भारत के संविधान की किस अनुसूची में, दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता के बारे में उपबंध किया गया है ?
- (a)नौवीं अनुसूची
- (b)दसवीं अनुसूची
- (c)ग्यारहवीं अनुसूची
- (d)छठी अनुसूची
उत्तर
क्यों
सही — B, दसवीं अनुसूची. संसद और राज्य विधान-मंडलों के सदस्यों को दल परिवर्तन के आधार पर निरर्ह ठहराने के उपबंध दसवीं अनुसूची में हैं, जिसे संविधान में 52वें संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया । यह पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष या सभापति) को दल-बदल के प्रश्नों पर निर्णय करने की शक्ति देती है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)नौवीं अनुसूची — नौवीं अनुसूची (पहले संशोधन, 1951 द्वारा जोड़ी गई) उन विधियों — मुख्यतः भूमि-सुधार विधियों — की सूची देती है, जिन्हें मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर अमान्य किए जाने से संरक्षण प्राप्त है । इसका दल-बदल से कोई संबंध नहीं ।
- (c)ग्यारहवीं अनुसूची — ग्यारहवीं अनुसूची (73वें संशोधन, 1992 द्वारा जोड़ी गई) पंचायतों को सौंपे गए 29 विषयों की सूची देती है । यह दल-बदल से संबंधित नहीं है ।
- (d)छठी अनुसूची — छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन का उपबंध स्वायत्त ज़िला परिषदों के माध्यम से करती है — इसका दल-बदल से कोई संबंध नहीं ।
अवधारणा
दल-बदल विरोधी विधि का उद्देश्य ऐसे विधायकों को निरर्ह ठहराकर राजनीतिक दल-बदल पर अंकुश लगाना है जो स्वेच्छा से अपने दल की सदस्यता छोड़ दें या दल के व्हिप की अवहेलना करें । इसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा लाया गया, जिसने संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़ी ।
अनुसूचियों को उस संशोधन से याद रखिए जिसने उन्हें जोड़ा: 52वें संशोधन ने दसवीं अनुसूची दी (दल-बदल विरोधी), जबकि 73वें और 74वें संशोधन (1992) ने ग्यारहवीं (पंचायत) और बारहवीं (नगरपालिका) अनुसूचियाँ दीं । नौवीं अनुसूची 'संरक्षित विधियों' की पुरानी सूची है, और छठी अनुसूची जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है ।
मुख्य तथ्य
- दसवीं अनुसूची = दल-बदल विरोधी विधि; 52वें संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ी गई ।
- निरर्हता के प्रश्नों पर निर्णय पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष / सभापति) करते हैं ।
- नौवीं अनुसूची (पहला संशोधन, 1951) = वे विधियाँ जो मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर न्यायिक पुनरीक्षण से संरक्षित हैं ।
- ग्यारहवीं अनुसूची (पंचायत, 29 विषय) और बारहवीं अनुसूची (नगरपालिका, 18 विषय) 73वें और 74वें संशोधनों (1992) द्वारा जोड़ी गईं ।
दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता दसवीं अनुसूची में है (विकल्प B) ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- नौवीं (संरक्षित विधियाँ), दसवीं (दल-बदल विरोधी), ग्यारहवीं (पंचायत) और बारहवीं (नगरपालिका) अनुसूचियों को आपस में गड्डमड्ड कर देना ।
- यह मान लेना कि दल-बदल का निर्णय पीठासीन अधिकारी के बजाय किसी न्यायालय के पास है ।
सीधे पूछा जाता है ('किस अनुसूची में दल-बदल विरोधी उपबंध हैं') अथवा अनुसूची-से-विषय सुमेलन के रूप में ।
संबंधित PYQ
भारत के संविधान की निम्नलिखित में से किस एक अनुसूची में दल-बदल विरोधी अधिनियम से संबंधित उपबंध हैं ?
- (a) दूसरी अनुसूची
- (b) पाँचवीं अनुसूची
- (c) आठवीं अनुसूची
- (d) दसवीं अनुसूची
उत्तर(d) दसवीं अनुसूची
बिलकुल यही तथ्य — UPSC प्रारंभिक 1998 ने पूछा कि दल-बदल विरोधी उपबंध किस अनुसूची में हैं, और उत्तर दसवीं अनुसूची ही है, ठीक जैसा इस NDA प्रश्न में है ।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
दल-बदल विरोधी उपबंध संविधान में किस संशोधन द्वारा जोड़े गए ?
- (a)42वाँ संशोधन, 1976
- (b)44वाँ संशोधन, 1978
- (c)52वाँ संशोधन, 1985
- (d)61वाँ संशोधन, 1989
उत्तर(c) 52वाँ संशोधन, 1985 — इसी ने दसवीं अनुसूची जोड़ी । - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
दसवीं अनुसूची के अंतर्गत दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता के प्रश्नों का निर्णय कौन करता है ?
- (a)राष्ट्रपति
- (b)उच्चतम न्यायालय
- (c)निर्वाचन आयोग
- (d)सदन का पीठासीन अधिकारी
उत्तर(d) सदन का पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष / सभापति) ।