चोल शिलालेख में भूमि की कई श्रेणियों का उल्लेख है । निम्नलिखित में से कौन-सी, विद्यालयों के रख-रखाव के लिए थी ?
- (a)तिरुनामट्टुक्कनी
- (b)शालाभोग
- (c)वेल्लनवगाई
- (d)पल्लीच्छंदम
उत्तर
क्यों
सही — B, शालाभोग। चोल शिलालेखों में अंकित भूमि-श्रेणियों में शालाभोग वह भूमि थी जो विद्यालय के रख-रखाव के लिए अलग रखी जाती थी। चोल विभिन्न संस्थाओं के भरण-पोषण हेतु विशिष्ट भूखंड प्रदान करते थे, और 'शाला' (विद्यालय) तथा 'भोग' (दान/उपभोग) मिलकर उस भूमि को चिह्नित करते हैं जिसकी उपज किसी विद्या-केंद्र का खर्च चलाती थी।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)तिरुनामट्टुक्कनी — तिरुनामट्टुक्कनी मंदिरों को दान में दी गई भूमि (मंदिर-दान) थी, विद्यालय के लिए दी गई भूमि नहीं।
- (c)वेल्लनवगाई — वेल्लनवगाई गैर-ब्राह्मण किसान भू-स्वामियों की भूमि थी — साधारण कृषकों की भूमि, विद्यालय के लिए दिया गया दान नहीं।
- (d)पल्लीच्छंदम — पल्लीच्छंदम जैन संस्थाओं को दान में दी गई भूमि थी, विद्यालय के रख-रखाव के लिए अलग रखी गई भूमि नहीं।
अवधारणा
चोल काल के शिलालेख (लगभग नौवीं से तेरहवीं शताब्दी) भूमि को उसके प्रयोजन या उसके राजस्व-धारक के अनुसार वर्गीकृत करते हैं। NCERT ऐसी श्रेणियाँ गिनाती है — वेल्लनवगाई (गैर-ब्राह्मण किसान भू-स्वामियों की भूमि), ब्रह्मदेय (ब्राह्मणों को दान में दी गई भूमि), शालाभोग (विद्यालय के भरण-पोषण की भूमि), देवदान और तिरुनामट्टुक्कनी (मंदिरों को दान में दी गई भूमि), तथा पल्लीच्छंदम (जैन संस्थाओं को दान में दी गई भूमि)।
शब्द को लाभार्थी से मिलाइए: 'शाला' का अर्थ विद्यालय है, अतः शालाभोग विद्यालय की भूमि है; मंदिर की भूमि देवदान और तिरुनामट्टुक्कनी है; किसान की भूमि वेल्लनवगाई है; और 'पल्लि' (जैन) पल्लीच्छंदम की ओर संकेत करता है। प्रश्न विशेष रूप से विद्यालय-रख-रखाव की भूमि पूछता है, जो शालाभोग है।
मुख्य तथ्य
- शालाभोग — विद्यालय के रख-रखाव के लिए दी गई भूमि।
- ब्रह्मदेय — ब्राह्मणों को दान में दी गई कर-मुक्त भूमि; वेल्लनवगाई — गैर-ब्राह्मण किसान भू-स्वामियों की भूमि।
- देवदान और तिरुनामट्टुक्कनी — मंदिरों को दान में दी गई भूमि।
- पल्लीच्छंदम — जैन संस्थाओं को दान में दी गई भूमि।

आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- पल्लीच्छंदम को विद्यालय की भूमि न समझें — वह जैन संस्थाओं की भूमि है; विद्यालय की भूमि शालाभोग है।
- तिरुनामट्टुक्कनी और देवदान मंदिर की भूमि हैं, विद्यालय की नहीं।
यह किसी चोल भूमि-श्रेणी को उसके लाभार्थी — विद्यालय, मंदिर, ब्राह्मण, किसान या जैन संस्था — से सुमेलित कराकर पूछा जाता है।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
चोल शिलालेखों में ब्रह्मदेय किसे कहते हैं?
- (a)विद्यालय के लिए भूमि
- (b)ब्राह्मणों को दान में दी गई कर-मुक्त भूमि
- (c)किसान भू-स्वामियों की भूमि
- (d)मंदिरों को दान में दी गई भूमि
उत्तर(b) ब्राह्मणों को दान में दी गई कर-मुक्त भूमि। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
चोल भूमि-श्रेणी देवदान अथवा तिरुनामट्टुक्कनी किस भूमि को कहते हैं?
- (a)जैन संस्थाओं के लिए
- (b)मंदिरों को दान में दी गई
- (c)विद्यालय के लिए
- (d)गैर-ब्राह्मण किसानों की
उत्तर(b) मंदिरों को दान में दी गई।