निम्नलिखित में से कौन-सा ऊतक दो अस्थियों को जोड़ने में सहायता करता है ?
- (a)कंडरा (टेंडन)
- (b)स्नायु (लिगामेंट)
- (c)अवकाशी (एरिओलर) ऊतक
- (d)उपास्थि (कार्टिलेज)
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, स्नायु (लिगामेंट)। स्नायु सघन तंतुमय संयोजी ऊतक की मजबूत और कुछ हद तक प्रत्यास्थ पट्टियाँ हैं जो किसी संधि पर एक अस्थि को दूसरी अस्थि से जोड़ती हैं, कंकाल को बाँधे रखती हैं और संधि को स्थायित्व देती हैं (जैसे घुटने के क्रूसिएट स्नायु फीमर को टिबिया से जोड़ते हैं)। याद रखने का नियम है — 'अस्थि-से-अस्थि = स्नायु'।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)कंडरा (टेंडन) — कंडरा पेशी को अस्थि से जोड़ती है, अस्थि को अस्थि से नहीं — यह संकुचित होती हुई पेशी के खिंचाव को कंकाल तक पहुँचाती है। इसे स्नायु से भ्रमित करना आसान है; परीक्षा ठीक यही अंतर जाँच रही है।
- (c)अवकाशी (एरिओलर) ऊतक — अवकाशी (शिथिल संयोजी) ऊतक अंगों के बीच के रिक्त स्थान भरता है, आंतरिक अंगों को सहारा देता है और त्वचा के नीचे रहता है — यह भराव/सहारा देने वाला ऊतक है, अस्थि-से-अस्थि जोड़ने वाला नहीं।
- (d)उपास्थि (कार्टिलेज) — उपास्थि एक सहारा देने वाला संयोजी ऊतक है जो संधियों में गद्दी का काम करता है तथा कान, नाक और श्वासनली को आकार देता है। यह अस्थियों के सिरों को ढँकती है और आघात सोखती है, किंतु दो अस्थियों को वास्तव में बाँधने वाली पट्टी स्नायु ही है।
अवधारणा
संयोजी ऊतक शरीर की संरचनाओं को बाँधते, सहारा देते और जोड़ते हैं। इनमें दो तंतुमय ऊतक प्रायः भ्रमित कर देते हैं: स्नायु अस्थि को अस्थि से जोड़ता है, जबकि कंडरा पेशी को अस्थि से जोड़ती है। अवकाशी ऊतक एक शिथिल भराव-ऊतक है और उपास्थि संधियों तथा नाक/कान में पाया जाने वाला दृढ़ किंतु लचीला सहारा-ऊतक है।
यहाँ केवल एक ही भेद जाँचा जा रहा है — 'अस्थि को अस्थि से क्या जोड़ता है'। विकल्पों को उनके जुड़ाव के आधार पर छाँटिए: कंडरा = पेशी-से-अस्थि, स्नायु = अस्थि-से-अस्थि। यही एक पंक्ति कंडरा को तुरंत बाहर कर देती है और स्नायु शेष रह जाता है, क्योंकि अवकाशी ऊतक और उपास्थि दो अस्थियों को आपस में नहीं बाँधते।
मुख्य तथ्य
- स्नायु (लिगामेंट) = सघन तंतुमय संयोजी ऊतक जो अस्थि को अस्थि से जोड़ता है (संधि को स्थायित्व देता है)।
- कंडरा (टेंडन) = तंतुमय संयोजी ऊतक जो पेशी को अस्थि से जोड़ती है।
- उपास्थि = लचीला संयोजी ऊतक जो संधियों में गद्दी बनाता है तथा नाक, कान और श्वासनली के वलय बनाता है।
- अवकाशी ऊतक = शिथिल संयोजी ऊतक जो रिक्त स्थान भरता है और अंगों तथा त्वचा को सहारा देता है।

आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- कंडरा और स्नायु को आपस में बदल देना — कंडरा पेशी-से-अस्थि है, स्नायु अस्थि-से-अस्थि।
- उपास्थि इसलिए चुन लेना कि वह संधियों पर होती है — वह गद्दी बनाती है, किंतु दो अस्थियों को बाँधती नहीं।
ऊतकों पर प्रश्न 'कौन-सा ऊतक X को Y से जोड़ता है' के रूप में आते हैं — कंडरा और स्नायु का जुड़ाव-युग्म याद रखें।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
कौन-सा ऊतक पेशी को अस्थि से जोड़ता है ?
- (a)स्नायु (लिगामेंट)
- (b)कंडरा (टेंडन)
- (c)उपास्थि
- (d)अवकाशी ऊतक
उत्तर(b) कंडरा (टेंडन) — कंडरा पेशीय बल को अस्थि तक पहुँचाती है (पेशी-से-अस्थि)। - अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
बाह्य कर्ण तथा नाक के अग्र भाग का ढाँचा बनाने वाला ऊतक है
- (a)अस्थि
- (b)स्नायु
- (c)उपास्थि
- (d)कंडरा
उत्तर(c) उपास्थि — एक दृढ़ किंतु लचीला संयोजी ऊतक।