किसी वस्तु पर कार्यकारी बल द्वारा किया गया कार्य शून्य है यदि
- (a)वस्तु का विस्थापन बल की दिशा के विपरीत दिशा में होता है
- (b)वस्तु का विस्थापन बल की दिशा में ही होता है
- (c)वस्तु का विस्थापन बल की दिशा के लंबवत् दिशा में होता है
- (d)उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर
क्यों
सही — C, विस्थापन बल के लंबवत् हो। कार्य W = F × s × cos(θ) होता है, जहाँ θ बल और विस्थापन के बीच का कोण है। जब विस्थापन बल के लंबवत् होता है, तो θ = 90 डिग्री और cos 90 = 0, अतः किया गया कार्य ठीक शून्य होता है — बल गतिशील वस्तु पर लगते हुए भी कोई कार्य नहीं करता (उदाहरण के लिए, क्षैतिज गति करते पिंड पर गुरुत्व, या वृत्तीय गति में पिंड पर अभिकेंद्री बल)।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)वस्तु का विस्थापन बल की दिशा के विपरीत दिशा में होता है — यहाँ θ = 180 डिग्री और cos 180 = -1, अतः W = -F × s। यह अधिकतम ऋणात्मक कार्य है (जैसे जब घर्षण गति का विरोध करता है), शून्य नहीं।
- (b)वस्तु का विस्थापन बल की दिशा में ही होता है — यहाँ θ = 0 डिग्री और cos 0 = +1, अतः W = +F × s। यह अधिकतम धनात्मक कार्य है, शून्य नहीं।
- (d)उपर्युक्त में से कोई नहीं — गलत, क्योंकि विकल्प (c) शून्य कार्य के लिए एक वास्तविक और सही शर्त है — बल के लंबवत् विस्थापन।
अवधारणा
किसी अचर बल द्वारा किया गया कार्य अदिश गुणनफल W = F.s = F × s × cos(θ) होता है, जहाँ θ बल और विस्थापन के बीच का कोण है। कोज्या गुणक का अर्थ है कि केवल विस्थापन की दिशा वाला बल-घटक ही कार्य करता है। कार्य θ = 0 डिग्री पर अधिकतम धनात्मक, θ = 180 डिग्री पर अधिकतम ऋणात्मक, और θ = 90 डिग्री पर शून्य होता है।
प्रश्न को इस रूप में पढ़िए कि 'cos(θ) = 0 कब होता है?'। कोज्या केवल 90 डिग्री पर शून्य होती है, अतः विस्थापन बल के लंबवत् होना चाहिए। शून्य कार्य के शास्त्रीय उदाहरण हैं — वृत्तीय कक्षा में उपग्रह (गुरुत्व/अभिकेंद्री बल सदैव वेग के लंबवत् रहता है), सिर पर बोझ लेकर क्षैतिज चलता कुली (भार ऊर्ध्वाधर है, गति क्षैतिज), और फर्श पर सरकते पिंड पर अभिलंब प्रतिक्रिया।
मुख्य तथ्य
- W = F × s × cos(θ); कार्य तब शून्य होता है जब θ = 90 डिग्री हो (बल विस्थापन के लंबवत्)।
- कार्य θ = 0 डिग्री पर अधिकतम धनात्मक और θ = 180 डिग्री पर अधिकतम ऋणात्मक होता है।
- अभिकेंद्री बल शून्य कार्य करता है — वृत्तीय गति में वह सदैव वेग के लंबवत् रहता है।
- कार्य एक अदिश राशि है; उसका चिह्न cos(θ) से तय होता है।
केवल बल के समकोण पर हुआ विस्थापन ही शून्य कार्य देता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- यह मान लेना कि गतिशील पिंड पर लगने वाला बल कार्य अवश्य करेगा — लंबवत् बल कोई कार्य नहीं करता।
- θ = 0 (अधिकतम धनात्मक कार्य) और θ = 180 (अधिकतम ऋणात्मक कार्य) को आपस में गड्डमड्ड कर देना।
कार्य 'कब शून्य/ऋणात्मक होता है' के रूप में या कुली/उपग्रह के उदाहरण से पूछा जाता है — सदैव W = F × s × cos(θ) पर लौटिए।
संबंधित PYQ
कोई सरल मशीन किसी व्यक्ति की किस प्रकार सहायता करती है?
- (a) कम कार्य करने में।
- (b) कम बल से उतना ही कार्य करने में।
- (c) उतना ही कार्य करने में।
- (d) उतना ही कार्य कहीं अधिक तेज़ी से करने में।
उत्तर(b) कम बल से उतना ही कार्य करने में।
वही अंतर्निहित राशि — यांत्रिक कार्य (बल × दूरी)। वहाँ सरल मशीन कुल कार्य को स्थिर रखते हुए आवश्यक बल घटा देती है; यहाँ कार्य इसलिए शून्य है क्योंकि विस्थापन की दिशा में बल का कोई घटक नहीं है। दोनों कार्य की परिभाषा W = F.s को ही जाँचते हैं।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
कोई कुली सिर पर बोझ रखकर क्षैतिज चबूतरे पर चलता है। बोझ पर गुरुत्व बल द्वारा किया गया कार्य है
- (a)धनात्मक
- (b)ऋणात्मक
- (c)शून्य
- (d)अनंत
उत्तर(c) शून्य — क्षैतिज विस्थापन ऊर्ध्वाधर गुरुत्व बल के लंबवत् है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
वृत्त में एकसमान गति करते पिंड पर अभिकेंद्री बल द्वारा किया गया कार्य है
- (a)अधिकतम
- (b)धनात्मक
- (c)ऋणात्मक
- (d)शून्य
उत्तर(d) शून्य — अभिकेंद्री बल सदैव विस्थापन/वेग के लंबवत् होता है।