दो सर्वसम कमानीदार तुलाएँ, S₁ और S₂, एक के बाद एक जुड़ी हुई हैं और ऊर्ध्वाधर लटकाई गई हैं, जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है । S₂ से 10 kg का एक द्रव्यमान लटका हुआ है । यदि S₁ और S₂ पर पाठ्यांक क्रमशः W₁ और W₂ हों, तो
- (a)W₁ = 5 kg और W₂ = 10 kg
- (b)W₁ = 10 kg और W₂ = 5 kg
- (c)W₁ = 5 kg और W₂ = 5 kg
- (d)W₁ = 10 kg और W₂ = 10 kg
उत्तर
क्यों
सही — D, W₁ = 10 kg और W₂ = 10 kg। दोनों तुलाएँ श्रृंखला में एक के नीचे दूसरी जुड़ी हैं, और 10 kg का भार निचली तुला S₂ से लटका है। कमानीदार तुला अपनी ही कमानी में उत्पन्न तनाव दर्शाती है — यानी उसके हुक पर खींचने वाला बल। S₂ सीधे 10 kg भार को सहारा देती है, इसलिए उसमें तनाव, और इसलिए उसका पाठ्यांक, 10 kgf होता है।
S₁, S₂ के ऊपर लटकी है और उसे भार तथा S₂ दोनों को सहारा देना होता है; चूँकि तुलाओं को आदर्श मानकर उनका अपना भार नगण्य लिया जाता है, इसलिए उसमें भी पूरा 10 kgf तनाव ही रहता है। ऊर्ध्वाधर श्रृंखला में वही भार हर कड़ी से होकर संचरित होता है, इसलिए दोनों तुलाएँ समान 10 kg दर्शाती हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)W₁ = 5 kg और W₂ = 10 kg — यह मान लेता है कि भार किसी तरह दोनों तुलाओं में बँट या आधा हो जाता है। श्रृंखला (एक के नीचे दूसरी) में जुड़ी तुलाएँ भार को नहीं बाँटतीं — वही तनाव दोनों से होकर गुजरता है, इसलिए S₁ भी पूरा 10 kg दर्शाती है, 5 kg नहीं।
- (b)W₁ = 10 kg और W₂ = 5 kg — निचली तुला S₂ सीधे 10 kg भार वहन करती है, इसलिए वह केवल 5 kg नहीं दर्शा सकती। दोनों पाठ्यांक 10 kg हैं, 10 और 5 नहीं।
- (c)W₁ = 5 kg और W₂ = 5 kg — प्रत्येक तुला पर भार को आधा करके 5 kg मानना तभी सही होता जब तुलाएँ एक-दूसरे के बराबर (समांतर में) होतीं और भार साझा करतीं। यहाँ वे श्रृंखला में हैं, इसलिए प्रत्येक पूरा 10 kg वहन करती है।
अवधारणा
कमानीदार तुला (spring balance) अपनी कमानी में उत्पन्न तनाव — यानी उसके हुक पर खींचने वाला बल — मापती है, और इसे किलोग्राम-बल के तुल्य द्रव्यमान के रूप में दर्शाती है। जब दो तुलाएँ एक के नीचे दूसरी (श्रृंखला में) लटकाई जाती हैं और भार सबसे निचली तुला से लटका हो, तो वही तनाव पूरी शृंखला में ऊपर तक संचरित होता है, जिससे तुलाओं का अपना भार नगण्य मानते हुए दोनों समान पाठ्यांक दर्शाती हैं।
यहाँ जाल यह सोचना है कि दोनों तुलाएँ भार को आपस में बाँट लेती हैं और प्रत्येक आधा पाठ्यांक दर्शाती है। भार का बँटवारा तभी होता है जब आधार समांतर (एक-दूसरे के बराबर) कार्य कर रहे हों। ऊर्ध्वाधर श्रृंखला में तनाव पूरी रेखा पर हर जगह समान रहता है, इसलिए प्रत्येक तुला पूरा लटकता हुआ भार दर्शाती है।
मुख्य तथ्य
- कमानीदार तुला अपनी कमानी में उत्पन्न तनाव को, किलोग्राम-बल के तुल्य द्रव्यमान के रूप में दर्शाती है।
- आदर्श, भारहीन तुलाओं को श्रृंखला में लटकाने पर, तनाव — और इसलिए पाठ्यांक — प्रत्येक में समान होता है।
- S₁ और S₂ दोनों 10 kg दर्शाती हैं, क्योंकि पूरा 10 kg भार दोनों से होकर संचरित होता है।
- भार का बँटवारा और आधा होना तभी होता है जब आधार श्रृंखला में नहीं, बल्कि समांतर में कार्य कर रहे हों।

आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- यह मान लेना कि श्रृंखला में जुड़ी तुलाएँ भार को बाँट लेती हैं और प्रत्येक आधा दर्शाती है।
- श्रृंखला (एक के नीचे दूसरी) को समांतर (एक-दूसरे के बराबर) आधारों से भ्रमित करना।
- यह भूल जाना कि आदर्श तुला का अपना भार नगण्य माना जाता है।
NDA में प्रायः दो कमानीदार तुलाओं या पैमानों को श्रृंखला या समांतर में लटकते हुए द्रव्यमान के साथ प्रस्तुत कर, प्रत्येक का पाठ्यांक पूछा जाता है — यह तय करना होता है कि भार संचरित हो रहा है (श्रृंखला, समान पाठ्यांक) या बँट रहा है (समांतर, बँटा हुआ पाठ्यांक)।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
एक 20 kg द्रव्यमान कमानीदार तुला S₂ से लटका है, जो स्वयं इसके ऊपर स्थित कमानीदार तुला S₁ से लटकी है । तुलाओं के भार की उपेक्षा करते हुए, पाठ्यांक हैं :
- (a)S₁ = 10 kg, S₂ = 20 kg
- (b)S₁ = 20 kg, S₂ = 20 kg
- (c)S₁ = 20 kg, S₂ = 10 kg
- (d)S₁ = 10 kg, S₂ = 10 kg
उत्तर(b) S₁ = 20 kg, S₂ = 20 kg — लटकती हुई श्रृंखला में समान तनाव दोनों तुलाओं से होकर गुजरता है, इसलिए प्रत्येक पूरा 20 kg दर्शाती है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
एक हल्की छड़ के दोनों सिरों पर दो सर्वसम कमानीदार तुलाएँ (एक-एक सिरे पर, समांतर में) लगाकर उस पर 10 kg का भार लटकाया गया है । यदि भार मध्यबिंदु पर लटका है, तो प्रत्येक तुला लगभग कितना पाठ्यांक दर्शाएगी ?
- (a)10 kg
- (b)5 kg
- (c)20 kg
- (d)0 kg
उत्तर(b) 5 kg — समांतर आधार भार को साझा करते हैं, इसलिए प्रत्येक लगभग 10 kg का आधा भार वहन करता है।