दही को रखने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी पद्धति सही नहीं है ?
- (a)जंगरोधी इस्पात (स्टेनलेस स्टील) के बर्तन में रखना
- (b)ताँबे के बर्तन में रखना
- (c)प्लास्टिक के बर्तन में रखना
- (d)काँच के बर्तन में रखना
उत्तर
क्यों
सही — B, दही को ताँबे के बर्तन में रखना। दही अम्लीय होता है (किण्वन से लैक्टिक अम्ल बनता है, जो इसका pH लगभग 4 से 4.6 तक ले आता है)। ताँबा एक क्रियाशील धातु है जिस पर अम्लों का प्रभाव पड़ता है, इसलिए अम्लीय दही धीरे-धीरे धातु को घोलकर घुलनशील कॉपर लवण बना देता है, जो विषाक्त होते हैं और भोजन को खराब कर देते हैं।
अतः ताँबे में रखना ही वह एकमात्र पद्धति है जो सही नहीं है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)जंगरोधी इस्पात (स्टेनलेस स्टील) के बर्तन में रखना — स्टेनलेस स्टील क्रोमियम-ऑक्साइड की परत से निष्क्रियित (passivated) होता है और दही के हल्के अम्ल से अभिक्रिया नहीं करता, इसलिए यह एक सुरक्षित, मानक भंडारण बर्तन है — एक सही पद्धति, वह अपवाद नहीं जो पूछा गया है।
- (c)प्लास्टिक के बर्तन में रखना — खाद्य-श्रेणी का प्लास्टिक लैक्टिक अम्ल के प्रति रासायनिक रूप से निष्क्रिय है और कोई धातु आयन नहीं छोड़ता, इसलिए यह दही को सुरक्षित रूप से रखता है — एक सही पद्धति।
- (d)काँच के बर्तन में रखना — काँच रासायनिक रूप से निष्क्रिय है और अम्लों के प्रति अक्रियाशील है, जो इसे दही के लिए एक आदर्श पात्र बनाता है — एक सही पद्धति, गलत नहीं।
अवधारणा
दही एक किण्वित, अम्लीय खाद्य पदार्थ है; लैक्टोबैसिलस जीवाणु लैक्टोस को लैक्टिक अम्ल में बदल देते हैं, जिससे इसका खट्टा स्वाद और निम्न pH बनता है। भंडारण बर्तन अक्रियाशील होने चाहिए ताकि अम्ल बर्तन को न ज़ंग लगाए और न ही भोजन में हानिकारक आयन घोले। ताँबे (और पीतल) जैसी क्रियाशील धातुएँ आहार अम्लों से संक्षारित हो जाती हैं, जबकि स्टेनलेस स्टील, काँच और खाद्य-श्रेणी का प्लास्टिक अक्रियाशील होते हैं।
चाल यह है कि ताँबे की पेयजल भंडारण के लिए व्यापक रूप से प्रशंसा की जाती है, इसलिए अभ्यर्थी गलती से यह मान सकता है कि यह हर चीज़ के लिए अच्छा है। परंतु साधारण जल लगभग उदासीन होता है, जबकि दही स्पष्ट रूप से अम्लीय होता है — वही ताँबा जो जल के लिए ठीक है, खट्टे दही के साथ अभिक्रिया करता है। चार विकल्पों में से उस एक क्रियाशील धातु को पहचानिए।
मुख्य तथ्य
- दही का खट्टापन किण्वन के दौरान उत्पन्न लैक्टिक अम्ल से आता है; इसका pH लगभग 4 से 4.6 है।
- ताँबा अम्लों से अभिक्रिया कर घुलनशील कॉपर लवण बनाता है; इन्हें ग्रहण करने से कॉपर विषाक्तता (मितली, उल्टी) हो सकती है।
- स्टेनलेस स्टील, काँच और खाद्य-श्रेणी का प्लास्टिक आहार अम्लों के प्रति अक्रियाशील हैं और अम्लीय भोज्य पदार्थों के लिए अनुशंसित हैं।
- वही नियम अचार, नींबू, इमली और सांभर को ताँबे या पीतल के बर्तनों में रखने से भी रोकता है।
केवल ताँबे का बर्तन दही के अम्ल से अभिक्रिया करता है, इसलिए विकल्प (b) गलत पद्धति है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- यह मान लेना कि ताँबा हर चीज़ के भंडारण के लिए अच्छा है क्योंकि यह पेयजल के लिए अनुशंसित है — जल उदासीन है, दही अम्लीय है।
- 'अक्रियाशील' को 'महँगा' से भ्रमित करना — एक सस्ता खाद्य-श्रेणी का प्लास्टिक टब दही के लिए महँगे ताँबे के बर्तन से रासायनिक दृष्टि से अधिक सुरक्षित है।
यह धातु-अम्ल क्रियाशीलता को परखने वाले 'कौन-सा सही नहीं है' प्रकार के दैनिक-रसायन शास्त्र प्रश्न के रूप में गढ़ा जाता है।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अचार और नींबू के रस को परंपरागत रूप से पीतल या ताँबे के बर्तनों में क्यों नहीं रखा जाता ?
- (a)वे बहुत भारी होते हैं
- (b)उनमें मौजूद अम्ल धातु से अभिक्रिया करता है
- (c)धातु रंग को स्थायी रूप से हरा कर देती है बिना किसी हानि के
- (d)वे अधिक तेज़ी से वाष्पित हो जाते हैं
उत्तर(b) उनमें मौजूद अम्ल धातु से अभिक्रिया करता है — जिससे विषाक्त लवण बनते हैं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सी सामग्री रासायनिक रूप से अक्रियाशील है और इसलिए अम्लीय भोज्य पदार्थों के भंडारण के लिए उपयुक्त है ?
- (a)ताँबा
- (b)लोहा
- (c)काँच
- (d)जस्ता
उत्तर(c) काँच — यह आहार अम्लों से अभिक्रिया नहीं करता।