M₁ द्रव्यमान का एक रेल वैगन (ऊपर से खुला) एक सीधी पटरी पर चाल v₁ से गति कर रहा है । कुछ देर बाद, वर्षा के कारण इसमें आंशिक रूप से जल भर जाता है, जिससे वैगन का द्रव्यमान M₂ और चाल v₂ हो जाती है । यह मानते हुए कि वर्षा ऊर्ध्वाधर हो रही है और वैगन के भीतर जल स्थिर है, दोनों चालों v₁ और v₂ के बीच संबंध क्या है ?
- (a)v₁ = v₂
- (b)½ M₁v₁² < ½ M₂v₂²
- (c)M₁v₁ = M₂v₂
- (d)M₁v₁ < M₂v₂
उत्तर
क्यों
सही — C, M₁v₁ = M₂v₂। वर्षा ऊर्ध्वाधर रूप से गिरती है, इसलिए यह द्रव्यमान तो जोड़ती है परंतु कोई क्षैतिज संवेग नहीं, और वैगन-सह-जल तंत्र पर कोई बाह्य क्षैतिज बल कार्य नहीं करता। इसलिए क्षैतिज रैखिक संवेग संरक्षित रहता है: प्रारंभिक क्षैतिज संवेग M₁v₁, अंतिम क्षैतिज संवेग M₂v₂ के बराबर होता है।
चूँकि M₂, M₁ से बड़ा है, इसका अर्थ यह भी है कि वैगन धीमी हो जाती है (v₂ < v₁)।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)v₁ = v₂ — ऐसा द्रव्यमान जोड़ना जो अग्रगामी संवेग नहीं रखता, संवेग को स्थिर रखने के लिए वैगन को धीमा करना ही होगा, इसलिए v₂, v₁ से कम होगा, बराबर नहीं।
- (b)½ M₁v₁² < ½ M₂v₂² — वास्तव में यहाँ गतिज ऊर्जा घटती है। चूँकि संवेग p संरक्षित है, KE = p²/2M होता है और M बढ़ता है, अतः ½M₂v₂², ½M₁v₁² से कम होता है — यह असमानता उलटी दिशा में है (जल के अप्रत्यास्थ ग्रहण में ऊर्जा क्षय होती है)।
- (d)M₁v₁ < M₂v₂ — क्षैतिज संवेग संरक्षित रहता है, बढ़ता नहीं; उस दिशा में अंतिम संवेग को प्रारंभिक से अधिक बनाने के लिए कोई अग्र-बल नहीं है। अतः यह एक समता है, M₁v₁ = M₂v₂, 'से कम' नहीं।
अवधारणा
यह संवेग संरक्षण के नियम द्वारा शासित एक परिवर्ती-द्रव्यमान (अप्रत्यास्थ अभिवृद्धि) समस्या है। जब शून्य वेग वाला द्रव्यमान गति की दिशा में जोड़ा जाता है और उस दिशा में कोई बाह्य बल कार्य नहीं करता, तो उस दिशा में संवेग स्थिर रहता है जबकि चाल घट जाती है। गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती क्योंकि जल को ग्रहण करना एक अप्रत्यास्थ प्रक्रिया है।
कुंजी है ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज दिशाओं को अलग रखना। ऊर्ध्वाधर दिशा में गुरुत्व और वर्षा कार्य करते हैं, परंतु क्षैतिज दिशा में वर्षा कोई संवेग नहीं जोड़ती और कुछ भी वैगन को नहीं धकेलता। इसलिए केवल क्षैतिज संवेग संरक्षित रहता है, जिससे M₁v₁ = M₂v₂ मिलता है — और, जाँच के तौर पर, गतिज ऊर्जा की हानि विकल्प (b) को अस्वीकृत कर देती है।
मुख्य तथ्य
- ऊर्ध्वाधर रूप से गिरने वाली वर्षा द्रव्यमान जोड़ती है परंतु कोई क्षैतिज संवेग नहीं।
- कोई क्षैतिज बाह्य बल न होने पर, क्षैतिज संवेग संरक्षित रहता है: M₁v₁ = M₂v₂।
- अतः v₂ = (M₁/M₂)·v₁ होता है, जो v₁ से कम है क्योंकि M₂ > M₁।
- गतिज ऊर्जा घटती है (KE = p²/2M, p स्थिर और M बढ़ता हुआ) — यह अभिवृद्धि अप्रत्यास्थ है।
केवल क्षैतिज संवेग संरक्षित रहता है, जिससे M₁v₁ = M₂v₂ मिलता है — विकल्प (c)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- यह मान लेना कि द्रव्यमान जोड़े जाने पर चाल अपरिवर्तित रहती है — संवेग संरक्षित रहता है, चाल नहीं।
- यह सोचना कि गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है; जल के अप्रत्यास्थ ग्रहण से ऊर्जा क्षय होती है, इसलिए विकल्प (b) उलटा है।
यह एक संकल्पनात्मक यांत्रिकी प्रश्न के रूप में पूछा जाता है कि जब किसी गतिशील पिंड में स्थिर द्रव्यमान जुड़ता है, तो कौन-सी राशि संरक्षित रहती है।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
एक गतिशील ट्रॉली पर ऊर्ध्वाधर रूप से गिरती रेत (कोई क्षैतिज बल नहीं) एकत्र होकर उसका द्रव्यमान बढ़ाती है । इसकी चाल :
- (a)बढ़ती है
- (b)घटती है
- (c)समान रहती है
- (d)शून्य हो जाती है
उत्तर(b) घटती है — द्रव्यमान बढ़ने के साथ क्षैतिज संवेग संरक्षित रहता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जब कोई वैगन ऊर्ध्वाधर रूप से गिरती वर्षा को एकत्र करती है, तो वैगन-जल तंत्र की कौन-सी राशि क्षैतिज रूप से स्थिर रहती है ?
- (a)गतिज ऊर्जा
- (b)चाल
- (c)रैखिक संवेग
- (d)त्वरण
उत्तर(c) रैखिक संवेग — क्योंकि कोई क्षैतिज बाह्य बल कार्य नहीं करता।