किसी दूरबीन में, नेत्रिका (eyepiece) लेन्स की तुलना में अभिदृश्यक (objective) लेन्स में
- (a)अधिक फोकस दूरी और बड़े द्वारक (aperture) होता है
- (b)अधिक फोकस दूरी और छोटे द्वारक होता है
- (c)कम फोकस दूरी और बड़े द्वारक होता है
- (d)कम फोकस दूरी और छोटे द्वारक होता है
उत्तर
क्यों
सही — A, अधिक फोकस दूरी और बड़े द्वारक (aperture) होता है। खगोलीय अपवर्तक दूरबीन में अभिदृश्यक लेन्स लंबी फोकस दूरी और चौड़े द्वारक के साथ बनाया जाता है, जबकि नेत्रिका छोटी फोकस दूरी वाला छोटा लेन्स होती है। अभिदृश्यक की लंबी फोकस दूरी उच्च कोणीय आवर्धन देती है (M = f_अभिदृश्यक / f_नेत्रिका), और चौड़ा द्वारक अधिक प्रकाश एकत्र कर विभेदन सुधारता है, जिससे मंद और दूरस्थ पिंड स्पष्ट दिखाई देते हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)अधिक फोकस दूरी और छोटे द्वारक होता है — फोकस दूरी के बारे में सही, पर द्वारक के बारे में गलत। छोटा अभिदृश्यक बहुत कम प्रकाश एकत्र करेगा; अभिदृश्यक को ही चौड़ा लेन्स होना चाहिए ताकि वह मंद, दूरस्थ पिंडों से पर्याप्त प्रकाश समेट सके।
- (c)कम फोकस दूरी और बड़े द्वारक होता है — यह फोकस दूरी का नियम उलट देता है। अभिदृश्यक की छोटी फोकस दूरी आवर्धन क्षमता घटा देगी, क्योंकि आवर्धन f_अभिदृश्यक / f_नेत्रिका होता है।
- (d)कम फोकस दूरी और छोटे द्वारक होता है — दोनों ही बातों में गलत — यह वस्तुतः नेत्रिका का वर्णन है (छोटी फोकस दूरी, छोटा आकार), अभिदृश्यक का नहीं।
अवधारणा
अपवर्तक दूरबीन दो अभिसारी लेन्सों का उपयोग करती है। अभिदृश्यक (जो वस्तु की ओर होता है) की फोकस दूरी बड़ी और द्वारक बड़ा होता है; नेत्रिका (जो आँख के पास होती है) की फोकस दूरी छोटी होती है। अभिदृश्यक दूरस्थ वस्तु का वास्तविक, उल्टा प्रतिबिंब अपने फोकस पर बनाता है, और नेत्रिका उस प्रतिबिंब को आवर्धित करती है। सामान्य समायोजन में आवर्धन क्षमता M = f_अभिदृश्यक / f_नेत्रिका होती है।
अभिदृश्यक का अभिकल्प दो स्वतंत्र कार्यों से तय होता है। आवर्धन के लिए अभिदृश्यक की फोकस दूरी लंबी और नेत्रिका की छोटी चाहिए, क्योंकि उनका अनुपात ही आवर्धन है। मंद पिंडों को स्पष्ट देखने के लिए बड़ा द्वारक चाहिए, ताकि अधिक प्रकाश एकत्र हो और सूक्ष्म विवरण विभेदित हो सके। दोनों ही आवश्यकताएँ अभिदृश्यक को बड़ा और लंबी फोकस दूरी वाला बनाती हैं — इसीलिए वास्तविक दूरबीनों के अभिदृश्यक भौतिक रूप से बड़े होते हैं।
मुख्य तथ्य
- सामान्य समायोजन में दूरबीन की आवर्धन क्षमता: M = f_अभिदृश्यक / f_नेत्रिका।
- अभिदृश्यक की फोकस दूरी लंबी और द्वारक बड़ा होता है; नेत्रिका की फोकस दूरी छोटी होती है।
- बड़ा द्वारक अधिक प्रकाश एकत्र करता है (अधिक चमकीला प्रतिबिंब) और विभेदन क्षमता बढ़ाता है।
- इसकी तुलना संयुक्त सूक्ष्मदर्शी से कीजिए, जिसमें दोनों लेन्स छोटी फोकस दूरी वाले होते हैं और अभिदृश्यक की फोकस दूरी नेत्रिका से छोटी होती है।

आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- दूरबीन (अभिदृश्यक = लंबी फोकस दूरी) को सूक्ष्मदर्शी (अभिदृश्यक = छोटी फोकस दूरी) के साथ भ्रमित कर लेना।
- यह समझ लेना कि बड़ा अभिदृश्यक केवल आवर्धन के लिए है — उसका मुख्य अतिरिक्त कार्य प्रकाश एकत्र करना है।
प्रकाशिक उपकरण 'अभिदृश्यक बनाम नेत्रिका की तुलना कीजिए' या 'किस लेन्स की फोकस दूरी अधिक है' के रूप में पूछे जाते हैं — दूरबीन के लिए M = f_अभिदृश्यक / f_नेत्रिका याद रखिए।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
सामान्य समायोजन में खगोलीय दूरबीन की आवर्धन क्षमता किससे दी जाती है?
- (a)f_e / f_o
- (b)f_o / f_e
- (c)f_o × f_e
- (d)f_o + f_e
उत्तर(b) f_o / f_e — अभिदृश्यक की फोकस दूरी और नेत्रिका की फोकस दूरी का अनुपात। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
दूरबीन की तुलना में संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में अभिदृश्यक की फोकस दूरी होती है
- (a)बहुत अधिक
- (b)नेत्रिका के बराबर
- (c)छोटी (नेत्रिका से कम)
- (d)अनंत
उत्तर(c) छोटी — दूरबीन के अभिदृश्यक के विपरीत, सूक्ष्मदर्शी का अभिदृश्यक छोटी फोकस दूरी वाला होता है।