निम्नलिखित में से किसने ‘आत्म-सम्मान आंदोलन (Self-Respect Movement)’ का प्रवर्तन किया ?
- (a)ज्योतिबा फुले
- (b)स्वामी विवेकानंद
- (c)इ. वी. रामास्वामी नायकर
- (d)डॉ. बी. आर. अंबेडकर
उत्तर
क्यों
सही — C, इ. वी. रामास्वामी नायकर। आत्म-सम्मान आंदोलन (सुया मरियादै इयक्कम) का प्रवर्तन तमिलनाडु में 1925 में इ. वी. रामास्वामी नायकर ने किया, जो लोकप्रिय रूप से पेरियार कहलाते हैं। यह एक बुद्धिवादी, जाति-विरोधी और ब्राह्मणवाद-विरोधी सामाजिक सुधार आंदोलन था, जिसने गैर-ब्राह्मणों के आत्म-सम्मान और समानता के लिए अभियान चलाया, अस्पृश्यता तथा धार्मिक अंधविश्वास का विरोध किया, और पुरोहित के बिना संपन्न होने वाले आत्म-सम्मान विवाहों को बढ़ावा दिया।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)ज्योतिबा फुले — ज्योतिबा फुले उन्नीसवीं सदी के महाराष्ट्र के महान जाति-विरोधी सुधारक थे, जिन्होंने सत्यशोधक समाज (1873) की स्थापना की, किंतु उन्होंने तमिलनाडु के आत्म-सम्मान आंदोलन का प्रवर्तन नहीं किया।
- (b)स्वामी विवेकानंद — स्वामी विवेकानंद एक आध्यात्मिक नेता थे जिन्होंने रामकृष्ण मिशन (1897) की स्थापना की; आत्म-सम्मान आंदोलन से उनका कोई संबंध नहीं था।
- (d)डॉ. बी. आर. अंबेडकर — डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने दलित अधिकार आंदोलन का नेतृत्व किया और संविधान की प्रारूप समिति की अध्यक्षता की, किंतु आत्म-सम्मान आंदोलन का प्रवर्तन पेरियार ने किया था, अंबेडकर ने नहीं।
अवधारणा
आत्म-सम्मान आंदोलन मद्रास प्रेसीडेंसी का एक सामाजिक सुधार आंदोलन था, जिसे 1925 में इ. वी. रामास्वामी 'पेरियार' नायकर ने आरंभ किया। बुद्धिवाद तथा जाति-पदानुक्रम और ब्राह्मणवादी प्रभुत्व के विरोध में जड़ें रखते हुए इसने गैर-ब्राह्मणों और स्त्रियों के लिए समानता, पुरोहित-रहित आत्म-सम्मान विवाह, तथा अंधविश्वास के परित्याग की वकालत की।
पेरियार जाति पर कांग्रेस के रुख से असहमत होकर उससे अलग हुए और एक उग्र गैर-ब्राह्मण, बुद्धिवादी कार्यक्रम की ओर मुड़े। उन्हें फुले (महाराष्ट्र, सत्यशोधक समाज) और अंबेडकर (दलित अधिकार) से अलग पहचानिए — ये सभी जाति-विरोधी सुधारक थे, किंतु आत्म-सम्मान आंदोलन विशेष रूप से पेरियार का तमिलनाडु का आंदोलन है।
मुख्य तथ्य
- आत्म-सम्मान आंदोलन की स्थापना 1925 में तमिलनाडु में इ. वी. रामास्वामी नायकर (पेरियार) ने की।
- यह बुद्धिवादी और जाति-विरोधी था, जो ब्राह्मणवादी प्रभुत्व और अस्पृश्यता का विरोध करता था।
- इसने ब्राह्मण पुरोहितों के बिना संपन्न होने वाले 'आत्म-सम्मान विवाहों' को बढ़ावा दिया।
- पेरियार ने आगे चलकर द्रविड़र कषगम का नेतृत्व किया, और इस आंदोलन ने तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति को गढ़ा।

आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- पेरियार के आत्म-सम्मान आंदोलन को फुले के सत्यशोधक समाज या अंबेडकर के दलित आंदोलन के साथ भ्रमित न करें।
- यह आंदोलन तमिलनाडु (मद्रास प्रेसीडेंसी) में आरंभ हुआ था, महाराष्ट्र में नहीं।
यह पूछा जाता है कि आत्म-सम्मान आंदोलन की स्थापना किसने की, अथवा समाज सुधारकों को उनके आंदोलनों और संगठनों से सुमेलित कराया जाता है।
संबंधित PYQ
निम्नलिखित में से कौन 'आत्म-सम्मान आंदोलन' के संस्थापक थे?
- (a) 'पेरियार' इ. वी. रामास्वामी नायकर
- (b) डॉ. बी. आर. अंबेडकर
- (c) भास्करराव जाधव
- (d) दिनकरराव जवलकर
उत्तर(a) 'पेरियार' इ. वी. रामास्वामी नायकर
UPSC प्रारंभिक परीक्षा (2025) का लगभग समरूप प्रश्न, जो पूछता है कि आत्म-सम्मान आंदोलन की स्थापना किसने की — उत्तर वही, पेरियार इ. वी. रामास्वामी नायकर।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
पेरियार का आत्म-सम्मान आंदोलन मुख्यतः किसके विरुद्ध लक्षित था?
- (a)ब्रिटिश शासन
- (b)जाति-पदानुक्रम और ब्राह्मणवादी प्रभुत्व
- (c)ज़मींदारी व्यवस्था
- (d)औद्योगिक शोषण
उत्तर(b) जाति-पदानुक्रम और ब्राह्मणवादी प्रभुत्व — यह एक बुद्धिवादी, जाति-विरोधी आंदोलन था। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किस सुधारक ने 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की?
- (a)पेरियार
- (b)ज्योतिबा फुले
- (c)बी. आर. अंबेडकर
- (d)नारायण गुरु
उत्तर(b) ज्योतिबा फुले — महाराष्ट्र में, जो पेरियार के आत्म-सम्मान आंदोलन से भिन्न है।