ओएसआई (OSI) मॉडल में, लॉजिकल एड्रेसिंग का उपयोग करके विभिन्न नेटवर्कों के बीच पैकेट्स का रूटिंग करने के लिए कौन-सी परत (लेयर) उत्तरदायी होती है?
- (a)डेटा लिंक लेयर
- (b)सेशन लेयर
- (c)नेटवर्क लेयर
- (d)ट्रांसपोर्ट लेयर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C. प्रश्न के दो शब्द एक ही लेयर की ओर इशारा करते हैं।
रूटिंग: OSI रेफ़रेंस मॉडल, यानी ITU-T X.200, रूटिंग और रिलेइंग (relaying) को नेटवर्क लेयर के काम बताता है, और रूटिंग नेटवर्क-एड्रेस के बीच रास्ता (route) खोजता है।
लॉजिकल एड्रेसिंग: ये नेटवर्क-एड्रेस नेटवर्क लेयर ही देती है, और ये नीचे की लेयरों के इस्तेमाल किए गए एड्रेस से स्वतंत्र हो सकते हैं।
लॉजिकल एड्रेस के आधार पर अलग-अलग नेटवर्कों के बीच रूटिंग → नेटवर्क लेयर, विकल्प (c)।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)डेटा लिंक लेयर — डेटा लिंक लेयर फ़िज़िकल एड्रेस के बीच फ़्रेम भेजती है और फ़िज़िकल लेयर में होने वाली त्रुटियाँ (errors) पकड़ती है। लॉजिकल (नेटवर्क) एड्रेस से रूटिंग इसके ऊपर वाली लेयर का काम है।
- (b)सेशन लेयर — सेशन लेयर बात करने वाले दो सिरों के बीच संवाद (dialogue) को व्यवस्थित और सिंक्रनाइज़ करती है: सेशन खोलना, आदान-प्रदान को क्रम में रखना, और उसे बंद करना। पैकेट का रास्ता चुनने में इसकी कोई भूमिका नहीं है।
- (d)ट्रांसपोर्ट लेयर — ट्रांसपोर्ट लेयर दोनों एंड सिस्टम के बीच एंड-टू-एंड ट्रांसफ़र देती है। X.200 कहता है कि इसे रूटिंग और रिलेइंग की कोई चिंता नहीं करनी पड़ती, क्योंकि उन्हें इसके नीचे की नेटवर्क लेयर सँभालती है।
अवधारणा
OSI रेफ़रेंस मॉडल (ISO/IEC 7498-1, जो ITU-T X.200 के रूप में भी प्रकाशित है) नेटवर्किंग को सात लेयरों में बाँटता है:
फ़िज़िकल, डेटा लिंक, नेटवर्क, ट्रांसपोर्ट, सेशन, प्रेज़ेंटेशन, ऐप्लिकेशन।
हर लेयर अपने ऊपर वाली लेयर को सेवाएँ देती है और यह छिपाए रखती है कि वे सेवाएँ कैसे दी जाती हैं।
नेटवर्क लेयर डेटा को एक एंड सिस्टम से दूसरे तक पहुँचाती है, चाहे बीच में एक के बाद एक कई सबनेटवर्क हों।
यह हर एंड सिस्टम को एक नेटवर्क-एड्रेस से पहचानती है, और इसके रूटिंग फ़ंक्शन उन एड्रेस के बीच रास्ता चुनते हैं, इसलिए ऊपर की लेयरों को कभी रूटिंग से निपटना नहीं पड़ता।
X.200 कुछ लोकल-नेटवर्क व्यवस्थाओं में डेटा लिंक लेयर के भीतर भी रूटिंग और रिलेइंग की अनुमति देता है, इसलिए अकेला "रूटिंग" शब्द उत्तर तय नहीं करता।
फ़ैसला लॉजिकल एड्रेसिंग से होता है: नेटवर्क-एड्रेस नेटवर्क लेयर के होते हैं।
मुख्य तथ्य
- OSI लेयरें, नीचे से ऊपर: फ़िज़िकल, डेटा लिंक, नेटवर्क, ट्रांसपोर्ट, सेशन, प्रेज़ेंटेशन, ऐप्लिकेशन।
- नेटवर्क लेयर: नेटवर्क-एड्रेस के बीच रूटिंग और रिलेइंग।
- डेटा लिंक लेयर: फ़िज़िकल एड्रेस के बीच फ़्रेम, त्रुटि पहचान (error detection) के साथ।
- ट्रांसपोर्ट लेयर: एंड सिस्टम के बीच एंड-टू-एंड ट्रांसफ़र, रूटिंग नेटवर्क लेयर पर छोड़कर।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- एंड-टू-एंड काम करने के कारण ट्रांसपोर्ट लेयर चुन लेना, जबकि X.200 कहता है कि यह रूटिंग नेटवर्क लेयर पर छोड़ देती है।
- एड्रेस इस्तेमाल करने के कारण डेटा लिंक लेयर चुन लेना, जबकि वे एड्रेस फ़िज़िकल होते हैं, लॉजिकल नहीं।
प्रश्न लेयर को उसकी संख्या से नहीं, उसके काम से बताता है, इसलिए हर OSI लेयर को उसके काम से याद कीजिए: रूटिंग + लॉजिकल एड्रेसिंग का मतलब नेटवर्क लेयर।
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