निम्नलिखित अपचयोपचय अभिक्रिया (Redox reaction) में, कौन-सा यौगिक एक अपचायक (Reducing agent) के रूप में क्रियाशील है ? N2H4 + 2H2O2 → N2 + 4H2O
- (a)H2O2
- (b)N2H4
- (c)N2
- (d)H2O
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, N2H4 (हाइड्राज़ीन)। अपचायक वह स्पीशीज़ है जो स्वयं ऑक्सीकृत होती है — वह इलेक्ट्रॉन खोकर उन्हें किसी दूसरे को दे देती है। हाइड्राज़ीन में नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था -2 है, और उत्पाद N2 में यह बढ़कर 0 हो जाती है, इसलिए हाइड्राज़ीन ऑक्सीकृत होता है और अपचायक का कार्य करता है। हाइड्रोजन परॉक्साइड, जिसकी ऑक्सीजन -1 से घटकर -2 हो जाती है, अपचयित होता है और इसलिए ऑक्सीकारक है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)H2O2 — हाइड्रोजन परॉक्साइड ऑक्सीकारक है, अपचायक नहीं। इसकी ऑक्सीजन -1 अवस्था से घटकर -2 (जल में) हो जाती है, अर्थात् यह इलेक्ट्रॉन देने के बजाय ग्रहण करता है।
- (c)N2 — नाइट्रोजन गैस उत्पाद है, अभिकारक नहीं, इसलिए वह अभिक्रिया को चलाने वाला कारक नहीं हो सकती। यह तो केवल उस नाइट्रोजन का ऑक्सीकृत रूप है जो हाइड्राज़ीन में थी।
- (d)H2O — जल केवल अभिक्रिया का उत्पाद है। इस परिवर्तन में यह न ऑक्सीकृत होता है न अपचयित, इसलिए यहाँ ऑक्सीकारक या अपचायक के रूप में इसकी कोई भूमिका नहीं है।
अवधारणा
अपचयोपचय अभिक्रिया में एक स्पीशीज़ ऑक्सीकृत होती है (इलेक्ट्रॉन खोती है, उसका ऑक्सीकरण अंक बढ़ता है) जबकि दूसरी अपचयित होती है (इलेक्ट्रॉन प्राप्त करती है, उसका ऑक्सीकरण अंक घटता है)। जो स्पीशीज़ ऑक्सीकृत होती है वही अपचायक है, क्योंकि वह दूसरी को इलेक्ट्रॉन देती है; जो अपचयित होती है वह ऑक्सीकारक है। ऑक्सीकरण अंकों का अनुसरण करना ही यह बताने का विश्वसनीय तरीका है कि कौन क्या है।
ऑक्सीकरण अंक निर्धारित कीजिए और देखिए कि प्रत्येक प्रमुख तत्व किस दिशा में जाता है। नाइट्रोजन N2H4 में -2 से चढ़कर N2 में 0 हो जाती है — यह ऑक्सीकरण है, अतः हाइड्राज़ीन अपचायक है; ऑक्सीजन H2O2 में -1 से गिरकर जल में -2 हो जाती है — यह अपचयन है, अतः परॉक्साइड ऑक्सीकारक है। जाल यह है कि अभ्यर्थी अधिक क्रियाशील प्रतीत होने वाले परॉक्साइड को चुन ले, जो वास्तव में ऑक्सीकारक है।
मुख्य तथ्य
- अपचायक वह स्पीशीज़ है जो ऑक्सीकृत होती है (इलेक्ट्रॉन खोती है); ऑक्सीकारक वह है जो अपचयित होती है (इलेक्ट्रॉन प्राप्त करती है)।
- N2H4 में नाइट्रोजन -2 पर है और N2 में बढ़कर 0 हो जाती है, अतः हाइड्राज़ीन ऑक्सीकृत होता है।
- H2O2 में ऑक्सीजन -1 पर है और जल में घटकर -2 हो जाती है, अतः परॉक्साइड अपचयित होता है।
- हाइड्रोजन परॉक्साइड साथी के अनुसार ऑक्सीकारक या अपचायक — दोनों में से कोई भी — बन सकता है, किंतु यहाँ वह ऑक्सीकारक है।
नाइट्रोजन का ऑक्सीकरण अंक बढ़ता है (ऑक्सीकरण), इसलिए हाइड्राज़ीन अपचायक है — उत्तर (b) है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- अपचायक वही है जो स्वयं ऑक्सीकृत होता है — नाम उलटा-सा लगता है, इसलिए अंतर्ज्ञान के बजाय इलेक्ट्रॉनों का अनुसरण कीजिए।
- N2 या H2O जैसा कोई उत्पाद कभी कारक नहीं हो सकता; केवल अभिकारक ही ऑक्सीकारक या अपचायक हो सकते हैं।
अपचयोपचय ‘ऑक्सीकारक या अपचायक पहचानिए’ के रूप में पूछा जाता है — अभिकारकों को ऑक्सीकरण अंक दीजिए और देखिए कि कौन-सा तत्व ऊपर जाता है (अपचायक) और कौन-सा नीचे (ऑक्सीकारक)।
संबंधित PYQ
इस्पात/लोहे के उत्पादन हेतु वात्या भट्टी में डाले जाने वाले आवेश की सामग्रियों में कोक भी एक है। इसका कार्य है : I. अपचायक के रूप में कार्य करना। II. लौह अयस्क के साथ जुड़ी सिलिका को हटाना। III. ईंधन के रूप में कार्य करते हुए ऊष्मा प्रदान करना। IV. ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करना। इन कथनों में से :
- (a) I और II सही हैं
- (b) II और IV सही हैं
- (c) I और III सही हैं
- (d) III और IV सही हैं
उत्तर(c) I और III सही हैं
अपचायक पहचानने का वही विचार। वात्या भट्टी में कोक लौह ऑक्साइड का अपचयन करके लोहा देता है (अपचायक) और ऊष्मा भी प्रदान करता है; यहाँ हाइड्राज़ीन वह स्पीशीज़ है जो ऑक्सीकृत होती है, इसलिए वह अपचायक की भूमिका निभाती है — दोनों यह जानने पर अंक देते हैं कि अपचायक ही इलेक्ट्रॉन-दाता होता है।
NDA_GAT_2024_II_Q1162024निम्नलिखित में से कौन-सा ऑक्सीकरण अभिक्रिया का उदाहरण है ?
- (a) जल का जमना
- (b) जल में चीनी का घुलना
- (c) लोहे में जंग लगना
- (d) पेट्रोल का उबलना
उत्तर(c) लोहे में जंग लगना — लोहा ऑक्सीजन से संयोग करता है, इसलिए वह ऑक्सीकृत होता है।
वही अपचयोपचय विषय। वहाँ अभ्यर्थियों को भौतिक परिवर्तनों के बीच ऑक्सीकरण (लोहे का ऑक्सीजन ग्रहण करना) पहचानना है; यहाँ ऑक्सीकरण अंकों का अनुसरण करके यह देखना है कि ऑक्सीकृत होने वाली स्पीशीज़, हाइड्राज़ीन, ही अपचायक है।
अभ्यास
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
अभिक्रिया Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu में अपचायक है
- (a)Cu
- (b)Zn
- (c)CuSO4
- (d)ZnSO4
उत्तर(b) Zn — जिंक 0 से +2 तक ऑक्सीकृत होता है, इसलिए वही अपचायक है। - अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
अपचयोपचय अभिक्रिया में अपचायक वह स्पीशीज़ है जो
- (a)इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती है
- (b)अपचयित होती है
- (c)इलेक्ट्रॉन खोती है
- (d)उत्प्रेरक का कार्य करती है
उत्तर(c) इलेक्ट्रॉन खोती है — दूसरी स्पीशीज़ का अपचयन करते हुए वह स्वयं ऑक्सीकृत होती है।