महात्मा गांधी की दांडी मार्च से प्रेरित होकर सी. राजगोपालाचारी ने तामिलनाडु में कहां से कहां तक नमक मार्च का नेतृत्व किया ?
- (a)तिरुनेलवेली से नागरकोइल
- (b)कांचीपुरम से महाबलीपुरम
- (c)तंजौर तट पर तिरुचिरापल्ली (त्रिचिनोपोली) से वेदारण्यम
- (d)चेन्नई से वेल्लोर
उत्तर
क्यों
सही — C, तंजौर तट पर तिरुचिरापल्ली (त्रिचिनोपोली) से वेदारण्यम. जब 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन आरंभ हुआ, तो सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) ने गांधीजी की दांडी मार्च का तमिलनाडु-संस्करण संगठित किया: तिरुचिरापल्ली (त्रिचिनोपोली) से तंजौर (तंजावुर) तट के तटवर्ती गाँव वेदारण्यम तक लगभग 150 मील लंबा नमक सत्याग्रह मार्च । यह मार्च 13 से 28 अप्रैल 1930 तक चला; समुद्र तक पहुँचने पर स्वयंसेवकों ने ब्रिटिश नमक क़ानून की अवहेलना करते हुए नमक बनाया और गिरफ़्तार कर लिए गए ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)तिरुनेलवेली से नागरकोइल — यह दक्षिण तमिलनाडु के दो असंबद्ध स्थानों का युग्म है; राजाजी का 1930 का नमक मार्च त्रिचिनोपोली से वेदारण्यम तक था, तिरुनेलवेली-नागरकोइल पट्टी में नहीं ।
- (b)कांचीपुरम से महाबलीपुरम — कांचीपुरम और महाबलीपुरम चेन्नई के निकट मंदिर-विरासत के नगर हैं, नमक सत्याग्रह का मार्ग नहीं, जो तंजौर तट पर वेदारण्यम की नमक-क्यारियों पर समाप्त हुआ था ।
- (d)चेन्नई से वेल्लोर — नमक बनाने वाले तट से दोनों ही भीतरी ओर पड़ते हैं; नमक मार्च को वेदारण्यम में समुद्र तक पहुँचना ही था, इसलिए नमक सत्याग्रह के लिए चेन्नई-वेल्लोर मार्ग का कोई अर्थ नहीं बनता ।
अवधारणा
सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) का आरंभ गांधीजी की दांडी मार्च (साबरमती आश्रम से गुजरात तट पर दांडी तक, 12 मार्च-6 अप्रैल 1930) से हुआ, जिसने ब्रिटिश नमक-एकाधिकार को तोड़ा । इसके बाद पूरे भारत में समानांतर नमक सत्याग्रह चलाए गए — तमिलनाडु में वेदारण्यम पर सी. राजगोपालाचारी और मालाबार में के. केलप्पन — और हर एक ने समुद्री जल से नमक बनाकर नमक क़ानून की अवहेलना की ।
सभी विकल्प तमिलनाडु के स्थान-युग्म हैं, इसलिए कुंजी नमक मार्च के तर्क में है: उसका अंत समुद्र पर, नमक-क्यारियों पर होना चाहिए । तंजौर तट पर स्थित वेदारण्यम ठीक ऐसा ही नमक उत्पादक तट है, इसीलिए राजाजी ने अपने भीतरी प्रारंभ-बिंदु त्रिचिनोपोली से चलकर उसे गंतव्य चुना ।
मुख्य तथ्य
- गांधीजी की दांडी मार्च: साबरमती आश्रम से दांडी (गुजरात तट), 12 मार्च-6 अप्रैल 1930 ।
- राजाजी का वेदारण्यम नमक मार्च: त्रिचिनोपोली (तिरुचिरापल्ली) से वेदारण्यम (तंजौर तट), 13-28 अप्रैल 1930 ।
- दोनों ने समुद्री जल से नमक बनाकर ब्रिटिश नमक-कर/एकाधिकार की अवहेलना की ।
- वेदारण्यम मार्च 1930 के नमक सत्याग्रह में तमिलनाडु का प्रमुख योगदान था ।
- सी. राजगोपालाचारी आगे चलकर स्वतंत्र भारत के पहले (और एकमात्र) भारतीय गवर्नर-जनरल बने ।

आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- राजाजी के त्रिचिनोपोली-वेदारण्यम मार्ग को गांधीजी के साबरमती-दांडी मार्ग से गड्डमड्ड कर देना ।
- जिस मार्च का तटवर्ती (नमक बनाने वाला) होना अनिवार्य है, उसके लिए भीतरी स्थानों का युग्म चुन लेना ।
कौन-सा क्षेत्रीय नमक सत्याग्रह किसने चलाया, और कहाँ से कहाँ तक ।
संबंधित PYQ
महात्मा गांधी ने 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन कहाँ से आरंभ किया था ?
- (a) सेवाग्राम
- (b) दांडी
- (c) साबरमती
- (d) वर्धा
उत्तर(c) साबरमती
वही घटना जिसने राजाजी को प्रेरित किया — 1930 का नमक सत्याग्रह, जिससे सविनय अवज्ञा आंदोलन आरंभ हुआ; यहाँ गांधीजी के प्रारंभ-बिंदु (साबरमती) पर परखा गया है ।
सूची I (घटनाएँ) को सूची II (परिणाम) से सुमेलित कीजिए : I. मॉर्ले-मिंटो सुधार, II. साइमन कमीशन, III. चौरी-चौरा कांड, IV. दांडी मार्च — तथा A) देशव्यापी आंदोलन, B) एक आंदोलन की वापसी, C) सांप्रदायिक निर्वाचक मंडल, D) सांप्रदायिक उपद्रव, E) नमक का अवैध निर्माण ।
- (a) I-C, II-D, III-E, IV-B
- (b) I-D, II-A, III-B, IV-C
- (c) I-B, II-C, III-D, IV-E
- (d) I-C, II-A, III-B, IV-E
उत्तर(d) I-C, II-A, III-B, IV-E — दांडी मार्च का युग्म नमक के अवैध निर्माण से बनता है
यह दांडी मार्च को उसके परिभाषक कृत्य — नमक के अवैध निर्माण — से जोड़ता है, अर्थात् नमक क़ानून की वही अवहेलना जिसे राजाजी ने वेदारण्यम में दोहराया ।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन का सूत्रपात करने वाली गांधीजी की दांडी मार्च किस स्थान से आरंभ हुई थी ?
- (a)वर्धा
- (b)साबरमती आश्रम
- (c)सेवाग्राम
- (d)पोरबंदर
उत्तर(b) साबरमती आश्रम (अहमदाबाद के निकट), जिसका अंत गुजरात तट पर दांडी में हुआ । - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
स्वतंत्र भारत में सी. राजगोपालाचारी को निम्नलिखित में से किस रूप में स्मरण किया जाता है ?
- (a)भारत के प्रथम राष्ट्रपति
- (b)भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर-जनरल
- (c)भारत के प्रथम गृह मंत्री
- (d)भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति
उत्तर(b) भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर-जनरल (1948-50) ।