्रंथ किसी एक में स्पष्ट रूप से फिट होने के बजाय महायान व वज्रयान के बीच की सीमा पर स्थित हैं — आर्यमंजूश्रीमूलकल्प एक ऐसा ही ग्रंथ है।
प्रश्न ग्रंथ-से-संप्रदाय वर्गीकरण परखता है, परन्तु यह विशेष ग्रंथ एक स्वच्छ, एकल लेबल का प्रतिरोध करता है — यही कारण है कि इसने ग्रेस अंक अर्जित किए। जाल है हीनयान या थेरवाद चुनना: दोनों प्राचीनतर परंपरा के नाम हैं, और इस ग्रंथ की विषयवस्तु का उससे कोई लेना-देना नहीं है।
- आर्यमंजूश्रीमूलकल्प बोधिसत्व मंजुश्री पर केंद्रित है, जो महायान बौद्ध धर्म में प्रज्ञा का मूर्त रूप है
- इसमें प्रारंभिक तांत्रिक अनुष्ठान-सामग्री (मंडल, मंत्र) भी है — वज्रयान बौद्ध धर्म की ओर एक सेतु
- इतिहासकार इसे बंगाल में अराजकता (मत्स्यन्याय) समाप्त करने हेतु पाल वंश के संस्थापक गोपाल के चयन का एक प्रारंभिक स्रोत भी मानते हैं
- 'हीनयान' व 'थेरवाद' दोनों प्राचीनतर, गैर-महायान परंपरा के नाम हैं — इनमें से कोई भी इस ग्रंथ से मेल नहीं खाता

- 'हीनयान' व 'थेरवाद' को एक ही प्राचीनतर परंपरा के दो नामों के बजाय दो भिन्न स्कूल मान लेना
- यह मान लेना कि कोई महायान ग्रंथ वज्रयान सामग्री नहीं रख सकता — कई परवर्ती महायान ग्रंथ, इस ग्रंथ की भाँति, तंत्र की ओर सेतु बनाते हैं
MPPSC/UPSC 'ग्रंथ ↔ बौद्ध संप्रदाय' जोड़ी परखते हैं; यह प्रश्न असामान्य है क्योंकि यह वास्तव में दो संप्रदायों में फैला है, इसीलिए आयोग ने दोनों विकल्प स्वीकार किए।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मंजुश्रीमूलकल्प को इतिहासकार बंगाल में अराजकता (मत्स्यन्याय) समाप्त करने हेतु किस शासक के चयन के प्रारंभिक स्रोत के रूप में उद्धृत करते हैं?
- (a)गोपाल, पाल वंश का संस्थापक
- (b)हर्षवर्धन
- (c)धर्मपाल
- (d)शशांक
उत्तर(a) गोपाल, पाल वंश का संस्थापक।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
'थेरवाद' बौद्ध धर्म के किस प्राचीनतर, अधिक रूढ़िवादी स्कूल का दूसरा नाम है?
- (a)महायान
- (b)हीनयान
- (c)वज्रयान
- (d)ज़ेन
उत्तर(b) हीनयान — थेरवाद प्राचीनतर हीनयान परंपरा का बचा हुआ रूप है।