कार्बन डाइऑक्साइड गैस को चूने के पानी में प्रवाहित करने से होने वाली अभिक्रिया है
- (a)CaCO3 + H2O + CO2 → Ca(HCO3)2
- (b)Ca(OH)2 + CO2 → CaCO3 + H2O
- (c)CaO + CO2 → CaCO3
- (d)CaCl2 + H2O + CO2 → CaCO3 + 2HCl
उत्तर
क्यों
सही — B, Ca(OH)2 + CO2 → CaCO3 + H2O। चूने का पानी कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, Ca(OH)2 का तनु विलयन है। जब उसमें कार्बन डाइऑक्साइड प्रवाहित की जाती है, तो अघुलनशील कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3) बनता है और विलयन दूधिया हो जाता है — यही दूधियापन CO2 की मानक प्रयोगशालाई जाँच है। दूसरा उत्पाद जल है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)CaCO3 + H2O + CO2 → Ca(HCO3)2 — यह आगे की अभिक्रिया है, पहली नहीं। यदि CO2 आधिक्य में प्रवाहित की जाए, तो दूधिया कैल्शियम कार्बोनेट पुनः घुलकर घुलनशील कैल्शियम बाइकार्बोनेट बन जाता है और दूधियापन मिट जाता है — किंतु CO2 के पहले संपर्क में चूने के पानी की यह अभिक्रिया नहीं होती।
- (c)CaO + CO2 → CaCO3 — यह ठोस बिना बुझे चूने (कैल्शियम ऑक्साइड) की CO2 से अभिक्रिया है, चूने के पानी की नहीं। चूने के पानी में घुला हुआ कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड होता है, कैल्शियम ऑक्साइड नहीं।
- (d)CaCl2 + H2O + CO2 → CaCO3 + 2HCl — इसमें कैल्शियम क्लोराइड सम्मिलित है और इससे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनेगा; यह चूने के पानी की अभिक्रिया नहीं है और CO2 से CaCO3 तक पहुँचने का व्यवहार्य मार्ग भी नहीं है।
अवधारणा
चूने का पानी कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, Ca(OH)2 का स्वच्छ, संतृप्त विलयन है। कार्बन डाइऑक्साइड एक हल्का अम्लीय ऑक्साइड है; वह क्षारीय चूने के पानी से अभिक्रिया कर कैल्शियम कार्बोनेट अवक्षेपित करती है और विलयन दूधिया कर देती है। और अधिक CO2 प्रवाहित करने पर वह कार्बोनेट घुलनशील कैल्शियम बाइकार्बोनेट में बदल जाता है और दूधियापन मिट जाता है — यह दो-चरणीय व्यवहार एक शास्त्रीय प्रदर्शन है।
भ्रामक विकल्प सभी वास्तविक कैल्शियम अभिक्रियाएँ हैं, अतः कुंजी ठीक-ठीक अभिकारक मिलाने में है। 'चूने का पानी' अभिकारक को विलयन में Ca(OH)2 पर नियत कर देता है (CaO नहीं, CaCl2 नहीं), और प्रश्न पहली अभिक्रिया पूछता है, जो CaCO3 देती है — अर्थात् विकल्प (b)।
मुख्य तथ्य
- चूने का पानी कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, Ca(OH)2 का विलयन है।
- CO2 + Ca(OH)2 → CaCO3 (श्वेत, अघुलनशील) + H2O; यही CaCO3 चूने के पानी को दूधिया करता है।
- चूने के पानी का दूधिया हो जाना कार्बन डाइऑक्साइड गैस की मानक पुष्टिकारक जाँच है।
- आधिक्य CO2 अवक्षेप को घुलनशील कैल्शियम बाइकार्बोनेट, Ca(HCO3)2 के रूप में घोल देती है, जिससे दूधियापन मिट जाता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- चूने के पानी (Ca(OH)2 का विलयन) को बिना बुझे चूने (CaO) के साथ भ्रमित कर लेना।
- यह भूल जाना कि आधिक्य CO2 कार्बोनेट को पुनः घोल देती है, अतः दूधियापन स्थायी नहीं होता।
यह चूने के पानी के साथ CO2 की अभिक्रिया या जाँच के रूप में पूछा जाता है, अथवा यह कि चूने का पानी पहले दूधिया क्यों होता है और फिर स्वच्छ क्यों हो जाता है।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
चूने के पानी में कार्बन डाइऑक्साइड प्रवाहित करने पर वह किसके बनने के कारण दूधिया हो जाता है?
- (a)कैल्शियम बाइकार्बोनेट
- (b)कैल्शियम कार्बोनेट
- (c)कैल्शियम ऑक्साइड
- (d)कैल्शियम क्लोराइड
उत्तर(b) कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3), जो अघुलनशील है और विलयन को दूधिया कर देता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
आधिक्य कार्बन डाइऑक्साइड प्रवाहित करने पर चूने के पानी का दूधियापन क्यों मिट जाता है?
- (a)CaCO3 वाष्पित हो जाता है
- (b)घुलनशील कैल्शियम बाइकार्बोनेट, Ca(HCO3)2 बन जाता है
- (c)जल उबलकर उड़ जाता है
- (d)कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड पुनः बन जाता है
उत्तर(b) घुलनशील कैल्शियम बाइकार्बोनेट, Ca(HCO3)2 बन जाता है।