हार्डवायर्ड कंट्रोल यूनिट की तुलना में माइक्रोप्रोग्राम्ड कंट्रोल यूनिट का मुख्य आर्किटेक्चरल लाभ क्या है?
- (a)कम विद्युत शक्ति की खपत
- (b)इंस्ट्रक्शन सेट को अपडेट करने में आसानी
- (c)अधिक तेज़ निष्पादन गति
- (d)भौतिक लॉजिक गेट्स की कम संख्या
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B. हार्डवायर्ड कंट्रोल यूनिट अपने कंट्रोल सिग्नल स्थिर (fixed) कॉम्बिनेशनल लॉजिक से बनाती है, इसलिए इंस्ट्रक्शन सेट बदलने का मतलब है वायरिंग बदलना।
माइक्रोप्रोग्राम्ड यूनिट हर निर्देश के चरणों को कंट्रोल मेमोरी में माइक्रोइंस्ट्रक्शन के रूप में रखती है।
किसी निर्देश को बदलने या जोड़ने का मतलब है उस संग्रहीत माइक्रोप्रोग्राम को बदलना, जिसे काफ़ी हद तक सॉफ़्टवेयर की तरह डीबग किया और बदला जा सकता है।
इंस्ट्रक्शन सेट को अपडेट करने में आसानी → विकल्प (b)।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)कम विद्युत शक्ति की खपत — कम विद्युत शक्ति की खपत इस डिज़ाइन की देन नहीं है। माइक्रोप्रोग्राम्ड यूनिट हर निर्देश के हर चरण पर कंट्रोल मेमोरी से एक माइक्रोइंस्ट्रक्शन पढ़ती है, और यह चरण हार्डवायर्ड यूनिट में होता ही नहीं।
- (c)अधिक तेज़ निष्पादन गति — गति तो हार्डवायर्ड यूनिट की ताक़त है: हार्डवायर्ड कंट्रोल यूनिट आमतौर पर ज़्यादा तेज़ होती हैं। माइक्रोप्रोग्राम्ड यूनिट आमतौर पर किसी निर्देश के माइक्रोप्रोग्राम के हर चरण पर एक क्लॉक साइकिल लगाती है।
- (d)भौतिक लॉजिक गेट्स की कम संख्या — भौतिक लॉजिक गेट्स की कम संख्या माइक्रोप्रोग्रामिंग का वादा नहीं है। यह ख़ास तौर पर बने डिकोडिंग लॉजिक की जगह कंट्रोल मेमोरी और सीक्वेंसिंग लॉजिक रखती है, जो ख़ुद भी हार्डवेयर हैं। पक्का लाभ यह है कि संग्रहीत कोड बदला जा सकता है।
अवधारणा
कंट्रोल यूनिट हर मशीन निर्देश को उन कंट्रोल सिग्नलों में बदलती है जो CPU के बाकी हिस्सों को चलाते हैं। इसे दो तरह से बनाया जा सकता है।
हार्डवायर्ड: कॉम्बिनेशनल लॉजिक सीधे सिग्नल बनाता है। यह तेज़ है, पर इसमें लचीलापन कम है।
माइक्रोप्रोग्राम्ड: हर निर्देश, कंट्रोल मेमोरी में रखे माइक्रोइंस्ट्रक्शनों का एक छोटा प्रोग्राम चलाता है। यह विचार मॉरिस विल्क्स (Maurice Wilkes) ने 1951 में दिया था।
यह धीमा है, आमतौर पर हर चरण में एक क्लॉक साइकिल लेता है, पर सर्किट को दोबारा डिज़ाइन किए बिना माइक्रोप्रोग्राम बदला जा सकता है।
माइक्रोप्रोग्राम्ड कंट्रोल को संरचना (structure) में सरल भी बताया जाता है: अलग-अलग जोड़े गए (ad hoc) लॉजिक की जगह एक मेमोरी और एक सीक्वेंसर।
पर सरल संरचना और कम गेट्स एक ही दावा नहीं हैं, इसीलिए गेट्स की संख्या वाला विकल्प इससे नहीं निकलता।
मुख्य तथ्य
- हार्डवायर्ड कंट्रोल: स्थिर कॉम्बिनेशनल लॉजिक, आमतौर पर तेज़, बदलाव सिर्फ़ दोबारा वायरिंग से।
- माइक्रोप्रोग्राम्ड कंट्रोल: कंट्रोल मेमोरी में माइक्रोइंस्ट्रक्शन, बदलना आसान, पर धीमा।
- माइक्रोप्रोग्राम्ड यूनिट आमतौर पर माइक्रोप्रोग्राम के हर चरण पर एक क्लॉक साइकिल लगाती है।
- माइक्रोप्रोग्रामिंग का विचार मॉरिस विल्क्स (Maurice Wilkes) ने 1951 में दिया।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- माइक्रोप्रोग्रामिंग ज़्यादा उन्नत लगती है, इसलिए तेज़ निष्पादन चुन लेना, जबकि तेज़ डिज़ाइन हार्डवायर्ड कंट्रोल है।
- सरल संरचना को कम गेट्स समझ लेना, जबकि कंट्रोल मेमोरी भी हार्डवेयर ही है।
कंट्रोल यूनिट जिस निर्देश को डिकोड करती है, उसे रखने वाला इंस्ट्रक्शन रजिस्टर 19 Jan 2026, 11:00 AM, Computer Knowledge Q.6 में पूछा गया है।
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