निम्नलिखित में से कौन-सा, धातुओं का, उनकी अभिक्रियाशीलता के घटते हुए क्रम में सही विन्यास है ?
- (a)लोहा, सोडियम, रजत, ताम्र
- (b)रजत, ताम्र, लोहा, सोडियम
- (c)सोडियम, ताम्र, रजत, लोहा
- (d)सोडियम, लोहा, ताम्र, रजत
उत्तर
क्यों
सही — D, सोडियम, लोहा, ताम्र, रजत। अभिक्रियाशीलता (सक्रियता) श्रेणी में सोडियम अत्यधिक अभिक्रियाशील है, लोहा मध्यम अभिक्रियाशील है, और ताम्र तथा रजत अनभिक्रियाशील उत्कृष्ट धातुएँ हैं, अतः अभिक्रियाशीलता का घटता क्रम है Na > Fe > Cu > Ag। विकल्प D ठीक यही क्रम सूचीबद्ध करता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)लोहा, सोडियम, रजत, ताम्र — सोडियम लोहे से कहीं अधिक अभिक्रियाशील है, अतः Na को Fe से पहले आना चाहिए; साथ ही ताम्र रजत से अधिक अभिक्रियाशील है, कम नहीं, इसलिए रजत ताम्र से पहले नहीं आ सकता।
- (b)रजत, ताम्र, लोहा, सोडियम — यह अभिक्रियाशीलता का बढ़ता क्रम है (सबसे कम से सबसे अधिक अभिक्रियाशील) — जो प्रश्न में पूछे गए क्रम के ठीक विपरीत है।
- (c)सोडियम, ताम्र, रजत, लोहा — लोहा ताम्र और रजत दोनों से अधिक अभिक्रियाशील है, अतः इसे अंत में नहीं रखा जा सकता; लोहे का स्थान सोडियम के ठीक बाद है।
अवधारणा
अभिक्रियाशीलता श्रेणी धातुओं को इस आधार पर क्रमबद्ध करती है कि वे कितनी सरलता से इलेक्ट्रॉन त्यागती हैं और अभिक्रियाओं में भाग लेती हैं। सोडियम जैसी अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ ठंडे जल से भी अभिक्रिया करती हैं, लोहे जैसी मध्यम अभिक्रियाशील धातुएँ धीरे-धीरे अभिक्रिया करती हैं, और ताम्र व रजत जैसी सबसे कम अभिक्रियाशील उत्कृष्ट धातुएँ अभिक्रिया का प्रतिरोध करती हैं।
अधिक अभिक्रियाशील धातु किसी कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण-विलयन से विस्थापित कर सकती है।
चारों धातुओं को क्रमबद्ध करने के लिए मानक श्रेणी याद रखें: सोडियम ऊपर, लोहा मध्य में, और ताम्र-रजत स्वर्ण के ठीक ऊपर, नीचे की ओर स्थित हैं। सर्वाधिक से न्यूनतम अभिक्रियाशीलता की ओर पढ़ने पर सीधे Na, Fe, Cu, Ag प्राप्त होता है।
मुख्य तथ्य
- एक सामान्य सक्रियता श्रेणी है: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > (H) > Cu > Ag > Au।
- अधिक अभिक्रियाशील धातु किसी कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण-विलयन से विस्थापित करती है।
- सोडियम जल के साथ प्रबलता से अभिक्रिया करता है; लोहा केवल धीरे-धीरे अभिक्रिया करता है; ताम्र और रजत जल के साथ अभिक्रिया नहीं करते।
- रजत और स्वर्ण उत्कृष्ट धातुएँ हैं, जो प्रायः मुक्त अवस्था में पाई जाती हैं और अत्यधिक अनभिक्रियाशील होती हैं।
घटती अभिक्रियाशीलता: सोडियम, फिर लोहा, फिर ताम्र, फिर रजत।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- घटते क्रम के बजाय बढ़ता क्रम दे देना जबकि प्रश्न घटता क्रम माँगता है।
- लोहे को ताम्र या रजत से कम अभिक्रियाशील समझ लेना।
एनडीए/यूपीएससी धातुओं को अभिक्रियाशीलता के अनुसार क्रमबद्ध करने या यह भविष्यवाणी करने को कहते हैं कि कौन-सी धातु किसे विस्थापित करेगी — इसे मानक सक्रियता श्रेणी से जोड़ें।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सी धातु सर्वाधिक अभिक्रियाशील है?
- (a)ताम्र
- (b)रजत
- (c)सोडियम
- (d)स्वर्ण
उत्तर(c) सोडियम — यह अभिक्रियाशीलता श्रेणी में ऊपर स्थित है और ठंडे जल के साथ भी अभिक्रिया करता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
कॉपर सल्फेट विलयन में डुबोई गई लोहे की कील भूरी हो जाती है क्योंकि
- (a)ताम्र लोहे से अधिक अभिक्रियाशील है
- (b)लोहा अधिक अभिक्रियाशील है और ताम्र को विस्थापित करता है
- (c)कोई अभिक्रिया नहीं होती
- (d)लोहा जल में घुल जाता है
उत्तर(b) लोहा अधिक अभिक्रियाशील है और ताम्र को विस्थापित करता है — लोहा विलयन से ताम्र को बाहर धकेल देता है, जो कील पर जमा हो जाता है।